आरा : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना निबंधित जॉब कार्डधारियों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने में फीसड्डी साबित हो रही है. यही नहीं, शत-प्रतिशत जॉब कार्डधारी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की उक्त योजना फ्लॉप है. ऐसे सरकारी आंकड़े कुछ और बयां करते हैं, जबकि जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां करती है. कागजी खानापूर्ति कर मनरेगा की प्रगति को बेहतर तो दिखा दिया जाता है, लेकिन पूर्ण और अपूर्ण योजनाओं के अद्यतन प्रगति भी इस पर भारी पड़ रहा है. जिले में मनरेगा योजना के अंतर्गत जुलाई माह तक 184 निबंधित जॉब कार्डधारी परिवारों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया है.
वहीं, 20836 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है. जिले के 228 पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत जुलाई माह तक 16 करोड़ 66 लाख 64 हजार रुपये खर्च किये जा चुके हैं. लेकिन, पंचायतों में कोई ऐसी एक योजना नहीं है, जो आदर्श योजना के मानक पर खड़ा उतरे. ऐसे तो मनरेगा योजनाओं के गुणवत्ता को लेकर पंचायत, प्रखंड से लेकर जिला तक जांच पदाधिकारियों की एक लंबी-चौड़ी फौज है. लेकिन, योजनाओं में होनेवाली लूट और प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराये जाने के बाद भी इन जांच पदाधिकारियों द्वारा किसी के विरुद्ध अब तक कोई सख्त व ठोस कार्रवाई नहीं की गयी है. उक्त योजना के तहत होने वाले कार्यों की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि योजना का काम न होते देर लगती है और न बिगड़ते ही.
मनरेगा के नियोजन की स्थिति : जिले में मनरेगा के तहत 327673 परिवार निबंधित हैं, जिसमें सभी परिवारों को जॉब कार्ड भी निर्गत किया जा चुका है. इसमें जुलाई माह तक 29647 परिवारों ने रोजगार की मांग की है, जिसमें 20836 परिवारों को रोजगार भी उपलब्ध करा दिया गया है. ये सरकारी आंकड़े बयां कर रहे हैं.
मनरेगा की भौतिक स्थिति एक नजर में : मनरेगा योजना की भौतिक स्थिति इस प्रकार है. अप्रैल, 2016 तक 2841 योजनाएं अपूर्ण थीं, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 362 योजनाएं ली गयी हैं. जुलाई माह तक मात्र 440 योजनाएं पूर्ण की गयी हैं, जबकि 2763 योजनाएं अभी भी अपूर्ण हैं.
चालू वित्तीय वर्ष में 362 योजनाएं ली गयीं
सरकार की सख्ती के बाद भी शत-प्रतिशत जॉब कार्डधारी मजदूरों का नहीं खुला खाता
बैंक खाते को आधार कार्ड से लिंक करने का मामला भी अधर में
मनरेगा के 64021 खाते बैंक में
जिले में अब तक 87272 जॉब कार्डधारी मजदूरों का खाता बैंक और डाक घर में उपलब्ध है, जिसमें बैंक खाता 64021 और डाक घर में 23251 खाता उपलब्ध है.
मनरेगा की वित्तीय स्थिति
मनरेगा योजना में अप्रैल, 2016 तक चार करोड़ 19 लाख 60 हजार रुपये अवशेष बचे हुए थे. चालू वित्तीय वर्ष 2016-17 में केंद्रांश के रूप में 16 करोड़ 64 लाख 7 हजार 300 रुपये प्राप्त हुए हैं, जबकि अब तक राज्यांश के रूप में एक रुपये की राशि भी नहीं प्राप्त हुई है. इस प्रकार से उक्त योजना में उपलब्ध 20 करोड़ 84 लाख 33 हजार रुपये की राशि में से जुलाई माह तक 16 करोड़ 66 लाख 6400 रुपये की राशि खर्च की जा चुकी है, जबकि अवशेष राशि चार करोड़ 17 लाख 69 हजार है.
क्या कहते हैं जिला कार्यक्रम समन्वयक
जिला प्रशासन मनरेगा योजना के कार्य को प्राक्कलन के अनुरूप कराने को दृढ संकल्पित है. इसको लेकर प्रखंडों के प्रभारी पदाधिकारी को नियमित प्रखंड का दौरा कर संचालित मनरेगा योजनाओं को अनुश्रवण करने का निर्देश दिया है. वहीं, मनरेगा योजना के कार्य में तेजी लाने का भी सभी पीओ को आदेश दिया गया है.
डॉ वीरेंद्र प्रसाद यादव, जिला कार्यक्रम समन्वयक सह जिलाधिकारी