जाम से कराहता तिलकामांझी चौक

Updated at : 23 May 2024 11:39 PM (IST)
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जाम से कराहता तिलकामांझी चौक

जाम से कराहता तिलकामांझी चौक

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– चौक के इर्द-गिर्द चल रहा अघोषित टेंपो-टोटो स्टैंड, बची कसर जब्त ट्रकें कर रही पूरी तिलकामांझी चौक पर इन दिनों ट्रैफिक सिग्नल के बावजूद भीषण जाम की स्थिति बन रही है. एक तरफ जहां सिग्नल से ठीक पहले होटल मोड़ पर अघोषित टेंपो-टोटो का स्टैंड बन गया है. इसकी वजह से सिग्नल की ओर आने वाली गाड़ियां फंस रही है तो बची-खुची कसर तिलकामांझी थाना द्वारा जब्त किये गये चार भारी भरकम ट्रक पूरी कर देते हैं. यही नहीं तिलकामांझी चौक पर ही हटिया रोड से टोटो परिचालन की बनायी गयी व्यवस्था भी ध्वस्त होती दिख रही है. यातायात पुलिस की मौजूदगी में ही बीच चौक पर हटिया रोड के मुहाने पर हमेशा दर्जनों टोटो चालक अपनी गाड़ियों को लगा सवारी को चढ़ाते और उतारते हैं. कुछ ऐसा ही हाल तिलकामांझी चौक पर सुरखीकल मोड़ और बरारी रोड के मुहाने का है. बता दें कि तिलकामांझी चौक पर हमेशा आधा दर्जन यातायात पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति रहती है. पर पुलिसकर्मी तिलकामांझी चौक पर महावीर मंदिर के पास बैठे नजर आते हैं. कोरम पूरा करने के लिए कभी कभार उठकर कुछ वाहनों को पकड़ते और चालान करने के बाद फिर से वहीं बैठ जाते हैं. इधर, तिलकामांझी चौक पर पिछले कुछ दिनों से सिग्नल के कभी भी बंद हो जाने की वजह से वाहन चालक कंफ्यूज हो रहे हैं. कभी भी अचानक सिग्नल बंद हो जाने की वजह से गाड़ी को बढ़ाएं या न बढ़ाएं इसके लिए सिग्नल पर इंतजार करते हैं. इसकी वजह से भी जाम की स्थिति बन जाती है. ई-रिक्शा संघ से नाराज चालकों ने जारी की विज्ञप्ति, अवैध वसूली का आरोप इधर, ई-रिक्शा संघ और यातायात पुलिस की ओर से की गयी कोडिंग और रूट प्रक्रिया को लेकर कुछ चालकों में नाराजगी भी है. इसको लेकर कुछ चालकों द्वारा गुरुवार को एक विज्ञप्ति जारी की गयी है. जिसमें टोटो चालकों से कोडिंग और रूट के नाम पर की जा रही मोटी रकम की वसूली का विरोध किया गया है. जिसमें विशाल नामक एक व्यक्ति पर भी गंभीर आरोप लगाये गये हैं. चालकों का कहना है कि वे लोग अपनी गाढ़ी कमाई और कर्ज लेकर टोटो खरीदते हैं. और फिर रजिस्ट्रेशन में भी काफी खर्च हो जाता है. उसके बाद अब कोडिंग कर रूट तय करने के बाद महज 3 किलोमीटर के रूट में कमाई कर पाना काफी मुश्किल है. ऊपर से संघ के नाम पर चालकों से की जा रही वसूली के बाद उनके पास न तो लोन के पैसे चुकता हो रहे हैं और न ही घर चलाने के लिए पैसे बचते हैं.

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