ePaper

....और समाप्त हो गया गणित का एक अंतरराष्ट्रीय युग

Updated at : 15 Nov 2019 8:22 AM (IST)
विज्ञापन
....और समाप्त हो गया गणित का एक अंतरराष्ट्रीय युग

आरा : विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की मौत की खबर से समाज के हर वर्ग को दुख पहुंचा है. भाव विह्वल जिलेवासियों ने कहा कि उनके निधन से गणित के एक अंतरराष्ट्रीय युग का अंत हो गया. वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर यूएस पांडेय ने कहा […]

विज्ञापन

आरा : विश्व प्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की मौत की खबर से समाज के हर वर्ग को दुख पहुंचा है. भाव विह्वल जिलेवासियों ने कहा कि उनके निधन से गणित के एक अंतरराष्ट्रीय युग का अंत हो गया.

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के रसायन विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर यूएस पांडेय ने कहा कि उनका पूरा जीवन गणित है. डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह गणित थे और गणित डॉ सिंह.
दोनों एक-दूसरे के पूरक थे. वहीं महाराजा महाविद्यालय के गणित विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो गुलाब सिंह ने कहा कि डॉ सिंह ने मानसिक स्थिति असंतुलित होने के पहले थोड़े समय में ही गणित के क्षेत्र में अद्वितीय मुकाम हासिल किया था. यदि वे ठीक होते तो शायद विश्व को बहुत कुछ मिल सकता था.
दोनों हाथों से एक साथ लिखते थे डॉ वशिष्ठ
आरा : महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की प्रतिभा ऐसी थी कि वे एक साथ दोनों हाथों से लिखते थे. एक ही समय में दोनों हाथ से अलग-अलग विषयों के बारे में लिखना किसी विलक्षण प्रतिभा का ही काम हो सकता है.
इतना ही नहीं बिना रुकावट के धड़ल्ले से लिखते थे. डॉ सिंह अमेरिका के मशहूर संस्थान नासा में कार्यरत थे. इस दौरान नासा द्वारा अपोलो का लांचिंग किया जा रहा था.
लांचिंग के पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गये, तो डॉ सिंह ने डाटा का स्वयं ही कलकुलेशन करना शुरू कर दिया. कंप्यूटर ठीक होने पर देखा गया कि उनका और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक था. ऐसे प्रतिभा संपन्न थे जिले के लाल अपने डॉ वशिष्ठ.
ग्रामीणों ने भारत रत्न की उठायी मांग
जैसे ही उनका पार्थिव शरीर बसंतपुर गांव पहुंचा. लोगों ने प्रशासन से डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित करने की आवाज उठायी.
हालांकि इस दौरान लोगों में इस बात का आक्रोश भी था कि सरकार अगर पहल की होती, तो शायद अभी वशिष्ठ नारायण सिंह जिंदा होते, लेकिन सरकार के उपेक्षा के कारण उनका सही ढंग से इलाज नहीं हो पाया. इस बात का मलाल पूरे परिवार को है.
हालांकि उनके परिजन तथा ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से भारत रत्न देने के लिए कहा. सरकार इस पर विचार करेगी. इस संबंध में बिहार सरकार के मंत्री जयकुमार सिंह ने कहा कि इस बात को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत की जायेगी.
सुरक्षा को लेकर तैनात थे पुलिसकर्मी
उनके पार्थिव शरीर को पैतृक गांव बसंतपुर पहुंचाने को लेकर आरा से लेकर बसंतपुर गांव तक पुलिस बल तैनात किये गये थे, ताकि कोई परेशानी न हो. धोबहां बाजार से उनके गांव तक पुलिस बल के जवान तैनात थे. पहले से ही फोर्स उनके गांव पर तैनात कर दिया गया था. स्वयं डीएम और एसपी मॉनीटरिंग कर रहे थे.
राम प्रवेश और कन्हैया के आंसू नहीं थम रहे थे
वशिष्ठ नारायण सिंह के बचपन के दोस्त राम प्रवेश साह उसी गांव के रहनेवाले हैं. वही, एक मात्र दोस्त हैं. जैसे ही अपने बचपन के मित्र की मौत की खबर सुने उनके आंखों के आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे थे.
ग्रामीण राम प्रवेश ने बताया कि वशिष्ठ बचपन से ही पढ़‍ने में काफी मेधावी थे. वहीं, कन्हैया सिंह ने भी वशिष्ठ नारायण सिंह का नाम लेकर रो पड़े. उन्होंने कहा कि अब एक युग का अंत हो गया. ऐसा व्यक्ति अब नहीं मिलेगा.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन