bhagalpur news. डेढ़ साल की बजाय अब छह माह ही दवा लेंगे एमडीआर टीबी के मरीज

Updated at : 04 May 2025 12:56 AM (IST)
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bhagalpur news. डेढ़ साल की बजाय अब छह माह ही दवा लेंगे एमडीआर टीबी के मरीज

जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल भागलपुर के टीबी एंड चेस्ट विभाग में इलाजरत एमडीआर टीबी मरीजों के लिए नयी दवा का वितरण अभियान की शुरुआत की गयी

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भागलपुर

जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल भागलपुर के टीबी एंड चेस्ट विभाग में इलाजरत एमडीआर टीबी मरीजों के लिए नयी दवा का वितरण अभियान की शुरुआत की गयी. एक एमडीआर पॉजिटिव मरीज को नयी दवा का सेवन कराया गया. अब डेढ़ साल की बजाय छह माह नयी दवा का सेवन करना होगा. बीपीएएलएम रेजिमेन पद्धति की प्रीटोमैनिड दवा के वितरण का शुभारंभ अस्पताल अधीक्षक डॉ हेमशंकर शर्मा, मेडिसिन विभाग के हेड डॉ अविलेश कुमार, टीबी एंड चेस्ट विभाग के हेड डॉ बीके शर्मा, डॉ राजकमल, सिविल सर्जन डॉ अशोक प्रसाद, डॉ दीनानाथ, डॉ डीपी सिंह, डॉ अमरेश कुमार, डाॅ रवि आनंद, नोडल पदाधिकारी डॉ अजय कुमार सिंह ने किया. अस्पताल अधीक्षक ने कहा कि इस संस्थान के लिए गर्व की बात है कि बिहार में पटना के बाद भागलपुर को नई दवा के लिए सरकार के द्वारा चयनित किया गया. अधीक्षक ने बताया कि डाॅ डीपी सिंह के द्वारा टीबी मरीजों के लिए बनाया गया भागलपुर मॉडल को पूरे देश में अपनाया गया. डॉ अविलेश कुमार ने एमडीआर जांच की विधि व डॉ मेजर अवकाश सिन्हा ने बीमारी से बचाव की जानकारी दी. नई दवा वितरण के लिए एमडीआर वार्ड के सांख्यिकी सहायक प्रदीप कुमार सिन्हा को मुख्यालय स्तर से प्रशिक्षण दिया जा चुका है. मौके पर वरीय प्रयोगशाला प्रावैधिकी इंद्रजीत कुमार व डीटीसी जितेन्द्र कुमार थे. डीटीसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा.

चार दवाओं को मिलाकर बनी है नयी दवा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में दवा प्रतिरोधी यानी एमडीआर टीबी के लिए नई उपचार पद्धति शुरू करने को मंजूरी दी. बीपीएएलएम पद्धति में चार दवाओं का संयोजन है. इनमें बेडाक्विलाइन, प्रीटोमैनिड, लाइनजोलिड और मोक्सीफ्लोक्सासिन हैं, जो पिछली एमडीआर टीबी उपचार प्रक्रिया की तुलना में सुरक्षित, अधिक प्रभावी और तीव्र उपचार करती है. तीनों के संयोजन में प्रीटोमैनिड नामक एक नई एंटी टीबी दवा शामिल है. पारंपरिक एमडीआर टीबी उपचार गंभीर दुष्प्रभावों के साथ 20 महीने तक चल सकते हैं, जबकि बीपीएएलएम उपचार पद्धति दवा प्रतिरोधी टीबी को केवल छह महीने में ठीक कर सकती है. इससे भागलपुर व बिहार समेत देश के 75 हजार एमडीआर प्रतिरोधी टीबी रोगी को लाभ मिलेगा. राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीइपी) का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों से पांच साल पहले 2025 तक भारत में टीबी के बोझ को रणनीतिक रूप से कम करना है.

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