कुलपति के आश्वासन के बाद पांच दिनों से जारी अनशन टूटा, छात्रों की बिगड़ी तबीयत

Updated at : 14 Feb 2025 9:46 PM (IST)
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कुलपति के आश्वासन के बाद पांच दिनों से जारी अनशन टूटा, छात्रों की बिगड़ी तबीयत

- टीएमबीयू के डीएसडब्ल्यू व बीएन काॅलेज के प्राचार्य ने जूस पिलाकर छात्राें का आंदोलन कराया खत्म

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टीएमबीयू के कुलपति प्राे जवाहर लाल के आश्वासन के बाद शुक्रवार को पीजी हिंदी विभाग के छात्राें ने पांच दिन से जारी अनशन समाप्त कर दिया. डीएसडब्ल्यू प्राे बिजेंद्र कुमार व बीएन काॅलेज के प्राचार्य अशाेक कुमार ठाकुर ने जूस पिलाकर छात्राें का अनशन खत्म कराया. वहीं बीमार छात्राओं के इलाज के लिए धरना स्थल पर डॉक्टर को बुलाकर जांच करायी गयी. बीमार छात्र-छात्राओं को वाहन पर बिठाकर अपने घर व हॉस्टल तक पहुंचाया गया. अनशन में शामिल कुछ छात्राओं की हालत काफी बिगड़ गयी थी. कुछ छात्रों को चक्कर आ रहा था, तो कोई बार-बार बेहोश हो रहा था. पांच दिन से भूखे-प्यासे छात्रों ने बताया कि शिक्षक दिव्यानंद देव के हिंदी विभाग में वापसी नहीं होने पर आगे की रणनीति बनायी जायेगी.

कुलपति आवास पर छात्रों की हुई मीटिंग

टीएमबीयू के पदाधिकारियों के पहुंचने के बाद दोपहर 12:30 बजे अनशन टूटा. इससे पहले कुलपति के आवासीय कार्यालय जाकर पीजी छात्रा वर्षा, प्रिया, हैप्पी आनंद भारद्वाज, रूपेश और कुंदन ने वार्ता की. वार्ता के बाद छात्रों ने बताया कि कुलपति के किडनी में परेशानी थी. वह बेड पर लेटे हुए थे. कहा कि शिक्षक को वापस विभाग में लाने के लिए विचार किया जायेगा. इसलिए आपलोग अनशन वापस लीजिये. बता दें कि मामले को शांत करने के लिए राजभवन व प्रशासनिक स्तर से भी कुलपति को लगातार फोन आ रहा है. कुलपति के आग्रह के बाद 31 जनवरी से शुरू हुए विवाद पर फिलहाल विराम लग गया है. पीजी हिंदी विभाग के छात्र व एबीवीपी के राज्य विवि कार्य प्रमुख हैप्पी आनंद ने बताया कि कुलपति ने वार्ता के दौरान कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है. उन्हें पटना जाना है. प्रदर्शन के कारण वह नहीं जा सके हैं.

शिक्षक केके मंडल का मामला हो रहा गर्म

पीजी हिंदी विभाग से नारायणपुर स्थित जेपी कॉलेज में ट्रांसफर किये गये डॉ दिव्यानंद के बाद इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ केके मंडल का मुद्दा भी गरमा रहा है. इतिहास विभाग के पूर्ववर्ती छात्र व विवि छात्र संघ के पूर्व संकाय प्रतिनिधि कृष्ण बिहारी गर्ग ने कुलपति से पूछा है कि केके मंडल के मामले में बनी कमेटी के निर्णय को लागू करने में इतना विलंब क्यों हाे रहा है. फरवरी 2023 में केके मंडल पर एक महिला शिक्षक से दुर्व्यवहार के बाद जांच में आरोप गलत पाये गये. बावजूद उन्हें नारायणपुर से वापस नहीं लाया जा रहा है.

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