कहलगांव उत्तर वाहिनी गंगा तट स्थित जागेश्वर नाथ महादेव मंदिर परिसर में नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के सातवें दिन कथा वाचिका जया मिश्रा ने माता पार्वती की कथा का वर्णन किया. माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपने शरीर पर उबटन का लेप किया और उसी उबटन से एक पुतला बना कर अपनी शक्ति उस पुतले में डाल कर उसे एक बालक का रूप दे दिया. उस बालक को द्वार पर खड़े होने की आज्ञा दिया कि कोई भी अंदर प्रवेश न करे. बालक ने अपनी माता की अलौकिक शक्ति पाकर द्वार पर डट कर खड़ा हो गया. उसी समय भगवान शंकर स्वयं आ गये, परंतु बालक ने अपनी माता के आदेशानुसार अंदर प्रवेश पर प्रतिबंध लगाकर शिव को रोक दिया. शंकर ने परेशान होकर अन्य देवताओं को बालक को समझाने को कहा, परंतु बालक मानने को तैयार नहीं हुआ. अंत में भयंकर युद्ध होने लगा, फिर भी बालक नहीं माना. तत्पश्चात देवता भगवान शिव के पास भागे-भागे गये. शंकर भी देवताओं की बात सुनकर क्रोधित होकर बालक के साथ युद्ध करने लगे. बार-बार बालक के प्रहार से शंकर परेशान होकर बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया. जैसे ही माता पार्वती को जानकारी मिली, वह विकराल रूप ले डालीं. देवता घबरा कर निवेदन करने लगे. मां ने पुत्र को जीवित करने को कहा. शिव के आदेशानुसार देवताओं को उत्तर दिशा भेजा गया. उत्तर दिशा में हाथी का बच्चा का सिर मिला, जिसे बालक के धड़ से जोड़ कर जीवित किया गया और प्रथम पूज्य गणेश की उपाधि दी गयी. कार्तिकेय और गणेश बड़े हुए तो शादी करने की बात हुई, परंतु दोनों भाई आपस में लड़ने लगे कि मैं पहले, मेरी शादी होनी चाहिए. यह देख कर बाबा भोलेनाथ ने दोनों को कहा कि पूरी पृथ्वी की परिक्रमा कर आयेगा, उसकी शादी पहले होगी. सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मयूर को लेकर उड़ गये. गणेश ने सोचा कि माता-पिता से बड़ा कोई नहीं, उसने दोनों को बैठा कर परिक्रमा कर ली. गणेश की बुद्धि की सराहना करते हुए सिद्धि-बुद्धि से पाणिग्रहण करा दिया, जिससे शुभ-लाभ जैसे पुत्र की प्राप्ति हुई. मौके पर मंच संचालक केशव कुमार मिश्र, मुख्य यजमान पप्पू कुमार यादव सह धर्मपत्नी बबीता देवी, दिलीप गुप्ता, राजेश राम किशोर भारती, शंकर यादव, सिकंदर ठाकुर, सुनील गुप्ता, संतोष कसेरा, राहुल जी सहित अन्य भक्तजन उपस्थित थे.
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