Bhagalpur news कमजोर बच्चों को निपुण बनाने में 63 स्कूलों की रुचि कम

Updated at : 08 Feb 2025 12:03 AM (IST)
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Bhagalpur news कमजोर बच्चों को निपुण बनाने में 63 स्कूलों की रुचि कम

कमजोर बच्चों को निपुण बनाने में 63 स्कूलों में रुचि नहीं दिख रही है. गुरुवार को पीयर लर्निंग के तहत जायजा लिया गया, जिसमें यह खुलासा हुआ.

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शुभंकर, सुलतानगंज

कमजोर बच्चों को निपुण बनाने में 63 स्कूलों में रुचि नहीं दिख रही है. गुरुवार को पीयर लर्निंग के तहत जायजा लिया गया, जिसमें यह खुलासा हुआ. इंवॉल्व लर्निंग सॉल्यूशन फाउंडेशन के राहुल दा ने प्रभात खबर से विशेष बातचीत में बताया कि 63 स्कूलों का डाटा नहीं आ रहा है. स्कूल प्रधान को निर्देशित किया गया है. सुलतानगंज से 99 स्कूलों का ही डाटा आ रहा है. पीयर लर्निंग कार्यक्रम सभी प्राथमिक और मवि में चलाया जा रहा है. बच्चों का एक ग्रुप बना निपुण लीडर को रोज एक घंटे पढ़ा कमजोर बच्चों को निपुण बनाना है.

सुलतानगंज के दो स्कूल बने मार्गदर्शी स्कूल

सुलतानगंज के दो स्कूलों को मार्गदर्शी स्कूल बनाया गया है. अन्य स्कूल बेहतर कार्य का अनुश्रवण करेंगे. मार्गदर्शी स्कूल में शांति देवी मुरारका बालिका मवि और मवि अकबरनगर को बनाया गया है. शांति देवी मवि में स्कूल प्रधान सुनील गुप्ता ने बताया कि मार्गदर्शी स्कूल बनाने के बाद काफी सुधार हुआ है. निपुण लीडर वर्ग कक्षा का संचालन पीयर लर्निंग के माध्यम से सही से किया जा रहा है. दीक्षा आनंद, साक्षी प्रिया, साक्षी भारती, खुशी कुमारी निपुण लीडर बच्चों में लेवल जीरो से लेवल पांच तक बांट कर निपुण करने को लेकर कई तरह से कार्य कर रहे हैं.

47 बच्चों को अक्षर ज्ञान नहीं

मार्गदर्शी स्कूल बनने के बाद शांति देवी मवि में 47 बच्चे ऐसे थे, जिनको अक्षर ज्ञान नहीं था. छह माह में उन्हें अक्षर ज्ञान करया गया. स्कूल प्रधान सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि अष्टम क्लास के कई ऐसे बच्चे थे, जिन्हें अक्षर ज्ञान नहीं था. लेवल में बांटकर निपुण बनाया जा रहा है. बच्चे खेल-खेल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. मार्गदर्शी स्कूल के बेहतर कार्य से अन्य स्कूल को प्रेरणा लेंगे. इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है. भाषा एवं गणित से जुड़े पाठ्यक्रम पर ग्रुप में कक्षा आयोजित कर लर्निंग में संवादात्मक प्रक्रिया से छात्र एक दूसरे से जुड़ते हैं.

निपुण भारत के उद्देश्य को पूरा करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा हुई.

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