भागलपुर का रमासी बनेगा 'सिंदूर गांव', बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने लिया गोद, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

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पौधारोपन करते हुए सम्मानित अतिथि

पौधारोपन करते हुए सम्मानित अतिथि

Bhagalpur News: रमासी बनेगा 'सिंदूर गांव' कृषि विश्वविद्यालय ने लिया गोद,अंगीकारण, तकनिकी स्थान्तरण को लेकर कार्यक्रम का आयोजन

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सन्हौल (भागलपुर) से अम्बिका शर्मा

Bhagalpur News: भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड का रमासी गांव अब अपनी नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर ने गांव को 'सिंदूर गांव' के रूप में विकसित करने की पहल शुरू कर दी है. इस परियोजना का उद्देश्य प्राकृतिक सिंदूर के उत्पादन को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करना है.

इसी उद्देश्य से शनिवार को रमासी गांव में अंगीकरण एवं तकनीकी हस्तांतरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए.

250 सीता सिंदूर पौधों से हुई अभियान की शुरुआत

कार्यक्रम के दौरान बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह, कहलगांव विधायक ई. शुभानंद मुकेश और अन्य कृषि वैज्ञानिकों ने किसान रविंद्र कुमार के खेत में 250 सीता सिंदूर पौधों का रोपण कर अभियान की औपचारिक शुरुआत की.

इसके साथ ही गांव के दर्जनों किसानों को भी सीता सिंदूर के पौधे वितरित किए गए और उन्हें इसकी वैज्ञानिक खेती के लिए प्रेरित किया गया.

प्राकृतिक सिंदूर उत्पादन का बनेगा केंद्र

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि अगले कुछ वर्षों में इन पौधों से प्राप्त बीजों के आधार पर प्राकृतिक सिंदूर का उत्पादन शुरू किया जाएगा. इससे रासायनिक उत्पादों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक सिंदूर उपलब्ध होगा और स्थानीय स्तर पर एक नए कृषि आधारित उद्योग को बढ़ावा मिलेगा.

विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पहल किसानों के लिए आय का नया स्रोत बनने के साथ-साथ क्षेत्र की पहचान भी बदलेगी.

महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार

इस परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है. प्राकृतिक सिंदूर उत्पादन से जुड़े प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा.

इससे गांव में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे.

किसानों को तकनीकी सहायता भी देगा विश्वविद्यालय

कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सीता सिंदूर की वैज्ञानिक खेती, पौधों की देखभाल, उत्पादन तकनीक और भविष्य की संभावनाओं की जानकारी दी. विश्वविद्यालय की ओर से समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा.

Bhagalpur News: जनप्रतिनिधि और वैज्ञानिक रहे मौजूद

कार्यक्रम में कृषि निदेशक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. मोहम्मद फेजा अहमद, डॉ. एस.के. पाठक, डॉ. राजेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के कृषि वैज्ञानिक मौजूद रहे.

स्थानीय मुखिया शोभा देवी ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र देकर स्वागत किया. इस अवसर पर जदयू प्रदेश महासचिव रोजी रानी, मुखिया प्रतिनिधि विजय मंडल, जितेंद्र साह, राजकुमार चौधरी, गोपाल मंडल, प्रदीप कुमार समेत बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे.

यदि यह पहल सफल होती है तो आने वाले समय में रमासी गांव केवल भागलपुर ही नहीं, बल्कि बिहार में प्राकृतिक सिंदूर उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है.

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