बिहार : 11 साल बाद जेल से रिहा हुए बिहार के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन, लालू को बताया अपना नेता

Updated at : 10 Sep 2016 11:02 AM (IST)
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बिहार : 11 साल बाद जेल से रिहा हुए बिहार के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन, लालू को बताया अपना नेता

-डिजीटल डेस्क- भागलपुर : बिहार के बाहुबली नेता और सीवान के पूर्व आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को 11 साल बाद जेल से रिहा कर दिया गया है. पटना हाइकोर्ट से राजीव रोशन मर्डर केस में जमानत मिलने के बाद शहाबुद्दीन की भागलपुर जेल से रिहाई हुई.रिहा होते ही बाहुबली नेता शहाबुद्दीन ने कहा कि मैं […]

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-डिजीटल डेस्क-

भागलपुर : बिहार के बाहुबली नेता और सीवान के पूर्व आरजेडी सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को 11 साल बाद जेल से रिहा कर दिया गया है. पटना हाइकोर्ट से राजीव रोशन मर्डर केस में जमानत मिलने के बाद शहाबुद्दीन की भागलपुर जेल से रिहाई हुई.रिहा होते ही बाहुबली नेता शहाबुद्दीन ने कहा कि मैं अपनी इमेज बदलने की कोशिश नहीं करूंगा. पिछले 26 साल से लोगों ने मुझे इसी रूप में स्वीकार किया है. उन्होंने कहा कि मेरी रिहाई से राजनीति का कोई लेना -देना नहीं है, कोर्ट ने अपनी न्यायिक प्रक्रिया पूरी की है. ज्ञात हो राजद के बाहुबली नेता शहाबुद्दीन पिछले 11 साल से जेल में बंद थे.

शहाबुद्दीन जेल से बाहर निकलने के बाद 38 गाड़ियों के साथ सीवान रवाना हो गये हैं.अपनी नई फार्च्यूनर गाड़ी में सवार शहाबुद्दीन नवगछिया से होते हुए बड़हरिया के रास्ते सिवान रवाना हो गये. चार बार सांसद और दो बार विधायक रहे शहाबुद्दीन पर 49 अपराधों में जमानत मिल चुकी है.शहाबुद्दीन के काफिले में मुख्य लोगो में सिवान से जीरादेई के विधयक रमेश कुशवाहा, गिरधारी यादव, रघुनाथपुर विधयक हरिशंकर यादव, सहित कई नेता शामिल है.
जेल से बाहर निकलते ही समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की. अहले सुबह समर्थकों का जुटना शुरू हो गया था. मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए शहाबुद्दीन ने कहा कि वो13 साल बाद घर जा रहे हैं, बहुत खुश है. उधर शहाबुद्दीन ने कहा कि सारी दुनिया जानती है कि मैं किसके साथ हूं. उन्होंने कहा कि मेरे नेता लालू प्रसाद यादव हैं.उन्होंने कहा नीतीश कुमार परिस्थितियों के सीएम है. लालू यादव ही हमारे नेता है. कोर्ट ने मुझे जेल भेजा था वहीं कोर्ट ने मुझे रिहा किया.सुशील मोदी के बारे में जब मीडिया ने सवाल पूछा तो शहाबुद्दीन ने कहा " मैं सुशील मोदी को गंभीरता से नहीं लेता".25 साल की उम्र में पहली बार 1990 में शहाबुद्दीन चुनाव जीते. 1996 में पहली बार सांसद बने. एक युवक को तेजाब से जलाकर मारे जाने का आरोप था. 1986 में पहली बार शहाबुद्दीन पर अपराधिक मामला दर्ज हुआ था.

राज्य सरकार के कई मंत्री और विधायक भी शहाबुद्दीन की अगुवानी के लिए पहुंचे. भागलपुर जेल में बंद शहाबुद्दीन के स्वागत के लिए रात से ही समर्थक जेल के बाहर जमा थे. साल 2014 के राजीव रोशन हत्याकांड में शहाबुद्दीन को जमानत मिली है, जिसके बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया था. राजीव रोशन 2004 में दो भाइयों गिरिश राज और सतीश राज की हत्या के मामले में गवाह था.

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भागलपुर जेल से बाहर आने के बाद शहाबुद्दीन ने कहा कि ‘लालू यादव ही मेरे नेता है. नीतीश कुमार परिस्थितियों के मुख्‍यमंत्री हैं. सब जानते हैं कि मुझे फंसाया गया है’.

बीजेपी ने शहाबुद्दीन की रिहाई को बिहार में जंगल राज की वापसी बताया है. बीजेपी का कहना है कि शहाबुद्दीन की रिहाई से फिर से दहशत का माहौल बनेगा.

भागलपुर में चाक-चौबंद सुरक्षा

शहाबुद्दीन की रिहाई को लेकर दिनभर भागलपुर में अलग-अलग गतिविधियां होती रही. एसएसपी मनोज कुमार ने खुद विक्रमशिला सेतु तक की सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा लिया. पुलिस की गाड़ी लगातार गश्त करती रही.

शहर में सांसद के समर्थकों ने होटल के कई कमरे बुक करा रखे थे. तिलकामांझी चौक के दो होटलों सहित कचहरी चौक और स्टेशन चौक के पांच होटलों में सीवान सहित अन्य जगहों से आये समर्थकों के लिए कमरे बुक कराये गये थे.

पूर्व सांसद शहाबुद्दीन पर करीब 36 मामले दर्ज हैं. 35 मामलों में उन्हें पहले में ही बेल मिल गई थी. एकमात्र तेजाब कांड मामले में वे जेल में थे, जिसमें भी जमानत मिलने के बाद अब भागलपुर जेल से उनकी रिहाई हो गई.

क्या था मामला
शहाबुद्दीन का इतिहास शुरू से ही आपराधिक रहा है. साल 1986 में पहली बार उनपर पहला मामला दर्ज हुआ जब वो 19 साल के थे.5 मार्च 2001 को शहाबुद्दीन ने राजद के एक नेता को गिरफ्तार करने आए पुलिस ऑफिसर संजीव कुमार को थप्पड़ मारा था. इस थप्पड़ कांड के बाद शहाबुद्दीन पहली बार सुर्खियों में आये. इस घटना के बाद पुलिस और शहाबुद्दीन के समर्थकों में झड़प हुई. झड़प के दौरान गोलीबारी हुई. इस घटना में 10 लोग मारे गये. इस मुठभेड़ के बाद से शहाबुद्दीन की गिनती बाहुबली नेताओं में होने लगी.
साल 2003 में सीपाआई -माले के कार्यकर्ता मुन्ना चौधरी की हत्या और अपहरण का आरोप लगा. एक साल बाद शहाबुद्दीन पर गिरिश राज और सतीश राज की हत्या का आरोप लगा.2006 में शहाबुद्दीन पर जेल में अवैध रूप से मोबाइल रखने का आरोप लगा. शहाबुद्दीन की अपराधिक गतिविधियों को लेकर लगे आरोपों की सूची काफी लंबी है. उनपर 49 मामले दर्ज हुए. 1996 में एसपी एसके सिंघल पर हमला करने के मामले में सीवान कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई.
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इनपुट: ललित/ अमित (भागलपुर)
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