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bhagalpur news. सेवा की प्रतिमूर्ति थे संतसेवी महाराज

Updated at : 04 Jun 2025 9:16 PM (IST)
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bhagalpur news. सेवा की प्रतिमूर्ति थे संतसेवी महाराज

तीन मार्च 1939 से नौ जून 1986 तक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के साथ छाया की तरह अपनी सेवा में संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया और संतसेवी के नाम को सार्थक कर दिखाया.

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सद्गुरु महर्षि मेंहीं के प्रमुख शिष्यों में एक महर्षि संतसेवी महाराज के परिनिर्वाण दिवस पर कुप्पाघाट आश्रम में स्तुति विनती, पुष्पांजलि, भंडारा व सत्संग का हुआ आयोजन

तीन मार्च 1939 से नौ जून 1986 तक सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के साथ छाया की तरह अपनी सेवा में संपूर्ण जीवन अर्पित कर दिया और संतसेवी के नाम को सार्थक कर दिखाया. उक्त बातें गुरुसेवी भगीरथदास महाराज ने बुधवार को कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम में महर्षि संतसेवी महाराज के परिनिर्वाण दिवस पर आयोजित सत्संग में कही. वर्तमान आचार्यश्री से भी सत्संगियों व श्रद्धालुओं ने उनके आवास में जाकर आशीर्वाद लिया. चरणसेवी प्रमोद दासजी महाराज, विद्यानंदजी महाराज, विवेकानंदजी महाराज, निर्मलानंदजी महाराज, सत्यप्रकाशजी महाराज, नंदन बाबा, पंकज बाबा, कृष्णवल्लभ बाबा, ज्ञानी बाबा, रविन्द्र बाबा, संजय बाबा, अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के के मंत्री मनु भास्कर समेत अन्य पदाधिकारी ने पुष्पांजलि अर्पित की.

गुरु चरणसेवी प्रमोद बाबा ने कहा कि गुरु की सेवा में तन की अपेक्षा मन की अधिक कीमत होती है. जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाय, अपने उद्देश्य में शिथिलता नहीं आने देना चाहिए. प्रात:कालीन सत्संग के बाद आठ बजे आचार्य श्री समेत आश्रम के सभी संतों व श्रद्धालुओं ने सद्गुरु महर्षि मेंहीं व महर्षि संतसेवी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की. 11 बजे भंडारा हुआ. भंडारा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद पाया. तीन बजे स्तुति गान के साथ ही सत्संग का शुभारंभ हुआ.स्वामी निर्मलानंदजी महाराज ने कहा कि महर्षि संतसेवी महाराज लगातार 46 वर्ष तक अपने गुरु की सेवा करते रहे. गुरु महाराज ने सेवा से प्रसन्न होकर इनका नाम महावीर से संतसेवी नाम रख दिया. स्वामी सत्यप्रकाश बाबा ने कहा कि सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस महाराज के प्रवचनों को जन-जन तक पहुंचाने का पूर्ण श्रेय महर्षि संतसेवी परमहंस महाराज को जाता है. स्वामी विद्यानंदजी महाराज और नंदन बाबा ने कहा कि महर्षि संतसेवी परमहंसजी महाराज को ज्ञान की भूमि और चलता फिरता पुस्तकालय कहा जाता था. स्वामी रविन्द्र बाबा और पंकज बाबा ने कहा कि गुरु महाराज महर्षि संतसेवी परमहंसजी महाराज को मस्तिष्क कहते थे. कोलकाता से परमानंद अग्रवाल, रमेश कटारुका, श्याम जालान, नागपुर से धर्मपालजी, छत्तीसगढ़ रायपुर से रीता कमलिया तथा पटना से अरुण प्रसाद ने महर्षि संतसेवी के समाधि स्थल पर माथा टेका. आयोजन में अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के महामंत्री दिव्य प्रकाश, उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव, मंत्री मनु भास्कर, व्यवस्थापक अजय कुमार जायसवाल, पंकज बाबा, कृष्णवल्लभ बाबा, ज्ञानी बाबा, रमेश बाबा, विवेकानंद बाबा, सिद्धार्थ कुमार, अमित कुमार, सूरज कुमार, अरविंद कुमार, श्याम कुमार का योगदान रहा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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NISHI RANJAN THAKUR

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