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तिलका मांझी यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों पर मंडरा रहा खतरा, मानकों का पालन नहीं करने पर होगी बड़ी कार्रवाई

Updated at : 14 Jan 2017 8:12 AM (IST)
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तिलका मांझी यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों पर मंडरा रहा खतरा, मानकों का पालन नहीं करने पर होगी बड़ी कार्रवाई

भागलपुर : बिहार के भागलपुर स्थित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय प्रशासन कई संबद्धन कॉलेजों की मान्यता रद्द कर सकता है. कई कॉलेजों में बिना मान्यता के ही विभिन्न संकाय में विषयों की पढ़ाई हो रही है. छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है. उस विषय की परीक्षा भी ली जा रही है. ऐसे कॉलेजों पर विवि […]

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भागलपुर : बिहार के भागलपुर स्थित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय प्रशासन कई संबद्धन कॉलेजों की मान्यता रद्द कर सकता है. कई कॉलेजों में बिना मान्यता के ही विभिन्न संकाय में विषयों की पढ़ाई हो रही है. छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है. उस विषय की परीक्षा भी ली जा रही है. ऐसे कॉलेजों पर विवि प्रशासन धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज करा सकता है. ऐसे कई मामले विवि प्रशासन के समक्ष आ रहे हैं. संबद्ध कॉलेजों ने विवि को मान्यता प्राप्त विषयों की सूची उपलब्ध नहीं करायी है. सवाल उठ रहा है कि अगर विवि से मान्यता खत्म होने के बाद भी संबद्धन कॉलेज विषय की पढ़ाई करा रहे हैं. नामांकन व परीक्षा हो रही है. विवि प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं है.

चर्चा है कि विवि के कर्मचारी की मिलीभगत से यह सब किया जा रहा है. वर्तमान में विवि प्रशासन के पास संबद्ध कॉलेजों को किन-किन संकाय में मान्यता है, या खत्म हो गया है. इसकी जानकारी विवि प्रशासन को भी नहीं है. विवि जांच टीम ने ताड़र व सीएम कॉलेज बौंसी के फर्जी छात्र मामले में कई ऐसी गलती मिली है, जो चौंकाने वाली है.

इसे लेकर जांच टीम ने रिपोर्ट तैयार कर ली है. रिपोर्ट में तमाम चीजों का उल्लेख है. जांच टीम के सूत्रों के अनुसार कई ऐसे संबद्ध कॉलेज है जिनकी विषय की मान्यता विवि से खत्म हो गयी है. इसके बाद भी उस विषय की पढ़ाई हो रही है. परीक्षा हो रही है और इसकी जानकारी विवि को नहीं दी गयी है. जांच के बाद तमाम चीज सामने आ रही है. उन कॉलेजों की मान्यता रद्द करने के लिए जांच टीम ने विवि को लिखा है. फर्जी छात्र मामले में विवि की जांच टीम साेमवार तक विवि प्रशासन को रिपोर्ट सौंप सकती है.

संबद्ध कॉलेज को विभिन्न संकाय में मिली विवि से मान्यता खत्म हो चुकी है, या फिर मान्यता मिली ही नहीं है. इसकी सूची सभी संबद्ध कॉलेजों से मांगी जायेगी. मान्यता से संबंधित फाइल की जांच की जायेगी. संबंधित कर्मचारी से पूछताछ की जायेगी. गड़बड़ी मिलने पर उन कॉलेजों की मान्यता रद्द हो सकती है. धोखाधड़ी का भी मामला दर्ज कराया जा सकता है.
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