सुल्तानगंज में कांवरियों के लिए हाइटेक तैयारी, डमरू-त्रिशूल वाली लाइट से जगमगाएगा कांवरिया पथ

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सांकेतिक तस्वीर

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Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 शुरू होने में कुछ ही दिन शेष हैं और सुल्तानगंज में तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं. प्रशासन इस बार कांवरियों को हाइटेक सुविधाएं देने की तैयारी कर रहा है. डमरू-त्रिशूल वाली डिजिटल लाइटों से कांवरिया पथ को सजाया जाएगा और 24 घंटे सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.

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सुलतानगंज(भागलपुर) से रिपोर्ट

Shravani Mela 2026: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 शुरू होने में अब केवल 16 दिन शेष हैं. ऐसे में सुल्तानगंज में तैयारियां युद्धस्तर पर पहुंच गई हैं. इस बार प्रशासन सिर्फ बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि कांवरियों को आधुनिक और बेहतर अनुभव देने की तैयारी कर रहा है. मेला क्षेत्र में हाइटेक सुविधाएं, आधुनिक शौचालय, 24 घंटे सफाई व्यवस्था, गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण और कांवरिया पथ पर डमरू-त्रिशूल वाली डिजिटल लाइटें इस बार मेले की नई पहचान बनने जा रही हैं. हालांकि तैयारियों के बीच नमामि गंगे घाट की क्षतिग्रस्त सीढ़ियां प्रशासन के सामने नई चुनौती भी बन गई हैं. पीएचईडी अधिकारियों ने तैयारियों का लिया जायजा

श्रावणी मेला की तैयारियों की समीक्षा के लिए सोमवार को पीएचईडी की सहायक अभियंता एवं एसडीओ रूही कुमारी ने मेला क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया. उन्होंने नमामि गंगे घाट, अजगैबीनाथ गंगा घाट, प्रखंड मुख्यालय परिसर, कृष्णगढ़, कांवरिया धर्मशाला, एके गोपालन कॉलेज परिसर समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों का दौरा किया.

निरीक्षण के दौरान शौचालय निर्माण, बोरिंग, चापाकल और पेयजल व्यवस्था की प्रगति देखी गई. निर्माण एजेंसी को 15 जुलाई तक सभी कार्य हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि मेला शुरू होने से पहले सभी सुविधाएं श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध हो जाएं.

आधुनिक शौचालय और 24 घंटे सफाई की व्यवस्था

पीएचईडी के अनुसार इस बार मेला क्षेत्र में स्थायी शौचालयों को नए स्वरूप में तैयार किया जा रहा है. इनमें टाइल्स लगाने, रंग-रोगन और साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था की जा रही है.

हर शौचालय में पूरे मेले के दौरान 24 घंटे सफाई सुनिश्चित करने के लिए सफाईकर्मियों की तैनाती होगी. प्रशासन का दावा है कि इस बार स्वच्छता व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और प्रभावी रहेगी.

डमरू और त्रिशूल वाली डिजिटल लाइट से सजेगा कांवरिया पथ

श्रावणी मेला को आकर्षक बनाने के लिए कांवरिया पथ पर विशेष सजावट की जा रही है. जिला प्रशासन के निर्देश पर बिजली के पोलों पर भगवान भोलेनाथ के डमरू, त्रिशूल और अन्य धार्मिक प्रतीकों वाली डिजिटल एलईडी लाइटें लगाई जा रही हैं.

इसके अलावा नमामि गंगे घाट और अजगैबीनाथ गंगा घाट पर जीओ बैग लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है. पीसीसी सड़क निर्माण, नाला निर्माण, रंग-रोगन और बैरिकेडिंग का काम भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है.

Shravani Mela 2026: नमामि गंगे घाट की टूटी सीढ़ियां बनी चिंता

तैयारियों के बीच एक गंभीर समस्या भी सामने आई है. नमामि गंगे घाट पर गाद और मिट्टी हटाने के दौरान जेसीबी मशीन से कई जगह सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं.

अब तक इन सीढ़ियों की मरम्मत नहीं हो सकी है. यदि मेला शुरू होने से पहले मरम्मत नहीं हुई तो बड़ी संख्या में आने वाले कांवरियों के पैर कटने या चोटिल होने का खतरा बना रहेगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस काम को प्राथमिकता देनी चाहिए.

प्रशासन की परीक्षा, श्रद्धालुओं की उम्मीद

श्रावणी मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होता है. ऐसे में इस बार प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर सभी तैयारियां पूरी करने की है. एक ओर आधुनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नमामि गंगे घाट की टूटी सीढ़ियां यह संकेत देती हैं कि अभी कुछ जरूरी काम बाकी हैं.

यदि तय समय सीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी हो जाती हैं तो इस बार सुल्तानगंज आने वाले कांवरियों को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण मिल सकता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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