भागलपुर में 100 एकड़ में बन रहा बिहार का पहला हाईटेक क्लाइमेट-रेजिलिएंट फार्म, QR Code और GIS से होगी हर पेड़ की निगरानी

सीएसआर (CSR) के नाम पर सिर्फ पौधे गिनने वाली व्यवस्था को चुनौती; नवगछिया के तेतरी गांव में रोपे जा रहे हर पौधे का अपना QR कोड, मोबाइल एप से हो रही है 'डिजिटल पेरेंटिंग' | Prabhat Khabar Network
Bhagalpur News : भागलपुर के तेतरी गांव में एक अनूठा इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम विकसित हो रहा है. कॉर्पोरेट इंजीनियर प्रतीक राय तकनीक और जैविक कृषि का संगम कर पर्यावरण संरक्षण का एक भविष्यवादी मॉडल तैयार कर रहे हैं.
Bhagalpur News: नवगछिया (भागलपुर) में जहां गांवों से प्रतिभाओं के शहरों और विदेशों की ओर पलायन आम बात है, वहीं भागलपुर जिले के नवगछिया का तेतरी गांव एक अलग कहानी लिख रहा है. एलएंडटी, रिलायंस और बीएचईएल जैसी बड़ी कंपनियों में करीब दो दशक तक मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में काम कर चुके प्रतीक राय अब कॉर्पोरेट करियर छोड़कर मिट्टी, पेड़ और पर्यावरण को नई जिंदगी देने के मिशन में जुटे हैं. तेतरी गांव में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहा इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (IFS) सिर्फ खेती का प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि तकनीक, जैविक कृषि और जलवायु परिवर्तन से निपटने का एक भविष्यवादी मॉडल बनता जा रहा है.
कॉर्पोरेट अनुभव से निकला पर्यावरण संरक्षण का नया रास्ता
प्रतीक राय बताते हैं कि लंबे कॉर्पोरेट अनुभव के दौरान उन्होंने हर साल बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान देखे, लेकिन अधिकांश पौधे कुछ महीनों में देखरेख के अभाव में नष्ट हो जाते थे.
इसी अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि पर्यावरण संरक्षण का असली लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें वर्षों तक जीवित रखना होना चाहिए. इसी सोच से उन्होंने "डिजिटल पेरेंटिंग ऑफ ट्री" की अवधारणा विकसित की.
Bhagalpur News: हर पेड़ का होगा डिजिटल रिकॉर्ड, QR कोड और GIS से होगी निगरानी
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी तकनीक है. यहां लगाए जाने वाले हर पौधे को एक यूनिक QR कोड दिया जाएगा.
GIS (Geographic Information System) आधारित मैपिंग के जरिए हर पेड़ की सटीक लोकेशन दर्ज होगी. मोबाइल एप के माध्यम से कर्मचारी हर महीने पौधों की ऊंचाई, वृद्धि, मिट्टी की नमी, रोग की स्थिति और अन्य आवश्यक जानकारी अपडेट करेंगे.
इससे किसी भी निवेशक, संस्था या सहयोगी को दुनिया के किसी भी स्थान से अपने लगाए गए पौधे की स्थिति और उसके कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) की जानकारी मिल सकेगी.
2 हजार टन वर्मी कम्पोस्ट यूनिट से मिट्टी को मिलेगी नई जिंदगी
यह परियोजना केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है. फार्म परिसर में 2 हजार टन क्षमता की वर्मी कम्पोस्ट इकाई भी विकसित की जा रही है.
इससे जैविक खाद का उत्पादन होगा, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और भूजल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. आसपास के किसानों को भी कम लागत पर जैविक खेती अपनाने का अवसर मिलेगा.
पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार का नया मॉडल
यह परियोजना साबित करती है कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास एक-दूसरे के पूरक हो सकते हैं.
फार्म के जरिए स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर तैयार हो रहे हैं. एमबीए और स्नातक जैसे शिक्षित युवा भी इस परियोजना से जुड़कर आधुनिक कृषि और पर्यावरण आधारित व्यवसाय में अपना भविष्य तलाश रहे हैं.
Bhagalpur News: जलवायु परिवर्तन के दौर में बन सकता है राष्ट्रीय मॉडल
विशेषज्ञों की नजर में यह परियोजना केवल एक निजी पहल नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ खेती और स्मार्ट वन प्रबंधन का एक व्यवहारिक मॉडल है.
यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो बिहार ही नहीं, देश के अन्य राज्यों में भी इसे अपनाया जा सकता है. यह मॉडल बताता है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन में बदला जा सकता है.
नवगछिया का यह प्रयास इस बात का संकेत है कि भविष्य की खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डेटा, तकनीक, जैव विविधता और जलवायु संरक्षण के संतुलन पर आधारित होगी.
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