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भागलपुर में गरुड़ के संरक्षण पर खर्च होगा 39 लाख रुपये, वन विभाग के संयुक्त सचिव ने जारी की चिट्ठी

बिहार के भागलपुर के गांगेय क्षेत्र में गरुड़ के संरक्षण व सुरक्षा पर वन विभाग 39.03 लाख रुपये खर्च करेगा. इसमें 9.75 लाख रुपये खर्च करने की तत्काल स्वीकृति विभाग ने दी है. इस बाबत विभाग के संयुक्त सचिव ने चिट्ठी जारी कर दी है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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भागलपुर में गरुड़ के संरक्षण पर खर्च होगा 39 लाख रुपये
भागलपुर में गरुड़ के संरक्षण पर खर्च होगा 39 लाख रुपये
सोशल मीडिया

बिहार के भागलपुर के गांगेय क्षेत्र में गरुड़ के संरक्षण व सुरक्षा पर वन विभाग 39.03 लाख रुपये खर्च करेगा. इसमें 9.75 लाख रुपये खर्च करने की तत्काल स्वीकृति विभाग ने दी है. इस बाबत विभाग के संयुक्त सचिव ने चिट्ठी जारी कर दी है. गरुड़ का संरक्षण केंद्र प्रायोजित वन्य जीव पर्यावास विकास योजना से किया जायेगा.

भागलपुर में रहनेवाले दुर्लभ पक्षियों के मूवमेंट जानने के लिए अब आगे की योजना पर काम चल रहा है. अब तक यहां रहनेवाले 200 से अधिक परिंदे के पांवों में छल्ले पहनाये जा चुके हैं. अब तैयारी इस बात की हो रही है कि पक्षियों के पांवों में सेटेलाइट ट्रांसमीटर पहनाये जायें, ताकि उनके मूवमेंट का पता हर वक्त चलता रहे. दरअसल जून व जुलाई में गरुड़ कहां चले जाते हैं, इसका पता नहीं चल पाता है.

मंदार नेचर क्लब के संस्थापक सदस्य सह बीएनएचएस के इंडियन बर्ड कंजर्वेशन नेटवर्क के स्टेट को-ऑर्डिनेटर अरविंद मिश्रा ने बताया कि क्लब की ओर से बिहार सरकार को सेटेलाइट ट्रांसमीटर के बाबत प्रस्ताव सौंपा जा चुका है. भागलपुर स्थित बर्ड रिंगिंग सेंटर के पदाधिकारियों से भी बात हुई है. उम्मीद है कि जल्द ही रिंगिंग सेंटर की मदद से पक्षियों को सेटेलाइट ट्रांसमीटर पहनाने का काम शुरू हो.

बिहार का पहला बर्ड रिंगिंग सेंटर है भागलपुर में

बिहार का पहला बर्ड रिंगिंग सेंटर भागलपुर शहर में सुंदरवन स्थित वन संरक्षक के आवास में स्थापित है. इसका संचालन बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) कर रही है. इसके माध्यम से प्रवासी पक्षियों के उड़न मार्ग का अध्ययन किया जाता है. बिहार में सुदूर देशों से आनेवाले प्रवासी और देश के ही अन्य इलाकों से आने-जाने वाले पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों के उड़न मार्ग के अध्ययन के लिए इस सेंटर की स्थापना हुई है.

रिंगिंग सेंटर के माध्यम से अब तक विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य, जगतपुर झील, गंगा प्रसाद झील और कोसी कदवा दियारा आदि जगहों पर दो सौ से अधिक पक्षियों को छल्ला पहनाया गया है. छल्ले में दरअसल एक कोड होता है. कहीं भी छल्ला पहने पक्षी किसी को मिलता है, तो छल्ला के माध्यम से लोग बर्ड रिंगिंग सेंटर को सूचित कर सकता है.

इन चीजों पर खर्च होंगे रुपये

  • सामुदायिक संरक्षण क्षेत्रों में कमेटी का गठन

  • कदवा दियारा में गरुड़ की टैगिंग

  • पक्षियों का सर्वे व गणना

  • चार पर्यवेक्षक द्वारा निगरानी

  • प्रजनन स्थलों में प्रचार संकेतों का निर्माण

  • काले गर्दन वाले सारस का सर्वेक्षण

  • गरुड़ रेस्क्यू सेंटर के परिचालन

  • गरुड़ के बचाव व पुनर्वास केंद्र के लिए नया जाल

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