जैविक हाट में मिल रहे कटिहार का मखाना, मुंगेर का राजमा व भागलपुर का कतरनी, मेंगो जूस, मिलेट्स

Updated at : 06 Feb 2025 9:11 PM (IST)
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जैविक हाट में मिल रहे कटिहार का मखाना, मुंगेर का राजमा व भागलपुर का कतरनी, मेंगो जूस, मिलेट्स

लगातार उठ रहे सवाल के बाद जिला कृषि पदाधिकारी की ओर से तिलकामांझी कृषि कार्यालय परिसर में स्थायी जैविक हाट की जिम्मेदारी पीरपैंती के निर्मल गंगा ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी व मध्यप्रदेश के नमामि गंगे के तहत सर्विस प्रोवाइडर को दे दी गयी.

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-जिला कृषि कार्यालय परिसर में स्थायी रूप से जैविक हाट का शुभारंभ, पीरपैंती के ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी व मध्यप्रदेश सर्विस प्रोवाइडर दे रहे योगदान

लगातार उठ रहे सवाल के बाद जिला कृषि पदाधिकारी की ओर से तिलकामांझी कृषि कार्यालय परिसर में स्थायी जैविक हाट की जिम्मेदारी पीरपैंती के निर्मल गंगा ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी व मध्यप्रदेश के नमामि गंगे के तहत सर्विस प्रोवाइडर को दे दी गयी. स्थायी जिम्मेदारी मिलते ही यहां जैविक तरीके से उत्पादित कटिहार का मखाना, मुंगेर का राजमा, भागलपुर का कतरनी चूड़ा-चावल, मिलेट्स में दलिया, मक्का का सत्तू, सुल्तानगंज का धनिया पाउडर एवं मेंगो जूस बिक रहे हैं.

ऑर्डर पर मिलेगी हरी सब्जियां

कंपनी के टीम लीडर गौतम पांडेय एवं नमामि गंगे परियोजना अंतर्गत परंपरागत कृषि विकास योजना जैविक खेती क्रियान्वयन संस्था के सर्विस प्रोवाइडर शमशेर सिंह भदौरिया ने बताया कि यहां जैविक हरी सब्जी ऑर्डर पर उपलब्ध कराये जायेंगे, ताकि उनकी सब्जियों को ट्रोसपोर्टेशन में दिक्कत नहीं हो और अधिक से अधिक मूल्य भी मिल सके. औने-पौने मूल्य में बिक्री की नौबत नहीं आये. शमशेर सिंह भदौरिया मध्यप्रदेश के मुरैना से आये हैं, जो कि जैविक खाद, जैविक कीटनाशी का इस्तेमाल कराने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि अभी 1000 से 2000 रुपये का कारोबार प्रतिदिन हो रहा है, लेकिन ज्यों-ज्यों लोगों को जानकारी होगी, विश्वास है कि कारोबार बूम हो जायेगा. अभी यहां जैविक उत्पाद के मूल्य सामान्य उत्पाद से 15 से 20 रुपये तक अधिक लिया जा रहा है, जबकि लोगों को इसके महत्व की जानकारी होने पर मुंहमांगी कीमत मिलने लगेगी.

अब भी चुनौतिया है बड़ी

-प्रचार-प्रसार की कमी और ग्राहकों को जानकारी का अभाव

-किसानों को ट्रांसपोर्टेशन का अभाव

-जगह-जगह लोगों को अवगत कराने के लिए करना होगा लगातार कार्यक्रम

-जैविक उत्पादों को किसानों से संग्रह करना और उन्हें तुरंत मूल्य चुकाना

– उत्पादन को बढ़ावा देना

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