बिहार के विकास दर में कृषि क्षेत्र का योगदान बढ़े, अब इस दिशा में सोचना होगा : राज्यपाल
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 19 Feb 2020 2:56 AM
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भागलपुर/सबौर : बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के छठे दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति सह राज्यपाल फागू चौहान ने विश्वविद्यालय के 274 स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी कोर्स के छात्र-छात्राओं को प्रमाण व मेडल देकर सम्मानित किया. सभा को संबोधित करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि आदिकाल से ही विक्रमशिला की भूमि ज्ञान स्थली के रूप में […]
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भागलपुर/सबौर : बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के छठे दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति सह राज्यपाल फागू चौहान ने विश्वविद्यालय के 274 स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी कोर्स के छात्र-छात्राओं को प्रमाण व मेडल देकर सम्मानित किया. सभा को संबोधित करते हुए कुलाधिपति ने कहा कि आदिकाल से ही विक्रमशिला की भूमि ज्ञान स्थली के रूप में विख्यात रही है.
अंग प्रदेश में 1908 में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गयी. इसका मुख्य उद्देश्य कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान को गति देना था. विश्व में सर्वप्रथम संकर आम की प्रजाति महमूद बहार व प्रभाशंकर 1950 में यहीं विकसित की गयी.
बीएयू देश में पहली संस्था बनी, जहां व्यवस्थित ढंग से चावल पर अनुसंधान कार्य एवं भूमि सर्वेक्षण का कार्य वृहद पैमाने पर आरंभ हुआ. 2010 में बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर की स्थापना हुई. झारखंड व बिहार बंटावारे के बाद बिहार का विकास कृषि आधारित हाे गया. आज राज्य 15 फीसदी की विकास दर से आगे बढ़ रहा है. बिहार के विकास दर में कृषि प्रक्षेत्र का योगदान बढ़े, हमें अब इस दिशा में सोचना चाहिए. बिहार के कृषि विकास में बीएयू महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. वहीं राज्य सरकार द्वारा जन जीवन हरियाली योजना से लाभ मिलेगा.
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