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अंदर चल रही थी बैठक, बाहर में छात्र मचा रहे थे हंगामा

आरा : वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट पर सीनेट की मुहर गुरुवार को लग गयी. विवि के उच्च सदन में सदस्यों के हो-हल्ले व हंगामें के बीच आठ अरब 40 करोड़ 40 लाख 13 हजार 104 रुपये के घाटे की बजट राज्य सरकार के पास भेजने के लिए सहमति बनी. […]

आरा : वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट पर सीनेट की मुहर गुरुवार को लग गयी. विवि के उच्च सदन में सदस्यों के हो-हल्ले व हंगामें के बीच आठ अरब 40 करोड़ 40 लाख 13 हजार 104 रुपये के घाटे की बजट राज्य सरकार के पास भेजने के लिए सहमति बनी. सदन में आठ अरब 42 करोड़ 14 लाख 70 हजार 977 रुपये का बजट विवि प्रशासन की ओर से पेश किया गया.
इसमें तीन करोड़ 49 लाख 57 हजार 873 रुपये विवि की ओर से आंतरिक स्त्रोत से आमदनी होने का ब्योरा प्रस्तुत किया गया. आतंरिक स्त्रोत से प्राप्त राशि को मूल बजट से घटाने के बाद आठ अरब 40 करोड़ 40 लाख 13 हजार 104 रुपये की आवश्यकता पड़ेगी. घाटे की इस राशि के लिए सीनेट से मुहर लगने के बाद राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जायेगा. हालांकि बजट में कई तरह की त्रुटियों का उजागर सदस्यों ने किया. त्रुटियों को दूर करने के बाद ही बजट को राज्य सरकार के पास भेजने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया.
एक घंटा विलंब से शुरू हुआ उच्च सदन : सीनेट की बैठक की कार्रवाई एक घंटे विलंब से शुरू हुई. बैठक की शुरुआत वीर बाकुंडे बाबू कुंवर सिंह की प्रतिमा पर मल्यार्पण कर शुरू किया गया, जिसके बाद छात्राओं ने कुलगीत प्रस्तुत किया. बैठक की शुरूआत होते ही अभाविप, आइसा व छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा मचाया. जिसके बाद पुलिस बल के जवानों को कुछ समय के लाठी भी चटकानी पड़ी.
सुझाव को रद्दी टोकरी में फेंकने की कोशिश न की जाये : पूर्व कुलपति : सीनेट की बैठक में सदस्यों द्वारा दिये गये सुझाव को रद्दी की टोकरी में फेंकने का कार्य नहीं किया जाये. उक्त बातें पूर्व कुलपति डॉ आइसी कुमार ने कहीं. उन्होंने कहा कि 17 सीनेट की बैठकों मैं देख चुका है तथा खुद तीन सीनेट की बैठक का आयोजन करा चुका हूं. विवि नैक से ए प्लस ग्रेड कराने का सपना देख रहा है लेकिन दुभार्ग्य की बात है कि विवि अपनी जमीन की रक्षा करने में ही सक्षम नहीं है.
लगभग 21 एकड़ में फैला हुआ जैन कॉलेज का जमीन इसी तरह से पड़ा हुआ है. 70 प्रतिशत जमीन खाली पड़ी हुई है. उस पर अभी तक ब्राउंड्री नहीं करायी गयी है. बिना मान्यता के ही विवि में कई विषयों की पढ़ाई करायी जा रही है. शिक्षकों के पद तक सृजन नहीं है. इन बिंदुओं पर फोक्स करने की जरूरत है.
सिंडिकेट व वित्त समिति चुनाव के लिए डाले गये वोट
सिंडिकेट चुनाव के लिए कुल आठ पदों पर शिक्षक वर्ग से 27 लोगों में मतदान का प्रयोग किया. वहीं गैर शिक्षक की तरफ से 28 में से 20 लोगों ने अपने-अपने मत का प्रयोग किया. वित्त समिति के चार पदों के लिए 51 मतदाताओं में से 41 मतदाताओं ने अपने-अपने वोट का इस्तेमाल किया. चुनाव को लेकर विज्ञान भवन में काफी गहमागहमी रही. बूथ संख्या एक पर शिक्षक श्रेणी, बूथ संख्या दो पर गैर-शिक्षक श्रेणी व बूथ संख्या तीन पर वित्त समिति का चुनाव कराया गया.
बजट का ब्योरा
कुल बजट : आठ अरब 42 करोड़ 14 लाख 70 हजार 977 रुपये
घाटे की राशि: आठ अरब 40 करोड़ 40 लाख 13 हजार 104 रुपये
आतंरिक स्त्रोत से आमदनी : तीन करोड़ 49 लाख 57 हजार 873 रुपये
वेतन व पेंशन पर खर्च होने वाली राशि: पांच अरब 17 करोड़ 62 लाख 87 हजार 34 रुपये बकाया भुगतान की राशि:
एक अरब 71 करोड़ 74 लाख 39 हजार 976 रुपये आकस्मिकता मद की राशि : 16 करोड़ 64 लाख 76 हजार 191 रुपये
गुटबाजी पर लगाया जाये अकुंश तभी होगा पठन-पाठन का वातावरण कायम
पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि विवि द्वारा किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए आश्वासन दिया जाता है. आश्वासन की एक अवधि होनी चाहिए, उस आश्वासन को 90 दिनों में पूरा किया जाये. विवि में पढ़ाई का वातावरण दिन-प्रतिदिन कम होता ही जा रहा है.
छात्रों द्वारा गुटबाजी की जा रही है इस पर अकुंश लगाने की जरूरत है. सीनेट की बैठक में प्रो. देववंश सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि सत्र 2018-19 के कार्य योजना का प्रतिवेदन तक उपलब्ध नहीं कराया गया.
क्या-क्या कार्य हुआ है इसका अता पता तक नहीं है. विवि व महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन की उपलब्धि तक जिक्र नहीं की गयी है. अंगीभूत व संबंध महाविद्यालयों के बारे में अभिभाषण में कोई उल्लेख नहीं है.
एनसीटी के द्वारा बीएड विभाग की मान्यता रद्द किये जाने के बाद विवि प्रशासन द्वारा क्या कार्रवाई की गयी. कॉलेज के अस्थायी संबंधन व दीर्धीकरण पर क्या निर्णय लिया गया है. इन सारी बातों का कोई जिक्र नहीं हुआ है.
प्रो. आलोक जैन ने कहा कि वीर कुंवर सिंह विवि परिसर में हर प्रसाद दास जैन की चेयर की स्थापना, रेल आरक्षण के लिए रेल मंत्रालय के पास पत्र लिखे जाने तथा विवि में मॉस कम्युनिकेशन की पढ़ाई शुरू करने की बातों को रखा.
भोजपुरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ दिवाकर पांडेय ने सवाल उठाते हुए कहा कि सीनेट की बैठक साल में दो बार कराने की बात हर बार सीनेट में उठायी जाती है लेकिन आज तक इस पर अमलीजामा नहीं पहनाया गया है. प्रो अलाउद्दीन ने रोहतास महिला कॉलेज के नामकरण में बदलाव करने की बातों को रखा. उन्होंने कॉलेज का नाम हाजी बेगम करने की बात कही.
Prabhat Khabar Digital Desk
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