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bhagalpur news. गुवारीडीह से मिले पुरावशेषों को जिला प्रशासन को किया सुपुर्द

Updated at : 24 Dec 2025 11:42 PM (IST)
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bhagalpur news. गुवारीडीह से मिले पुरावशेषों को जिला प्रशासन को किया सुपुर्द

बिहपुर प्रखंड के जयरामपुर के गुवारीडीह में पिछले पांच वर्षों में मिले पुरावशेषों को ग्रामीण अविनाश चौधरी ने बुधवार को जिला कला संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन को विधिवत सुपुर्द किया है.

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बिहपुर प्रखंड के जयरामपुर के गुवारीडीह में पिछले पांच वर्षों में मिले पुरावशेषों को ग्रामीण अविनाश चौधरी ने बुधवार को जिला कला संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन को विधिवत सुपुर्द किया है. जिला कला संस्कृति पदाधिकारी पुरावशेषों को लेकर जिला मुख्यालय पहुंच गये हैं, जानकारी मिली है कि सभी पुरावशेषों को जिला संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा. संग्रहित पुरावशेष 38 प्रकार के हैं और कुल पुरावशेषों की संख्या 1033 है. अविनाश चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीण वर्षों से गुवारीडीह टीले से मिले पुरावशेषों को संग्रहित कर रहे थे. अविनाश ने जिला कला संस्कृति पदाधिकारी को पुरावशेषों के रख रखाव में कठिनाई होने और संरक्षण की दिशा में पत्र लिखा था, जिसके बाद पुरावशेषों की सूची तैयारी करायी गयी. फिर जिला कला संस्कृति पदाधिकारी से प्रयास से सभी पुरावशेषों को जिला संग्रहालय में जमा कराया गया. कई तरह के हैं पुरावशेष, जिससे पता चलती है कि गुवारीडीह की पुरानी सभ्यता प्राप्त सामग्रियों में अधिकांश टेराकोटा की वस्तुएं हैं. पत्थर के जांता का एक भाग, सिलबट्टा और लोढ़ी, नाद और मिट्टी के बर्तन के टुकड़े, रेड-ब्लैक-वेयर, तीन तांबा के पंच मार्क सिक्के, जानवरों की हड्डियां, कंचे, मिट्टी के खिलौने, कच्ची मिट्टी के चूल्हे का कुछ भाग, पॉलीश्ड ब्लैक वेयर के टुकड़े आदि हैं. अमूल्य धरोहर है गुवारीडीह से प्राप्त पुरावशेष जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि सभी सामग्रियां अमूल्य धरोहर हैं, ये अंग प्रदेश के इतिहास हैं, इसे संग्रहालय में सुरक्षित रखने से भविष्य में दर्शक और शोधार्थी और बेहतर तरीके से अपने इतिहास को जानने, समझने में सक्षम हो सकेंगे. यदि किसी के पास भी ऐसी सामग्री प्राप्त हो तो तत्काल जिला समाहर्ता को सूचित करते हुए संग्रहालय में जमा करा देना चाहिए. अविनाश के कार्य की हुई सराहना कला संस्कृति पदाधिकारी ने अविनाश चौधरी के कार्य की सराहना की है. मौके पर अविनाश ने बताया कि वे कई सालों से रोज गुवारीडीह टीले पर जाते थे और वहां मिलने वाले पुरावशेषों को अपने मुर्गी फार्म में रखते थे. लोग उसके काम का अहमियत नहीं देते थे लेकिन आज इन्हीं सामग्रियों को देखने लोग दूर दराज से यहां आते हैं. अविनाश ने कहा कि संग्रहालय में सामग्रियों के संरक्षित हो जाने से ज्यादा लोग सामग्री को देख सकेंगे और अध्ययन कर सकेंगे. इस अवसर पर टीएमबीयू की शोधार्थी आयशा, आनंद, रोजी, रितेश और फैसल आदि अन्य ग्रामीण भी मौजूद रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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NISHI RANJAN THAKUR

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