इलाज के इंतजार में दुनिया को छोड़ गया अर्धविक्षिप्त
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :28 Sep 2016 6:28 AM (IST)
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आरा : 30 दिनों पहले उसे लावारिस ही सदर अस्पताल लाया गया था. उसने मंगलवार को आखिरकार इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया. अस्पतालकर्मियों या मरीज के परिजनों ने उसे पागल की संज्ञा दे रखी थी. वह अपनों के वारिस के इंतजार में कि कोई आकर मेरा इलाज कराये, लावारिस दुनिया छोड़ गया और […]
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आरा : 30 दिनों पहले उसे लावारिस ही सदर अस्पताल लाया गया था. उसने मंगलवार को आखिरकार इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया. अस्पतालकर्मियों या मरीज के परिजनों ने उसे पागल की संज्ञा दे रखी थी. वह अपनों के वारिस के इंतजार में कि कोई आकर मेरा इलाज कराये, लावारिस दुनिया छोड़ गया और अब भी उसका शव सदर अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में पड़ा हुआ था.
कोर्ट को दिया था मानसिक आरोग्यशाला भेजने के लिए आवेदन : सदर अस्पताल प्रबंधन में मानसिक आरोग्यशाला में भेजने के लिए लावारिस 35 वर्षीय मरीज के लिए आरा के व्यवहार न्यायालय कोर्ट में आवेदन दिया था अब लोग इस बात को नहीं पचा पा रहे है कि अस्पताल के काम में कोर्ट की क्या भूमिका है.
अस्पताल प्रबंधन व लावारिस सेवा केंद्र के खिचखिच में चली गयी जान : लगभग 1 माह पहले सदर अस्पताल में इलाज के लिए लाकर इमरजेंसी वार्ड में फर्श पर रखे गये 35 वर्षीय लावारिस युवक को एक दो बार बेड पर डाल अस्पताल प्रबंधन ने अपने कर्तव्य से इति श्री कर लिया. दो बार के बाद इमरजेंसी वार्ड में फर्श पर पड़े लावारिस पर अस्पताल प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया. करीब 10 दिनों तक इमरजेंसी वार्ड में फर्श पर ही पड़ा रहा. इमरजेंसी वार्ड में आते-जाते अधिकारियों ने दूसरी जगह ले जाने के लिए कहा, तो सर्जिकल वार्ड के बरामदे में लावारिस छोड़ दिया गया. मगर इलाज कराने की जहमत किसी ने नहीं उठाया.
मरीज एवं उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर दबाव डाला तो अस्पताल प्रबंधन के द्वारा लावारिस सेवा केंद्र के संचालक से संपर्क किया गया.
क्या कहते सदर अस्पताल के डी एस
लवारिस का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा था. वह मानसिक तौर पर बीमार था और उसको मानसिक आरोग्यशाला में भेजने का उपाय किया गया था.
डॉ सतीश कुमार सिन्हा, डीएस, सदर अस्पताल
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