गंगा में स्नान मतलब, सब अधर्म कार्य का त्याग

Updated at : 24 Dec 2019 7:32 AM (IST)
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गंगा में स्नान मतलब, सब अधर्म कार्य का त्याग

सरैंया : बड़हरा प्रखंड के बबुरा में प्रवचन करते हुए श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि गंगा स्नान का मतलब अनीति, अन्याय, बेइमानी, अधर्म और पाप का त्याग करना है. गंगा स्नान का मतलब यह नहीं होता है कि जाकर संगम या गंगा जी में डुबकी लगा लें. स्नान का मतलब होता है […]

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सरैंया : बड़हरा प्रखंड के बबुरा में प्रवचन करते हुए श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि गंगा स्नान का मतलब अनीति, अन्याय, बेइमानी, अधर्म और पाप का त्याग करना है. गंगा स्नान का मतलब यह नहीं होता है कि जाकर संगम या गंगा जी में डुबकी लगा लें. स्नान का मतलब होता है हमने उस गंगा में स्नान तो किया, अब हमारे जीवन में किसी प्रकार की अनीति, अन्याय, बेइमानी, अधर्म और पाप नहीं होंगे.

ऐसा विचार कर प्रेम की गंगा में, दया की गंगा में, सदाचार की गंगा में, परमार्थ की गंगा में स्नान करें. जल में स्नान करके जल में ही किसी देवता को जल देना हो, तो सूखा वस्त्र पहनकर नहीं जल देना चाहिए. बाहर आकर सूखे वस्त्र पहन कर जल देना चाहिए. ऐसा शास्त्र में विधान बताया गया है.
विशेष परिस्थितियों में बोला जा सकता है थोड़ा झूठ
जहां सत्य नहीं, वहां कुछ नहीं, लेकिन आज के परिवेश में सबकुछ है, परंतु सत्य ही नहीं है. असत्य के समान दूसरा कोई पाप नहीं है. सत्य के समान दूसरा कोई पुण्य नहीं है. प्राण संकट में हो तभी झूठ बोलना चाहिए.
झूठ का दोष तो लगेगा ही, परंतु क्षम्य होगा. स्त्री-पुरुष आपस में वार्तालाप कर रहे हों, पत्नी या पति थोड़े कठोर स्वभाव के हों, इनमें से कोई धमकी भरे शब्दों में मरने की बात कर रहा हो, तो वहां थोड़ा सा झूठ बोला जा सकता है. कन्या के विवाह के समय भी थोड़ा सा ऊंच-नीच बोल देने से यदि विवाह हो जा रहा हो, तो वहां झूठ का दोष नहीं लगता.
प्राण संकट के समय, जीविकोपार्जन की अंतिम सीमा समाप्त हो रही है. जब लगे की परिवार, घर, गृहस्थी सब कुछ अब नहीं रहेगा, तो वहां भी थोड़ा सा झूठ बोल देने से दोष नहीं लगता है. यदि राष्ट्र, देश में किसी दुष्ट द्वारा किसी नारी को दिग्भ्रमित किया जा रहा है, तो वहां भी नारी को बचाने के लिए झूठ बोला जा सकता है. यहीं मनुष्य की पहचान है.
भागवत कथा सप्ताह कल से आयेंगे जीयर स्वामी
आरा. शाहपुर प्रखंड के धर्मागतपुर गांव में 25 से 31 दिसंबर तक भागवत कथा सप्ताह का आयोजन किया गया है, जिसमें श्री त्रिदंडी स्वामी जी के परम शिष्य तथा भारत के महान संत श्री जीयर स्वामी जी महाराज का भी पदार्पण होनेवाला है.
मीडिया प्रभारी अखिलेश बाबा ने एक बयान जारी कर बताया कि धर्मांगतपुर में 25 दिसंबर से श्री जीयर स्वामी जी के परम शिष्य श्री मुक्तिनाथ स्वामी जी तथा श्री बैकुंठनाथ स्वामी जी का 31 दिसंबर तक भगवत कथा सप्ताह होगा. 25 को जलभरी का भी आयोजन किया गया है. इस कार्यक्रम को लेकर गांव के लोगों में काफी उत्साह है. समिति के लोग काफी उत्साह से लगे हुए हैं. आसपास के गांवों के भी लोग इस तैयारी में जुटे हुए हैं.
कार्यक्रम के मुख्य व्यवस्थापक वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव पांडेय ने बताया कि 11 बजे तक श्री जीयर स्वामी जी महाराज का आगमन धर्मागतपुर में हो जायेगा और उन्हीं के सान्निध्य में जल भरी का कार्यक्रम होगा.
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