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Bhagalpur news श्रीराम मंदिर में महर्षि कहोल व बाल अष्टावक्र की मूर्तियां होंगी स्थापित

गंगा नदी के पावन तट पर कहलगांव में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया गया है.

उत्तर वाहिनी गंगा नदी के पावन तट पर कहलगांव में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया गया है. क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से महर्षि कहोल तथा उनके पुत्र ऋषि अष्टावक्र की बाल्यावस्था की भव्य मूर्तियां स्थापित की जायेंगी. यह निर्णय श्री राघव परिवार कहलगांव के तत्वावधान में शहर के अग्रसेन स्मृति भवन में आयोजित विधायक अभिनंदन सह सम्मान समारोह के दौरान लिया गया. कार्यक्रम में एनडीए के तीन नवनिर्वाचित विधायक भागलपुर से रोहित पांडेय, कहलगांव से शुभानंद मुकेश और पीरपैंती से मुरारी पासवान मुख्य रूप से उपस्थित रहे. कहलगांव विधायक शुभानंद मुकेश ने कहा कि सबौर से बटेश्वर स्थान तक मरीन ड्राइव के निर्माण और बनारस की तर्ज पर गंगा रिवर फ्रंट विकसित करने के लिए वह संकल्पित हैं. इस दिशा में लगातार प्रयास किये जा रहे हैं, जिससे क्षेत्र का पर्यटन और आर्थिक विकास संभव हो सके. भागलपुर विधायक रोहित पांडेय ने कहा कि सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के माध्यम से ही क्षेत्र का समग्र विकास संभव है. विकास का अर्थ केवल औद्योगीकरण नहीं होता, बल्कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से आध्यात्म, शिक्षा और ज्ञान का केंद्र रहा है, जिसे पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है. पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान ने कहा कि हम सभी श्रीराम के वंशज हैं और तीनों विधायक मिल कर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करेंगे. विधायकों ने मंदिर निर्माण के साथ-साथ कहलगांव के सांस्कृतिक विकास, गंगा नदी के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण, सड़क व रेल यातायात के विस्तार तथा पर्यटन सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देने का भरोसा दिलाया. राघव परिवार ने बताया कि महर्षि कहोल, जिनके नाम पर कहलगांव का नामकरण हुआ, उनकी भव्य मूर्ति स्थापित की जायेगी. साथ ही ऋषि अष्टावक्र की बाल्यावस्था की मूर्ति स्थापित होगी, जिसमें वह अपनी माता सुजाता की गोद में विराजमान होंगे. मंच संचालन करते हुए राघव परिवार के महासचिव पवन कुमार चौधरी ने बताया कि 2023 में उत्तर वाहिनी गंगा तट स्थित चारों धाम घाट पर अष्टावक्र मंदिर का निर्माण कराया गया था, जिसका उद्घाटन चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी के करकमलों से हुआ था.

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