भागलपुर में किड्स एरिया का प्रवेश राशि दस रुपए, सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं

Updated at : 07 Aug 2024 10:24 PM (IST)
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भागलपुर में किड्स एरिया का प्रवेश राशि दस रुपए, सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं

Bihar News: भागलपुर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत सौंदर्यीकरण किये गये सैंडिस कंपाउंड में सुविधा शुल्क तो बढ़ा दिया गया, लेकिन उन सुविधाओं का सही से रख-रखाव भी नहीं किया जा रहा है.

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Bihar News: भागलपुर में स्मार्ट सिटी योजना के तहत सौंदर्यीकरण किये गये सैंडिस कंपाउंड में सुविधा शुल्क तो बढ़ा दिया गया, लेकिन उन सुविधाओं का सही से रख-रखाव भी नहीं किया जा रहा है. किड्स प्ले ग्राउंड में बच्चों के कई झूले की स्थिति बहुत ही खराब है. कई झूले टूटने लगे हैं. कई लोहे के झूले ज्वाइंट की जगह पर से टूटने लगे हैं. उस जगह पर जंग लग गया है. लेकिन इसे ठीक नहीं कराया जा रहा है.नगर आयुक्त जो स्मार्ट सिटी लिमिटेड के पदाधिकारी भी हैं निरीक्षण करने तक नहीं आते हैं.

पार्क में एंट्री की राशि बढ़ी

सैंडिस में बच्चों के लिए बनाये किड्स प्ले ग्राउंड में लगे झूला पर बच्चों को झूलने के लिए बने प्रवेश गेट पर अब दस रुपये एंट्री चार्ज लगने लगे हैं. पिछले साल यह चार्ज पांच रुपये था. जब पांच रुपया लग रहा था उस समय झूला व पार्क का रख-रखाव भी सही था, लेकिन अब बच्चों के किड्स प्ले स्थान में प्रवेश करने के लिए 10 रुपया देना पड़ता है, लेकिन सुविधा सही से नहीं मिल रहा है. सैंडिस कंपाउंड की स्थिति से अवगत होने के लिए निगम के नगर आयुक्त जो स्मार्ट सिटी लिमिटेड के पदाधिकारी भी हैं निरीक्षण करने तक नहीं आते हैं.

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कई झूले का सामान टूटा, देखने वाला कोई नहीं

किड्स प्ले ग्राउंड में बच्चों के कई झूले की स्थिति बहुत ही खराब है. कई झूले टूटने लगे हैं. कई लोहे के झूले ज्वाइंट की जगह पर से टूटने लगे हैं. उस जगह पर जंग लग गया है. लेकिन इसे ठीक नहीं कराया जा रहा है. बारिश के समय इन झूलों को प्लास्टिक से ढका भी नहीं जाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि झूला वाले कई जगह पर बारिश का पानी जम गया है, लेकिन उसे हटाया नहीं जा रहा है. बस प्रवेश शुल्क लेने के लिए एजेंसी तैयार है.
झूला तोड़ने में बच्चों से अधिक बड़े सदस्यों का हाथ

झूला तोड़ने में बड़े सदस्य भी शामिल

झूला तोड़ने में बच्चों को किड्स प्ले परिसर में आये बच्चों के बड़े सदस्य भी हैं. उनके बच्चे के लिए बने झूला पर बड़े भी बैठ कर झूलने लगते हैं. कई बार एजेंसी के कर्मी उन्हें झूला से उतारते भी हैं, फिर वो झूला पर बैठ जाते हैं. झूला को तोड़ने में बच्चों के बड़े सदस्य भी जिम्मेदार हैं.

  • कोट
    एजेंसी का एक साल पूरा हो गया है. फिर से जो एसीपी बना है, उसमें नया रेट जोड़ा गया है. अगर किड्स प्ले एरिया का झूला टूटा है तो संबंधित एजेंसी से इसे बनाने के लिए कहा जायेगा.
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Anshuman Parashar

लेखक के बारे में

By Anshuman Parashar

अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.

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