Bhagalpur news गिद्धों को बचाने के लिए छात्र-छात्राओं को किया जागरूक

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Bhagalpur news गिद्धों को बचाने के लिए छात्र-छात्राओं को किया जागरूक

विश्व गिद्ध जागरूकता दिवस पर प्रखंड के मवि सिमरा में कक्षा छह, सात, आठ के छात्र-छात्राओं में जागरूकता अभियान व क्विज प्रतियोगिता हुई.

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विश्व गिद्ध जागरूकता दिवस पर प्रखंड के मवि सिमरा में कक्षा छह, सात, आठ के छात्र-छात्राओं में जागरूकता अभियान व क्विज प्रतियोगिता हुई. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट, गिद्धों के महत्व, संरक्षण की आवश्यकता और पर्यावरणीय संतुलन में उनकी भूमिका के प्रति जागरूकता फैलाना था. कार्यक्रम भागलपुर वन विभाग, मुंबई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की ओर से किया गया. कार्यक्रम का समन्वय गंगा प्रहरी ने किया. कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. ऐसे कार्यक्रम बच्चों को प्रकृति से जुड़ने व समझने और जैव विविधता की रक्षा के लिए प्रेरित करते हैं तथा उनके ज्ञान में वृद्धि होती है. कार्यक्रम में बताया गया कि 1990–95 के दौर में डाइक्लोफेनेक का इस्तेमाल धड़ल्ले हुआ करता था. इसका दुष्परिणाम इनकी आबादी 99 फीसदी सिमट गयी, जो अपूर्णीय क्षति है. 2006 में इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी गयी, लेकिन इसका इस्तेमाल रुका नहीं. अब अन्य माध्यमों से सीधे मवेशियों व हमारे शरीर तक यह पहुंच ही रहा है. डाइक्लोफेनेक गैर-स्टेरॉयडीय सूजन रोधी दवा है, जिसका उपयोग मनुष्यों और पशुओं में दर्द और सूजन को कम व पशुओं का दूध निकालने में किया जाता रहा है. इसका गिद्धों, शिकारी पक्षियों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है. जब गिद्ध ऐसे मृत पशुओं का मांस खाते थे, जिन्हें डाइक्लोफेनेक दिया गया होता है, तो यह दवा पक्षियों के गुर्दों को क्षतिग्रस्त कर देती है.

मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना की टंकी बेकार, पानी के लिए हाहाकार

सिलहन खजुरिया पंचायत बेलडीहा गांव वार्ड 12 में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना से लगी पानी टंकी पिछले तीन माह से बेकार पड़ी है. 50 घरों तक पानी सप्लाई तीन माह से बंद है. वार्ड 12 महादलित टोला की दर्जनों महिलाओं कहा कि जिस स्थान पर सरकारी बोरिंग है, वहां के घर मालिक ने उसी सरकारी बोरिंग में अपना हाफ एचपी का निजी समरसेबल डाल रखा है. सरकारी समरसेबल लंबे समय से बंद है. टंकी तक पानी पहुंचाने वाला पाइप कटा है, जिससे पूरे वार्ड की जनता पानी के लिए तरस रही हैं. महिलाओं को पानी के लिए दूर-दराज भटकना पड़ रहा है. गांव के संपन्न और धनी लोगों के यहां लगे निजी बोरिंग से किसी तरह पानी लाकर अपना काम चला रहे हैं. शिकायत पीएचईडी विभाग के जेई से ग्रामीणों ने कई बार की है. जब इस मामले में वार्ड सदस्य श्रीधारी पासवान से बात की, तो उन्होंने कहा कि इस मामले में मैंने पीएचईडी विभाग के जेई को कई बार फोन किया. वह ध्यान नहीं देते हैं. फोन करने पर पीएचईडी विभाग के जेई ने फोन रिसीव नहीं किया.

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