परिधि सृजन मेला : नाटक की गति ने दर्शकों को बांधे रखा

Updated at : 29 Apr 2025 11:24 PM (IST)
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परिधि सृजन मेला : नाटक की गति ने दर्शकों को बांधे रखा

परिधि सृजन मेला के तीसरे दिन एकल नृत्य की प्रस्तुति.

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-आज कला प्रदर्शनी, कवि गोष्ठी समेत होगा पुरस्कार वितरण

वरीय संवाददाता, भागलपुरपरिधि सृजन मेला के तीसरे दिन की शुरुआत एकल अभिनय प्रतियोगिता से हुई. इसमें बड़ी संख्या में भागलपुर, बांका, मुंगेर जिले के ग्रामीण क्षेत्रोंं से कलाकार पहुंचे थे. कलाकारों की प्रस्तुति में गहराता पर्यावरण संकट और सद्भावना पूर्ण समाज, नशा, शिक्षा,अविभावक बच्चों के रिश्ते, नौकरी की कमी से उपजी हताशा, नेताओं का ढपोरशंखी प्रवृत्ति आदि अनेक ज्वलंत मुद्दे से श्रोता रू-ब-रू हुए. नाटक प्रतियोगिता में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना कृत, सुभाष निर्देशित ””””बकरी”””” की प्रभावी प्रस्तुति डिवाइन गुरुकुलम, बांका ने दिया. किसी पशु विशेष को भक्ति का प्रतीक बना कर सामाजिक बिलगाव की राजनीति को बखूबी प्रस्तुत कर कलाकारों ने वाहवाही लूटी. नाटक की गति ने दर्शकों को बांधे रखा.

नाटक रामलीला में मुक्ति निकेतन, घोघा के कलाकारों ने यह दिखाने की कोशिश की कि रामलीला हमेशा से आपसी सौहार्द वातावरण में मिलकर खेलते रहे हैं. राजनीतिक कारणों से सांप्रदायिक तत्वों ने इस गंगा जमुनी तहजीब को दूषित करने का षड़यंत्र किया. नाटक समाज में सद्भाव की अपील करता है. किलकारी, भागलपुर के नाट्य दल ने निर्देशकीय कुशलता और रंग तकनीकों का अद्भुत सामंजस्य के बीच कलाकारों का निर्वाह संतुलित दिखा. संगीत युक्तियों का भी बहुत बढ़िया इस्तेमाल रहा. ”””” राजा के कान”””” प्रसिद्ध लोकगाथा पर आधारित प्रभुदयाल श्रीवास्तव लिखित सुमित कुमार मिश्रा निर्देशित यह नाट्य प्रस्तुति दर्शकों की भूरी भूरि प्रशंसा का हकदार रही.समूह नृत्य की अबाध प्रस्तुतियों ने मेले के वातावरण को झूमा दिया. रंग बिरंगे परिधानों में सुसज्जित नृत्यांगनाएं परियों के मानिंद पूरे परिसर में विचरण कर रही थीं. वे जब मंच पर आ गयी तो दर्शक उनकी थिरकन के साथ कला की ऊंचाई में खो से गये.

कलाकेंद्र के प्राचार्य राजीव कुमार सिंह ने कहा कि कला न केवल दिलों को जोड़ती है बल्कि समुदाय, काल और मान्यताओं को भी जोड़ती है. निदेशक उदय ने कहा कि संस्कृति हमेशा लेन देन से बनती है. संस्कृति जोड़ती है जबकि, धर्म संप्रदाय एक दूसरे से एलिनियेट करती है. इस अवसर पर सूचना जनसंपर्क के पूर्व निदेशक शिवशंकर सिंह पारिजात, श्रीकांत, राजेश झा, चैतन्य, संजीव कुमार दीपू, उज्ज्वल घोष, तकी अहमद जावेद, शैलेन्द्र, संतोष ठाकुर व अन्य थे.

पूर्व आइपीएस आरके मिश्रा भी पहुंचे

पूर्व आइपीएस आरके मिश्रा भी मेले में पहुंचे. भागलपुर में 90 दशक में एसपी के तौर पर काम करने के अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि निस्संदेह राजनीति लोगों को बांट देती है और संस्कृति समाज के भिन्न भिन्न समूहों को जोड़ती है. राजनीतिक दलों को भी सांस्कृतिक नीति बनानी होगी.

आज कला प्रदर्शनी, कवि गोष्ठी व पुरस्कार वितरण

परिधि सृजन मेला में बुधवार को कला प्रदर्शनी, कवि गोष्ठी, पुरस्कार वितरण किया जायेगा. चित्रांकन, मिट्टी खिलौना, पोस्टर, फोटोग्राफी, शिल्प और चित्र प्रदर्शनी प्रतियोगिता और बचे सभी पुरस्कार वितरण किए जायेंगे.

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