विक्रमशिला सेतु का 33 मीटर स्लैब गंगा में समाया, आधी रात को टूटा संपर्क, ट्रैफिक डायवर्ट

उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों को जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में समाने के बाद से सबसे बड़ी आफत आवाजाही को लेकर आयी है. दरअसल, घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने दोनों ओर से वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी.
भागलपुर से ललित किशोर मिश्रा की रिपोर्ट उत्तर और दक्षिण बिहार के कई जिलों को जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में समाने के बाद से सबसे बड़ी आफत आवाजाही को लेकर आयी है. दरअसल, घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने दोनों ओर से वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी. बड़ी गाड़ियों को वापस लौटाया जा रहा है और छोटे वाहनों को भी पुल से दूर रखा जा रहा है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि कुछ दिनों तक इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित रहेगा. सोमवार से ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं और वाहनों को सुल्तानगंज होते हुए मुंगेर की ओर डायवर्ट किया गया है. लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा तय वैकल्पिक मार्ग का ही उपयोग करें. विक्रमशिला सेतु का पाया संख्या चार और पांच के बीच का स्लैब गिरने की घटना रात करीब 12.55 बजे की है, हालांकि इससे पहले रात लगभग 11 बजे ही एक्सपेंशन ज्वाइंट में गैप बनने की सूचना एक वाहन चालक ने प्रशासन को फोन पर दे दी थी. शुरुआत में यह गैप धीरे-धीरे बढ़ता रहा और रात गहराते ही स्थिति गंभीर हो गई और फिर हिस्सा गंगा में समा गया, जिससे दोनों ओर का संपर्क पूरी तरह से टूट गया. राहत की बात यह रही कि घटना के समय कोई वाहन उस हिस्से से नहीं गुजर रहा था, जिसके कारण किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. वहीं घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया. रात करीब दो बजे डीएम और एसएसपी सहित अन्य वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. बस सेवाएं ठप, कई जिलों से संपर्क प्रभावित पुल का संपर्क टूटते ही भागलपुर से नवगछिया, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कोलकाता और खगड़िया जाने वाली सभी बसों का परिचालन सुबह से बंद हो गया. वहीं पूर्णिया से रांची, जमशेदपुर और धनबाद जाने वाली बस सेवाएं भी प्रभावित रहीं. इस वजह से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. कई लोग सुबह बस स्टैंड पहुंचे, लेकिन उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा. सब्जी आपूर्ति और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर गंगा पार से भागलपुर आने वाली सब्जियां, केला और अन्य कृषि उत्पाद शहर तक नहीं पहुंच सके. इससे बाजार में आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है. वहीं गंगा पार से भागलपुर पढ़ने आने वाले स्कूली छात्र-छात्राएं भी स्कूल नहीं जा सके. इसके अलावा नवगछिया और आसपास के जिलों में नौकरी करने वाले लोगों को भी भारी परेशानी हुई और कई लोग अपने कार्यस्थल तक नहीं पहुंच सके. सुबह से पुल बना आकर्षण का केंद्र घटना के बाद सोमवार सुबह से ही विक्रमशिला सेतु के आसपास लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी. पुल के नीचे और पहुंच पथ पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर स्थिति को देखने लगे. कई लोग मोबाइल से फोटो और सेल्फी लेते नजर आए. पूरे भागलपुर शहर में इस घटना की चर्चा छाई रही. लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठता रहा कि आखिर पुल के साथ ऐसा क्या हुआ और इसे दोबारा चालू होने में कितना समय लगेगा. मरम्मत में लग सकते हैं 15 दिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत में कम से कम 15 दिन का समय लग सकता है. हालांकि अंतिम निर्णय तकनीकी जांच रिपोर्ट के बाद ही लिया जाएगा. फिलहाल प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और हालात पर नजर बनाए हुए है. तकनीकी जांच शुरू पुल निर्माण निगम के पदाधिकारी भी तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और तकनीकी जांच शुरू कर दी. जिस हिस्से में पुल क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां एसडीओ, ट्रैफिक डीएसपी और पुलिस बल की भारी तैनाती कर दी गई है. पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति खतरे वाले हिस्से के करीब न जा सके.
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