Bhagalpur news विक्रमशिला सेतु का स्लैब गंगा में समाया, आवाजाही पर लगी रोक

Published by :JITENDRA TOMAR
Published at :04 May 2026 2:29 AM (IST)
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Bhagalpur news विक्रमशिला सेतु का स्लैब गंगा में समाया, आवाजाही पर लगी रोक

भागलपुर विक्रमशिला सेतु के पोल नंबर 133 के पास बड़ा गैप बनने के बाद चार और पांच नंबर पिलर के बीच का स्लैब गंगा में समा गया.

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ललित व ऋषभ

भागलपुर विक्रमशिला सेतु के पोल नंबर 133 के पास बड़ा गैप बनने के बाद चार और पांच नंबर पिलर के बीच का स्लैब गंगा में समा गया. यह घटना रात करीब 12.55 बजे के बाद की बतायी जा रही है. हालांकि एक्सपेंशन ज्वाइंट में गैप की सूचना 11 बजे के आसपास प्रशासन को किसी ने वाहन चालक ने फोन से दी थी. अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.

जानकारी के अनुसार रविवार देर रात भागलपुर की ओर से नवगछिया जाने वाली पोल नंबर 133 के पास पिलर संख्या चार और पांच के बीच शाम से ही गैप बढ़ता गया और रात 11 बजे के बाद वह स्पष्ट दिखा. इसके बाद रात 12.55 में पूरा भाग गंगा में समा गया. दोनों ओर का संपर्क कट गया है. पुलिस की तैनाती कर दी गयी है. दोनों ओर से वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गयी है. रात दो बजे के आसपास डीएम व एसएसपी के साथ ही अन्य वरीय अधिकारियों ने पुल का जायजा लिया. पुल निर्माण निगम के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में लगे गये. जितनी बड़ी गाड़ियां आ रही हैं, दोनों ओर से उन्हें वापस लौटाया जा रहा है. मालूम हो कि आठ साल से इस पुल की मरम्मत नहीं हुई थी. प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त होने से सेतु के मुख्य ढांचे को नुकसान पहुंचने की तभी आशंका बढ़ गयी थी.

जिस भाग में ब्रिज क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां पर एसडीओ ट्रैफिक डीएसपी सहित पुलिस बल के काफी संख्या में जवान पहुंच चुके हैं. एसडीओ ने कहा कि कुछ समय के लिए आवागमन बाधित रहेगी. उन्होंने अपील की है कि अफवाहों से बचें और वैकल्पिक मार्ग से आवागमन करें. अधिकारियों ने कहा कि सोमवार से ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदल जायेगी. ……………………………..-विक्रमशिला का पाेल नंबर 133 के पास स्लैब टूट गया है, इसलिए विक्रमशिला पुल पर आवागमन बंद है. सोमवार से ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदल जायेगी.

-प्रमोद कुमार यादव, एसएसपी, भागलपुर.

जिलाधिकारी ने कहा कि रात्रि के 12.50 में पिलर नंबर 133 के पास एक बड़ा गैप बन गया. ट्रैफिक पुलिस की सूझ बूझ से हमलोगों ने पुल को खाली करवा दिया. कुछ देर बाद ही पुल का एक बड़ा स्लैब टूट गया. दोनों तरफ से सेतु को सील कर दिया गया है. अब यात्री या मालवाहक ट्रक भाया मुंगेर यात्रा कर सकते हैं. सुबह हमलोग कोई और वैकल्पिक मार्ग की तलाश करेंगे. घटना में किसी कोई हताहत नहीं हुआ है.

-डॉ नवल किशोर चौधरी, डीएम-विक्रमशिला सेतु की लंबाई 4.7 किमी है-भागलपुर के बरारी (दक्षिण तट) को नवगछिया (उत्तर तट) से जोड़ता है.

-15 नवंबर 1990 को आधारशिला रखने के बाद, यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन द्वारा निर्मित यह -पुल लगभग 10 वर्षों में बनकर 2001 में चालू हुआ.

-उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने किया था.

-यह एनएच-33 और एच-31 को जोड़ता है-2017 में 16 करोड़ रुपये की लागत से इसका जीर्णोद्धार किया गया था.

-मार्च 2026: पिलर नंबर 17, 18 व 19 की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हुई-पिलर संख्या 128, 148, 141, 125, 121, 113 के बीच के एक्सपेंशन जॉइंट में 4 से 5 इंच तक गैप बढ़ता रहा है. इससे कंपन व दरारों की खबरें सामने आती रही हैं.

पुल के पिलर में देखी गयी थीं दरारें

पुल के पिलरों के चारों ओर बनायी गयी फॉल्स वॉल जो इन्हें पानी और बाहरी प्रभाव से बचाती थी, धीरे-धीरे टूटने खबर दो माह पहले सामने आयी थी. खासकर एक पिलर के आसपास की सुरक्षा पूरी तरह खत्म हो गयी है, जबकि दो अन्य स्तंभों के चारों ओर की सुरक्षा काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है. लंबे समय से भारी वाहन और लगातार बढ़ता ट्रैफिक इस पुल पर दबाव डाल रहे हैं. जिससे इस पर जोर पड़ता है.

हर रोज 20 से 25 हजार गाड़ियां गुजरती हैं

विक्रमशिला सेतु भागलपुर (एनएच-80) और नवगछिया (एनएच-31) को जोड़ता है. इस सेतु से हर दिन करीब 20 से 25 हजार छोटी-बड़ी गाड़ियां गुजरती हैं. ट्रकों के कारण एक्सपेंशन जॉइंट्स में पहले ही करीब पांच इंच का गैप आ चुका था. इसके बावजूद 2016 के बाद से इस पुल की कोई ठोस तकनीकी मरम्मत नहीं हुई है.

2018 में मुंबई की एजेंसी ने स्पेन उठाकर बदलवाया था बॉल-बेयरिंग

वर्ष 2018 में भी विक्रमशिला सेतु की मरम्मत करायी गयी थी. साढ़े 12 करोड़ रुपये से विभिन्न प्रकार के कार्य किये गये थे. मुंबई की एजेंसी रोहरा रिबिल्ड एसोसिएट द्वारा बॉल-बेयरिंग बदली गयी थी, जिसके लिए पुल के स्पैन को उठाया गया था. उस समय कई दिनों तक पुल से आवाजाही बंद रही थी. स्पैन की दरार पर कार्बन प्लेट चिपकाने, एक्सपेंशन ज्वाइंट बदलने और सेतु की सड़क का निर्माण कार्य लगभग डेढ़ वर्षों तक चला था.

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