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bhagalpur news. तिलकामांझी की 18 लाख की मूर्ति लगाने में दिन-रात हो रहे जतन, पर उस किताबों में नहीं पढ़ा सका टीएमबीयू

Updated at : 03 Jul 2025 2:00 AM (IST)
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bhagalpur news. तिलकामांझी की 18 लाख की मूर्ति लगाने में दिन-रात हो रहे जतन, पर उस किताबों में नहीं पढ़ा सका टीएमबीयू

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने हाल ही में स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारी तिलकामांझी की प्रतिमा 18 लाख रुपये में खरीद कर मंगायी है.

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आरफीन जुबैर, भागलपुर तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने हाल ही में स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारी तिलकामांझी की प्रतिमा 18 लाख रुपये में खरीद कर मंगायी है. प्रतिमा स्थापित करने के लिए विवि प्रशासन खूब जतन कर रहा है, लेकिन छात्र-छात्राओं को तिलका मांझी के गौरवशाली इतिहास की जानकारी नहीं है. इस बात की चिंता अधिकारियों में भी नहीं दिख रही है. वर्ष 1991 में भागलपुर विश्वविद्यालय से तिलकामांझी का नाम जोड़ा गया, लेकिन इन 34 वर्षों में किसी पुस्तक के अध्याय में तिलकामांझी की कहानी शामिल नहीं की जा सकी. एक छोटी सी पुस्तिका भी प्रकाशित नहीं की जा सकी. हालांकि, कुछ समारोह में तिलकामांझी का बखान करते अधिकारियों को सुना जरूर गया और तिलकामांझी पर शोध कराने का सिर्फ बयान दिया गया. 14 नवंबर 2024 को तत्कालीन राज्यपाल ने खेलो इंडिया योजना से तैयार मल्टीपर्पस इंडोर स्टेडियम का भी नाम शहीद तिलकामांझी से जोड़ा.

आखिर छात्र क्यों जाने तिलकामांझी को

टीएमबीयू के इतिहास व प्राचीन भारतीय इतिहास के लिए पीजी स्तर की पढ़ाई होती है. इतिहास में शोध भी होते हैं. सभी कॉलेजों में भी इतिहास की पढ़ाई होती है, लेकिन इन सबसे तिलकामांझी आज भी वंचित हैं.

वीसी बोले : टीएमबीयू में शहीद तिलकामांझी के जीवन-वृत पर होगा शोध

टीएमबीयू के कुलपति प्रो जवाहर लाल ने कहा कि प्रतिमा का अनावरण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों कराया जायेगा. तिलकामांझी चेयर की स्थापना होगी. इससे जनजातीय समुदाय के उत्थान के साथ अमर शहीद तिलकामांझी के जीवन-वृत पर शोध और नवाचार के कार्य शुरू किये जायेंगे. तिलकामांझी चेयर में उत्कृष्ट लाइब्रेरी और म्यूजियम भी स्थापित की जायेगी.

शिक्षकों ने कहा,

टीएमबीयू में शहीद तिलकामांझी की पढ़ाई नहीं होना दुखद है, जबकि पीजी इतिहास विभाग में ट्राइबल स्टडी पर आधारित अध्याय है. लेकिन इसकी पढ़ाई नहीं करायी जाती है.

डॉ केके मंडल, शिक्षक सह सिंडिकेट सदस्य

तिलकामांझी की आदमकद प्रतिमा को स्थापित करना विवि प्रशासन का सराहनीय कदम है. साथ ही तिलकामांझी पर शोध और संथाली भाषा-संस्कृति पर भी पढ़ाई होनी चाहिए.

डॉ हिमांशु शेखर, शिक्षक इतिहास

तिलकामांझी पीठ की स्थापना होनी चाहिए. टीएमबीयू में आदिवासी अध्ययन व दलित अध्ययन को प्रमुखता से पढ़ाया जाये. इससे छात्र-छात्राओं की जानकारी बढ़ेगी.

डॉ चंदा कुमारी, अतिथि शिक्षक, इतिहास

आदिवासी अध्ययन को प्रमुखता से पढ़ाने की आवश्यकता हैं, ताकि छात्र-छात्राओं को शहीद तिलकामांझी पर आधारित ज्ञान बढ़े. वह जान सकें कि शहीद तिलकामांझी कौन थे.

डॉ अक्षय कुमार अंजनी, शिक्षक, इतिहास

विद्यार्थियों ने कहा,

विवि में तिलकामांझी की आदमकद प्रतिमा लगनी चाहिए, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उनके व्यक्तित्व, कृतित्व पर शोध होना चाहिए. कुलपति बीते वर्षों में इस दिशा में प्रयास करते, तो ज्यादा अच्छा होता.

डॉ कृष्ण बिहारी गर्ग, शोधार्थी

स्नातक स्तर पर तिलकामांझी पर आधारित अध्याय नहीं है. कॉलेज स्तर पर तो नहीं, अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए पढ़ाई करते हैं.

शांभवी कुमारी, छात्रा एसएम कॉलेज

तिलकामांझी पर आधारित एक अध्याय की पढ़ाई होनी चाहिए. इससे उनके जीवनी की जानकारी मिलेगी. इससे हम विद्यार्थियों को जानकारी मिलेगी.

मीनू कुमारी, छात्रा एसएम कॉलेज

विवि में तिलकामांझी पर आधारित एक पुस्तक तक तैयार नहीं किया गया है. बाकी सब विश्वविद्यालयों में वनवासी संस्कृति को जानने के लिए अलग से पढ़ाई होती है. इस विवि में भी होनी चाहिए.

छोटी कुमारी, छात्रा एसएम कॉलेज

तिलकामांझी की प्रतिमा स्थापित करना सराहनीय कदम है. इस पर पढ़ाई भी होनी चाहिए.

निशा रानी, छात्रा एसएम कॉलेज

तिलकामांझी की प्रतिमा स्थापित कर विवि एक स्वतंत्रता सेनानी को सच्ची श्रद्धांजलि देने का काम कर रहा है. साथ ही जनजातीय की संस्कृति जानने के लिए संथाली भाषा की पढ़ाई होनी चाहिए.

लक्ष्मी कुमारी, छात्रा एसएम कॉलेज

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL KUMAR

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By ATUL KUMAR

ATUL KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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