भोजपुर एसपी और पुलिस अफसरों को पटना हाईकोर्ट का आदेश, 2 जुलाई को होना होगा हाजिर, जानें मामला

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पटना हाईकोर्ट

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने पिछले 10 महीने से गायब दलित युवक सनोज कुमार को न ढूंढ पाने पर भोजपुर पुलिस को फटकार लगाई है. अदालत ने पुलिस की जांच पर असंतोष जताते हुए भोजपुर एसपी को 2 जुलाई को सारे कागजात के साथ दोबारा पेश होने का आदेश दिया है.

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Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने पिछले दस महीने से लापता एक दलित युवक को खोज पाने में नाकाम रहने पर भोजपुर पुलिस की कार्यशैली पर ऐतराज जताया है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अब तक पुलिस ने जो भी छानबीन की है, उससे अदालत बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है.

हाईकोर्ट ने मामले के सारे डॉक्यूमेंट के साथ भोजपुर के एसपी और अन्य संबंधित पुलिस अधिकारियों को आगामी 2 जुलाई को कोर्ट में हाजिर होने का सख्त निर्देश दिया है, जबकि भोजपुर के डीएम को अगली बार व्यक्तिगत रूप से आने से छूट दे दी है.

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हाई कोर्ट की खंडपीठ ने पिता की याचिका पर की सुनवाई

मंगलवार को इस मामले की सुनवाई के समय भोजपुर के डीएम, एसपी और जगदीशपुर के एसएचओ समेत कई बड़े अधिकारी कोर्ट रूम में मौजूद थे. न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति कुमार मनीष की खंडपीठ ने लापता युवक सनोज कुमार के पिता गौरीशंकर राम की तरफ से दाखिल की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) पर यह सुनवाई की.

संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो सीबीआई को सौंप देंगे जांच

अदालत ने नाराजगी जताते हुए भोजपुर एसपी से सवाल किया कि उन्होंने अपने स्तर पर इस मामले को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए? लेकिन एसपी कोर्ट में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके. इस पर अदालत ने कहा कि अगर पुलिस अपनी जांच से कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाई, तो इस केस की पूरी जांच सीबीआई (CBI) के हवाले कर दी जाएगी.

राज्य के महाधिवक्ता एस डी संजय ने बीच-बचाव करते हुए कोर्ट को भरोसा दिलाया कि ऐसी नौबत नहीं आने दी जाएगी और वे खुद अपने स्तर से इस गंभीर मामले को देखकर जांच की प्रगति की रिपोर्ट देंगे.

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उत्पाद पुलिस की भूमिका पर गहराया संदेह

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अब तक जो भी बातें और सबूत सामने आए हैं, उससे यह साफ लगता है कि उत्पाद विभाग की पुलिस सच को छुपा रही है. उत्पाद पुलिस के बयानों में काफी उलटफेर और विरोधाभास देखने को मिला है.

कोर्ट ने टिप्पणी की कि कागजात देखने से पता चलता है कि उत्पाद पुलिस ने युवक को पकड़ा था और वह उनकी हिरासत से भाग निकला, लेकिन उसके बाद वह कहां गायब हो गया, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है. कोर्ट ने कहा कि इस पूरे मामले में उत्पाद पुलिस की भूमिका संदिग्ध है.

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