बिना वाइल्ड लाइफ क्लियरेंस के बन रहे सुलतानगंज रिवर फ्रंट का काम रोका

Updated at : 08 Feb 2025 10:03 PM (IST)
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बिना वाइल्ड लाइफ क्लियरेंस के बन रहे सुलतानगंज रिवर फ्रंट का काम रोका

- निर्माण एजेंसी ने एनओसी के लिए केंद्रीय वन मंत्रालय को आवेदन कर दिया है, लेकिन अनुमति मिलना शेष

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केंद्रीय पर्यावरण, वन्य एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से संबद्ध नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ से बिना अनुमति सुलतानगंज में तैयार हो रहे रिवर फ्रंट के काम को रोक दिया गया है. यह कार्रवाई वन प्रमंडल कार्यालय भागलपुर की ओर से की गयी. जानकारी के अनुसार निर्माण एजेंसी ने एनओसी के लिए मंत्रालय को ऑनलाइन आवेदन करने के बाद काम शुरू किया था. हालांकि, वाइल्ड लाइफ क्लियरेंस अबतक नहीं मिला है.

रिवर फ्रंट का काम काफी तेजी से चल रहा था. अजगैबीनाथ मंदिर के सामने सीढ़ी घाट से कृष्णगढ़ के निकट राधाकृष्ण घाट तक मिट्टी डालकर सीढ़ी निर्माण हो रहा था. बिहार कैबिनेट से स्वीकृति के बाद 164.57 करोड़ रुपये की लागत से उत्तरवाहिनी नदी के लिए चैनल व सीढ़ी घाट का निर्माण होना है. करीब एक किलोमीटर के दायरे में यह कार्य 11 दिसंबर को शुरू हुआ था, जो 18 माह में पूरा होना था. काम पूरा होने के बाद श्रावणी मेला में आने वाले एक श्रद्धालुओं को जल भरने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो जाता. काम बंद होने से स्थानीय लोगों में मायूसी है. लोगों का कहना है कि बिहार सरकार हस्तक्षेप कर केंद्रीय मंत्रालय से जल्द अनुमति दिलाये.

क्यों बंद हुआ रिवर फ्रंट का काम

सुलतानगंज से कहलगांव तक गंगानदी क्षेत्र को विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण घोषित किया गया है. विलुप्तप्राय जीव डॉल्फिल के लिए यह सुरक्षित क्षेत्र है. इस क्षेत्र में किसी प्रकार का निर्माण व अन्य गतिविधि नहीं की जा सकती है. यह निर्माण तभी संभव है, जब केंद्रीय वन मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिल जाये. जिन शर्तों के साथ मंजूरी मिलेगी, उसी शर्त के साथ काम किया जायेगा.

बता दें कि भागलपुर में स्मार्ट सिटी कंपनी ने बरारी घाट व बूढ़ानाथ मंदिर घाट में रिवर फ्रंट का काम शुरू किया था. वहीं बुडको की निगरानी में टीएमबीयू से सटे क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम चल रहा है. तीनों प्रोजेक्ट को बिना मंजूरी काम शुरू कर दिया गया था. इसपर वन विभाग ने रोक लगाया था. हालांकि, तीनों प्रोजेक्ट को अनुमति मिलने के बाद काम शुरू हुआ था.

भागलपुर की डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर श्वेता कुमारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वन्यजीव के लिए सुरक्षित क्षेत्र में किसी तरह निर्माण के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ से अनुमति लेना जरूरी है. अनुमति मिलने के बाद रिवर फ्रंट का काम शुरू हो जायेगा.

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