नहरों में पानी नहीं, पिछड़ सकती है गेहूं की खेती

बिक्रमगंज : धान के फसल के अंतिम पटवन के समय अनुमंडल क्षेत्र से गुजरने वाले नहरों में पानी नहीं होने से किसान गेहूं की बुआई समय से नहीं होने की संभावना व्यक्त करने लगे है. सभी संपन्न किसान खेतों की सिंचाई के लिए बोरिंग या डीजल पंप सेट का प्रयोग शुरू कर दिये है. लेकिन, […]
बिक्रमगंज : धान के फसल के अंतिम पटवन के समय अनुमंडल क्षेत्र से गुजरने वाले नहरों में पानी नहीं होने से किसान गेहूं की बुआई समय से नहीं होने की संभावना व्यक्त करने लगे है. सभी संपन्न किसान खेतों की सिंचाई के लिए बोरिंग या डीजल पंप सेट का प्रयोग शुरू कर दिये है. लेकिन, गरीब किसानों के पास सिंचाई की समस्या उत्पन्न हो गयी है.
बताया जाता है कि धान के फसल में बलिया आने लगी है. ऐसे में पुष्ट अनाज के लिये खेतों में पानी की आवश्यकता है. साथ ही खेतों में पानी नहीं होगा तो फसल कटने से पहले ही खेत की नमी समाप्त हो जायेगी और गेहूं की बुआई कर पाना संभव नहीं होगा. अब गेहूं की बुआई के लिए फसल कटने के बाद पुन: खेत का पटवन करना होगा.
इसके बाद ही गेहूं की बुआई हो सकती है. इसमें लगभग 15 दिनों का समय लगेगा. अर्थात गेहूं की बुआई 15 दिनों के बाद ही हो सकती है. कृषि वैज्ञानिक राकेश कुमार प्रसाद बताते हैं कि पौधे में दाना पड़ने के समय फसल के जड़ के पास पानी का होना या जमीन गीला होना आवश्यक है. यदि ऐसा नहीं है, तो एक तरफ जहां धान का उत्पादन प्रभावित होगा, वहीं दूसरी ओर गेहूं की बुआई समय पर नहीं हो सकती है.
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