गंगा के रास्ते भागलपुर पहुंचा 1668 मीट्रिक टन का मेगा कार्गो, बरौनी रिफाइनरी प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार

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1668 मीट्रिक टन का मेगा कार्गो

1668 मीट्रिक टन का मेगा कार्गो

कोलकाता के डायमंड हार्बर से रवाना 1668 मीट्रिक टन वजनी औद्योगिक उपकरण लेकर तीन कार्गो जलयान भागलपुर से होकर बरौनी रिफाइनरी की ओर बढ़े. यह गंगा जलमार्ग की बढ़ती क्षमता और भारी औद्योगिक परिवहन में इसकी भूमिका का एक बड़ा उदाहरण है.

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भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट

Bhagalpur News: गंगा जलमार्ग के बढ़ते महत्व का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है. कोलकाता के डायमंड हार्बर बंदरगाह से रवाना 1668 मीट्रिक टन वजनी औद्योगिक उपकरण लेकर तीन बड़े कार्गो जलयान भागलपुर से गुजरते हुए बरौनी रिफाइनरी की ओर बढ़े हैं. इन जलयानों में डेप्रोपेनाइजर, स्प्लिटर और डीथेनाइजर जैसी महत्वपूर्ण रिफाइनरी इकाइयां हैं. भारत अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की निगरानी में जलस्तर और मार्ग की लगातार जांच की गई ताकि सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सके. यह परियोजना गंगा जलमार्ग की बढ़ती क्षमता और भारी औद्योगिक परिवहन में इसकी भूमिका को भी रेखांकित करती है.

भागलपुर से गुजरा 1668 मीट्रिक टन का मेगा कार्गो

भागलपुर से होकर गंगा जलमार्ग पर मंगलवार को 1668 मीट्रिक टन वजनी मेगा कार्गो का आवागमन हुआ. कोलकाता के डायमंड हार्बर बंदरगाह से रवाना तीन बड़े कार्गो जलयान बरौनी रिफाइनरी के लिए डेप्रोपेनाइजर, स्प्लिटर और डीथेनाइजर जैसी महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयां लेकर आगे बढ़े. भारत अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की निगरानी में जलमार्ग की गहराई और सुरक्षित मार्ग का लगातार आकलन किया गया ताकि कार्गो बिना किसी बाधा के अपने गंतव्य तक पहुंच सके.

डायमंड हार्बर से सिमरिया घाट तक गंगा जलमार्ग का सफर

यह मेगा कार्गो कोलकाता के डायमंड हार्बर बंदरगाह से रवाना हुआ है और गंगा जलमार्ग के जरिए लगभग 713 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सिमरिया घाट पहुंचेगा. इसके बाद भारी उपकरणों को विशेष वाहनों के माध्यम से बरौनी रिफाइनरी ले जाया जाएगा.

कार्गो परिवहन में एमबी तोरसा, टग ग्वालियर और एमबी मैरिन-99 जैसे बड़े जलयान शामिल हैं. पूरे मार्ग में भारत अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के क्षेत्रीय अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे.

Bhagalpur News: भागलपुर में जलस्तर की लगातार हुई निगरानी

इतने भारी कार्गो को सुरक्षित रूप से गंगा में ले जाने के लिए पर्याप्त जलस्तर आवश्यक होता है. अधिकारियों ने बताया कि जलयान के संचालन के लिए कम से कम 1.6 मीटर पानी की गहराई जरूरी होती है. इसके अलावा पुलों और हाईटेंशन बिजली लाइनों के नीचे से गुजरने के लिए पानी की सतह से लगभग 11 मीटर का क्लियरेंस भी अनिवार्य है.

गंगा में पर्याप्त जलस्तर होने के कारण कार्गो को नवगछिया के मुख्य जलमार्ग से सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया गया. क्षेत्रीय कार्यालय की टीम पूरे समय जलयानों के संपर्क में रही और आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराती रही.


बरौनी रिफाइनरी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये उपकरण

इस बार बरौनी रिफाइनरी के लिए जो उपकरण भेजे जा रहे हैं, उनमें डेप्रोपेनाइजर, स्प्लिटर और डीथेनाइजर जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोसेसिंग यूनिट शामिल हैं. ये उपकरण रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के साथ ईंधन प्रसंस्करण को अधिक दक्ष बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे.

हालांकि इससे पहले भी बरौनी रिफाइनरी के लिए जलमार्ग से भारी उपकरण पहुंचाए गए थे, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयों का परिवहन पहली बार किया जा रहा है.

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क्या है डेप्रोपेनाइजर और स्प्लिटर

डेप्रोपेनाइजर एक विशेष डिस्टिलेशन कॉलम होता है, जिसका उपयोग गैस मिश्रण या कच्चे तेल से प्रोपेन को अलग करने के लिए किया जाता है. इससे आगे की रिफाइनिंग प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है.

स्प्लिटर एक विशेष आसवन इकाई है, जो मिश्रित हाइड्रोकार्बन को उनके क्वथनांक के आधार पर अलग-अलग उपयोगी उत्पादों में विभाजित करती है. वहीं डीथेनाइजर गैस मिश्रण से एथेन को अलग करने की प्रक्रिया में उपयोग किया जाता है. ये तीनों इकाइयां आधुनिक तेल रिफाइनरी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.

गंगा जलमार्ग से बढ़ रहा औद्योगिक परिवहन

राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर भारी औद्योगिक उपकरणों का परिवहन बढ़ना इस बात का संकेत है कि गंगा अब केवल धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों का माध्यम नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है. इससे सड़क परिवहन पर दबाव कम होने के साथ भारी मशीनरी के सुरक्षित और किफायती परिवहन को भी बढ़ावा मिल रहा है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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