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Bhagalpur News: नगर निगम टारगेट से आधा भी नहीं कर पा रहा कलेक्शन

नगर निगम की कार्यशैली कुछ तो गड़बड़ है. वह न तो कभी शहर की सफाई में अव्वल आ सका है और न ही उनके विकास कार्यों की रफ्तार तेजी पकड़ सकी है.

– नगर निगम न तो कभी शहर की सफाई में अव्वल आ सके और न विकास कार्यों की रफ्तार पकड़ सकी तेजी

ब्रजेश, भागलपुर

नगर निगम की कार्यशैली कुछ तो गड़बड़ है. वह न तो कभी शहर की सफाई में अव्वल आ सका है और न ही उनके विकास कार्यों की रफ्तार तेजी पकड़ सकी है. यही नहीं, वित्तीय मामलों में भी निगम प्रशासन फेल रहा है. आय स्रोत के लिए जितना तय किया, उतनी की वसूली भी नहीं की जा सकी है. जिन चीजों की वसूली में खुद कमजोर पड़ने लगे, तो एजेंसी बहाल कर ली है. बावजूद, अपेक्षा से बहुत कम कलेक्शन हो सका है. अगर होल्डिंग टैक्स की बात करें, तो निगम प्रशासन ने एजेंसी बहाल की है. उन्हें ऑफिस के लिए नया भवन उपलब्ध कराया है. इस वजह से तहसीलदार के पास करने को कोई काम नहीं रहा गया है. वहीं, एजेंसी को भारी-भरकम कमीशन चुका रहा है. फिर भी वसूली के टारगेट को पूरा करने में फेल है. हर बैठक में आंतरिक आय स्रोत बढ़ाने की बात की जाती है, जो यह अब बेइमानी लगने लगी है. दरअसल, विभिन्न मदों से रेवेन्यू प्राप्त करने के लिए 56 करोड़ 75 लाख रुपये का टारगेट तय किया गया और वसूली सिर्फ होल्डिंग टैक्स से ही हो सकी है.

होल्डिंग टैक्स : टारगेट 50 करोड़ और वसूली सिर्फ 17 करोड़ की

होल्डिंग टैक्स की वसूली के लिए निगम प्रशासन ने 50 करोड़ का टारगेट फिक्स किया था और वसूली दिसंबर तक करीब 17 करोड़ रुपये ही हो सकी है. इसमें भी निगम प्रशासन को वसूली कराने के लिए पीछे लगना पड़ा था.एडवरटाइजमेंट: टारगेट 03 करोड़ और वसूली शून्य

शहर में होर्डिंग व बैनर यानी विज्ञापन से वसूली का टारगेट 03 करोड़ फिक्स किया गया था और दिसंबर तक वसूली एक पैसे की नहीं हो सकी है. जबकि, शहर की सड़कों पर जिधर नजर दौड़ायेंगे, वहीं होर्डिंग व बैनर नजर आते हैं. निगम होर्डिंग-बैनर टाउन फ्री भी नहीं कर सका है. अभियान के नाम पर सिर्फ खानापूर्ती की जाती रही है.

टावर टैक्स में कलेक्शन जीरो

टावर टैक्स से कलेक्शन का टारगेट 02 करोड़ रुपये का रखा गया था लेकिन दिसंबर तक वसूली शून्य रही. हालांकि, इस बार बजटीय बैठक में बताया गया कि कुछ पैसा आया है लेकिन इसकी पूरी जानकारी अनुपलब्ध रही.

आय स्रोत में कमी का विकास कार्यों पर पड़ रहा असर

निगम का आय स्रोत मुख्य रूप से टैक्स व किराया से है और यही कमजोर होकर रह गया है. आय स्रोत यानी, टैक्स की वसूली की कमी का सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है. आय स्रोत बढ़ाने वाली योजना भी लंबे समय से सिर्फ फाइलों में घूम रही है. इसमें मुख्यत: मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स, अंडरग्राउंड मार्केट का निर्माण शामिल है और इसके लिए निगम ठोस कार्यवाही नहीं कर रही है.इन वित्तीय मामलों में नहीं हो सकी वसूली

चुंगी :टारगेट : 75 लाख रुपये

वसूली : शून्यटॉल :

टारगेट: 50 लाख रुपयेवसूली : शून्यनया टारगेट फिक्सहोल्डिंग टैक्स : 50 करोड़ रुपये

विज्ञापन कर : 03 करोड़ रुपयेटावर टैक्स : 02 करोड़ रुपये

अन्य कर : 1.75 करोड़ रुपयेओपन प्लॉट : 11 लाख रुपये

शॉपिंग कॉम्प्लेक्स : 20 लाख रुपयेलीज किराया : 96 लाख रुपये

दाखिल-खारिज शुल्क : 01 लाख रुपयेट्रेड लाइसेंस शुल्क : 75 लाख रुपये

विवाह प्रमाण पत्र : 01 लाख रुपयेअतिक्रमण हटाने का शुल्क : 02 लाख रुपये

अवैध निर्माण के लिए जुर्माना : 50 लाख रुपयेकोट :

निगम का आय स्रोत मुख्य रूप से टैक्स व किराया है. यह कलेक्शन नहीं कर पा रहा है. एजेंसी पर पेनाल्टी लगाने को कहा गया है. इसके बाद भी सुधार नहीं हुआ, तो हटाने की प्रक्रिया अपनायी जायेगी. मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जायेगा. इससे आय का स्रोत बढ़ेगा.- डॉ बसुंधरा लाल, मेयर

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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