विक्रमशिला सेतु के टूटे हिस्से का 100 करोड़ से होगा दोबारा निर्माण, स्वीकृति के लिए विभाग को भेजी फाइल
Published by : SANJEEV KUMAR JHA Updated At : 09 Jun 2026 8:54 AM
भागलपुर और नवगछिया के बीच जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया गया है.
भागलपुर से ब्रजेश की रिपोर्ट :
भागलपुर और नवगछिया के बीच जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया गया है. सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्सों को पूरी तरह तोड़कर अब नये सिरे से बनाया जायेगा. बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से इसके पुनर्निर्माण की विस्तृत योजना तैयार कर ली है. विभागीय मंजूरी मिलते ही एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी.बाढ़ का पानी उतरते ही शुरू होगा निर्माण कार्य
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त स्पेन और स्लैब वाले चिह्नित हिस्सों को हटाकर दोबारा बनाने की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है. इस महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के खगड़िया डिवीजन को सौंपी गयी है. अधिकारियों ने तकनीकी स्वीकृति के लिए विभाग को प्राक्कलन (एस्टिमेट) भेज दिया है. विभाग का कहना है कि एजेंसी बहाल होने तक माॅनसून का समय होगा, इसलिए बाढ़ का पानी उतरते ही निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जायेगा.विभागीय स्तर पर जांच जारी
पुल निर्माण निगम के प्रस्ताव पर विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है. तकनीकी विशेषज्ञों की टीम वर्तमान में निर्माण योजना और प्राक्कलन की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि इसमें किसी भी प्रकार की कमी न रहे. विभागीय स्वीकृति मिलते ही अगले एक से डेढ़ महीने के भीतर निविदा (टेंडर) जारी कर दी जायेगी, जिससे समय पर निर्माण एजेंसी का चयन हो सके.
तीन महीने में पूरा होगा काम, आवागमन पर लग सकता है विराम
विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण के लिए निगम ने तीन महीने का लक्ष्य निर्धारित किया है. अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के दौरान निर्माण कार्य के लिए सेतु पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद रखा जा सकता है. इस अवधि में पुल की संरचनात्मक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया जायेगा, ताकि भविष्य में यातायात अधिक सुरक्षित और सुचारु हो सके.क्या है पृष्ठभूमि?
गौरतलब है कि तीन मई की रात विक्रमशिला सेतु का एक स्लैब अचानक टूटकर गंगा नदी में गिर गया था. सुरक्षा कारणों से पुल पर वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया था, जिससे भागलपुर और नवगछिया के बीच संपर्क टूट गया था. इसके बाद बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) की टीम ने महज 20 दिनों में बेली ब्रिज का निर्माण कर सात जून को इसे जिला प्रशासन को सौंप दिया. फिलहाल पुल पर हल्के वाहनों का परिचालन शुरू है, लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही पर अभी भी रोक बरकरार है.
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