लंदन तक पहुंचेगी भागलपुर की मंजूषा कला,अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ा अंग प्रदेश का गौरव

गुलाबी कुर्ता में मंजूषा पेंटिंग लेते लंदन के शोध छात्र अमन आनंद. | Prabhat Khabar Network
Bhagalpur Folk Art: भागलपुर की ऐतिहासिक लोक कला 'मंजूषा' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है. शोधार्थी अमन आनंद लंदन में अपने शिक्षकों को मंजूषा पेंटिंग भेंट करेंगे, जो इस कला के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित होगा.
Bhagalpur Folk Art: भागलपुर, अंग प्रदेश की हजारों वर्ष पुरानी लोक कला मंजूषा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी नई पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रही है. सिल्क सिटी भागलपुर से निकली यह पारंपरिक कला अब ब्रिटेन की राजधानी लंदन तक पहुंचने वाली है. सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में गणित विषय से पीएचडी कर रहे शोध छात्र अमन आनंद भागलपुर से मंजूषा कला की 10 विशेष पेंटिंग अपने साथ ले जा रहे हैं, जिन्हें वह अपने शिक्षकों को उपहार स्वरूप भेंट करेंगे. यह पहल केवल एक सांस्कृतिक उपहार नहीं, बल्कि बिहार की लोक विरासत को दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण कोशिश मानी जा रही है.
लंदन में दिखेगी भागलपुर की सांस्कृतिक पहचान
पूर्णिया निवासी शोध छात्र अमन आनंद ने बताया कि जब उन्होंने लंदन की यूनिवर्सिटी में प्रवेश लिया था, तब उन्होंने मंजूषा पेंटिंग वाली शर्ट पहन रखी थी. विदेशी शिक्षकों और छात्रों ने इस अनोखी कला के बारे में उत्सुकता दिखाई और इसकी खूब सराहना की. तभी उन्होंने तय किया कि अगली बार भारत आने पर वे मंजूषा पेंटिंग लेकर जाएंगे और अपने शिक्षकों को बिहार की इस विरासत से परिचित कराएंगे.
भारत लौटने के बाद अमन भागलपुर पहुंचे और मंजूषा गुरु मनोज पंडित से मुलाकात की. पूरी बात जानने के बाद मनोज पंडित ने उन्हें 10 आकर्षक मंजूषा पेंटिंग उपलब्ध कराईं, जिन्हें अब अमन लंदन ले जाएंगे.
'हर घर मंजूषा' अभियान को मिलेगा नया आयाम
अमन आनंद ने बताया कि वह 'हर घर मंजूषा' जागरूकता अभियान से भी जुड़े रहे हैं. इस अभियान का उद्देश्य करीब 1.8 लाख लोगों तक मंजूषा कला की जानकारी पहुंचाना है. उनका मानना है कि यदि विदेशों में भी इस कला की पहचान बनेगी तो स्थानीय कलाकारों को नए अवसर मिलेंगे और भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत वैश्विक स्तर पर मजबूत होगी.
दो महीने में तेजी से बढ़ा मंजूषा कला का दायरा
हाल के महीनों में मंजूषा कला ने लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है. पहले भोपाल में इसकी प्रस्तुति हुई. इसके बाद बेंगलुरु में आयोजित 'चित्र भारती राष्ट्रीय कार्यशाला' में भागलपुर के राज्य पुरस्कार प्राप्त कलाकार पवन कुमार सागर ने बिहार का प्रतिनिधित्व किया.
22 से 26 जून तक आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश के 13 राज्यों से आए 50 प्रमुख लोक कलाकारों ने भाग लिया, जहां मंजूषा कला को विशेष सराहना मिली. अब लंदन में शिक्षकों तक यह कला पहुंचने से इसकी वैश्विक पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है.
तीन रंगों में छिपी है मंजूषा कला की पूरी कहानी
मंजूषा कला की सबसे बड़ी विशेषता इसका सीमित लेकिन अत्यंत प्रभावशाली रंग संयोजन है. इसमें केवल हरा, पीला और गुलाबी रंगों का प्रयोग किया जाता है.
हरा रंग प्रकृति, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. पीला रंग विकास और शुभता को दर्शाता है, जबकि गुलाबी रंग प्रेम, सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है. इन रंगों के माध्यम से कलाकार अंग क्षेत्र की प्रसिद्ध बिहुला-विषहरी लोकगाथा को जीवंत रूप देते हैं.
Bhagalpur Folk Art: राष्ट्रपति भवन से लेकर लंदन तक पहुंची कला
पिछले कुछ वर्षों में मंजूषा कला ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. यह कला गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के राजपथ तक पहुंच चुकी है. केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसकी प्रदर्शनी लग चुकी है. हाल ही में मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने राष्ट्रपति भवन में भी इस कला का प्रदर्शन किया, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सम्मानित किया.
अब लंदन के शिक्षकों तक मंजूषा पेंटिंग पहुंचना इस बात का संकेत है कि भागलपुर की यह लोक कला धीरे-धीरे वैश्विक पहचान हासिल कर रही है.
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