bhagalpur news. नाविकों को देने के लिए दोपहर दो बजे जिला प्रशासन ने मांगी राशि, शाम छह बजे राज्य सरकार ने भेज दिये दो करोड़ रुपये

Published by : NISHI RANJAN THAKUR Updated At : 03 Jun 2026 11:37 PM

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 31 मई को भागलपुर आगमन के दौरान यह घोषणा की थी कि यात्रियों को गंगा पार करने के लिए नाव पर किराया नहीं देना है.

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 31 मई को भागलपुर आगमन के दौरान यह घोषणा की थी कि यात्रियों को गंगा पार करने के लिए नाव पर किराया नहीं देना है. राज्य सरकार सीधे नाविकों के खाते में राशि ट्रांसफर करेगी. इसके अगले दिन ही जिला प्रशासन ने नाविकों के साथ बैठक कर पूरी योजना तैयार की और नाविकों के खाते में किराया ट्रांसफर करने की प्रक्रिया भी शुरू की. बुधवार को दोपहर दो बजे जिला आपदा प्रबंधन शाखा ने राज्य सरकार से नाव किराया मद में दो करोड़ की मांग की और शाम छह बजे पथ निर्माण विभाग, भागलपुर के खाते में सरकार ने राशि ट्रांसफर कर दी. इस बाबत आपदा प्रबंधन शाखा के अपर समाहर्ता कुंदन कुमार ने बताया कि महज चार घंटे में राशि ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने की बात से इतना तो समझा ही जा सकता है कि शासन और प्रशासन, पब्लिक के लिए कितना गंभीर है. उन्होंने बताया कि सरकार से दो करोड़ रुपये मिलने से पहले आपदा प्रबंधन की उपलब्ध राशि नवगछिया व सदर एसडीओ को ट्रांसफर कर दी गयी थी. इसमें नवगछिया एसडीओ को 15 लाख और सदर एसडीओ को 25 लाख रुपये दिये गये हैं. नाविकों के खाते में राशि ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही है. संभव है कि गुरुवार से संबंधित गंगा घाटों पर एसडीओ द्वारा नाविकों के खाते में राशि ट्रांसफर की जाये. एडीएम ने बताया कि एक मई को ही नाविकों के साथ बैठक के दौरान यह कहा गया था कि राशि तीन-से चार दिनों में मिल जायेगी. इस बात पर प्रशासन खरा उतरेगा. नाविकों को डीजल देने की कोई बात नहीं हुई थी. नाविकों को किराया मिलेगा, जिससे उन्हें खर्च करना है. एडीएम ने बताया कि कुछ नाविकों द्वारा यात्रियों से किराया वसूलने की शिकायत मिल रही है. इस मामले में एक्शन लिया जायेगा. एफआइआर तक की कार्रवाई हो सकती है.

विक्रमशिला सेतु पर आखिरी बेली ब्रिज का रखा गया ढांचा

विक्रमशिला सेतु पर बने रहे चाैथे व अंतिम बेली ब्रिज की लांचिंग बुधवार की रात को हो गयी. गुरुवार को इस पर रैंप बिछाने सहित इसके अन्य काम पूरा किया जायेगा. कार्य बीआरओ के अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद्र की देखरेख में चल रहा है. बीआरओ की टीम पूरे बेली ब्रिज को फाइनल टच देगी. सात जून को इसे चालू किया जायेगा.

चार मई को भागलपुर पहुंचे थे बीआरओ के अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद्रतीन मई की देर रात सेतु के 34 मीटर स्लैब के गंगा नदी में गिरने के बाद बीआरओ की टीम को सूचना दी गयी. इसके बाद चार मई को वे गुवाहाटी से पटना और भागलपुर पहुंचे. उनके साथ दिल्ली के दो अधिकारी भी भागलपुर पहुंचे और निरीक्षण करना शुरू कर दिया. बीआरओ की टीम ने एक प्रपोजल बनाकर बिहार सरकार को दिया और बिहार सरकार की अनुमति के बाद इस पर काम शुरू हाे गया.

15 मई को बेली ब्रिज निर्माण का काम शुरू हुआबीआरओ की टीम ने 15 मई से बेली ब्रिज का काम बीआरओ के अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद्र के नेतृत्व में शुरू किया. ब्रिज के निर्माण के लिए 12 मई को पूरी टीम पहुंच चुकी थी. बेली ब्रिज के लिए चार सौ टन सामान आया था.

तीन मई की देर रात गिरा स्लैब, तीन जून को अंतिम बेली ब्रिज की हुई लॉन्चिंग

तीन मई की देर रात विक्रमशिला सेतु का 34 मीटर का स्लैब गंगा में गिरा था. संयोग यह है कि तीन जून को ही इस पर अंतिम व चौथे बेली ब्रिज की लॉन्चिंग हो गयी. सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद एक महीने के अंदर इसे चालू करने की दिशा में कार्य लगभग पूरा हो गया है. जबकि सात जून तक इस पर आवागमन चालू कराना संभावित है.

गंगा का जलस्तर बढ़ा, तो पुल के नीचे पहुंची जलकुंभी

बुधवार को गंगा का जलस्तर बढ़ने पर नाव यात्री हैरत में दिखे. नाविकों की मानें तो अभी एक बित्ता अर्थात आठ से नौ इंच तक पानी बढ़ गया. इतना ही नहीं पानी बढ़ने पर धार के साथ बड़ी मात्रा में जलकुंभी भी पुल के नीचे जमा हो गयी. इससे नाविकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पुल के नीचे जलकुंभी ही जलकुंभी नजर आ रहा है. यह पानी की धार के साथ बहती जा रही है, तो कहीं स्थिर होकर फंसी हुई भी है.

तेल मिलने का इंतजार करते रहे सरकारी नाविक, लोगों को नहीं मिला नि:शुल्क यात्रा का लाभ

विक्रमशिला पुल व नाव सेवा का निरीक्षण करने के दौरान रविवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से नि:शुल्क नाव सेवा करने की घोषणा की गयी थी. इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से नि:शुल्क नाव चलाया भी गया. बुधवार को सरकारी रजिस्टर्ड नाव चालकों ने तेल नहीं मिलने पर नाव नहीं चलाया. लोगों को नि:शुल्क यात्रा का लाभ नहीं मिला. गंगा में सरकारी नाव खड़ी रही और यात्री नि:शुल्क नाव ढूंढ़ते रहे. थक-हार कर प्राइवेट नाव पर शुल्क चुका कर सवार होकर नवगछिया की ओर जाने के लिए विवश हुए.

अठगामा जाने के लिए सरयुग मंडल ने नि:शुल्क नाव को खोजा. जब नाव खड़ी रही, तो कुछ देर सरयुग मंडल भी नाव के पास खड़े रहे. स्थानीय लोगों ने बताया कि यह नाव नहीं चलेगी. किराया वाले नाव पर चले जाइये या फ्री स्टीमर आयेगा, तब जाइयेगा. वहीं रामसुरेश शर्मा ने बताया कि उन्हें खरीक जाना था, लेकिन सरकारी नाव नहीं जा रही है. अब तेज धूप में प्राइवेट नाव पर किराया चुकाकर जाना पड़ रहा है.

मोतियाबिंद मरीजों को भी नहीं मिला नि:शुल्क नाव की सेवा

मायागंज अस्पताल से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराकर 20 मरीजों को भी निजी नाव पर सवार होकर अपना घर लौटना पड़ा. आजमनगर बैरिया पंचायत के मो कोहीतूर ने बताया कि उनके आंख में मोतियाबिंद की शिकायत थी, तब मायागंज अस्पताल में ऑपरेशन कराया. जब अस्पताल से छुट्टी मिली, तो उन्हें भी नि:शुल्क नाव नहीं मिल सका. वहीं सिकिया धौबय की रूबैदा खातून के आंख का ऑपरेशन हुआ था. लगभग 20 की संख्या में मोतियाबिंद मरीज एक साथ नाव पर सवार हुए. सभी के आंख का ऑपरेशन भी मायागंज अस्पताल में हुआ. इन्हें भी नि:शुल्क नाव की सुविधा नहीं मिली.

पंडाल में तेल मिलने का इंतजार करते रहे सरकारी नाविक

जिला प्रशासन की ओर से बरारी पुल घाट पर बनाये गये पंडाल में सरकारी रजिस्टर्ड नाव के नाविक तेल मिलने का इंतजार करते रहे, ताकि नाव चलायी जा सके. नाविक रंजीत मंडल ने कहा कि दो दिन पहले पर्ची देकर तेल व किराया देेने का आश्वासन देकर नाव चलाने का आदेश दिया गया. जब तक अपना तेल रहा, तब तक चलाये. अब तो अपना तेल भी नहीं है. दूसरे नाविक लूटन महतो ने कहा कि तीन ईंजन है, कैसे फ्री में नाव को चलायेंगे. किराया देना तो दूर, तेल भी नहीं मिल रहा है. ब्रजेश उर्फ बैजू राय ने बताया कि कंट्रोल रूम में भी तेल देने की मांग की, लेकिन नहीं मिला. वहां कार्यरत अधिकारियों ने हाथ खड़ कर दिये. लगभग 20 नाव के नाविक दिनभर गंगा में नाव खड़ी करके पंडाल में तेल मिलने का इंतजार करते रहे. वहीं कंट्रोल रूम में कार्यरत पदाधिकारियों ने कहा कि उन्हें ऊपर पैसा या तेल देने का आदेश नहीं मिला है. केवल पर्ची देने का आदेश था. पहले तो आग्रह करके नाव चलवाये, अब तेल खत्म होने पर नाविकों ने नाव चलाने से इनकार कर दिया.

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