योजना से ही नहीं, विचार में बदलाव लाने पर बचेगा जल, तभी बचेगा जीवन
Updated at : 27 Nov 2019 2:52 AM (IST)
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भागलपुर : सरकारों को सिर्फ योजना बना देने से जल बचाना संभव नहीं हो सकता है. इसके लिए हर मन में एक विचार लाना होगा. जल के बेतरतीब बहाव की पीड़ा मन में उत्पन्न करनी होगी. तभी जल बचेगा और तभी जीवन बचेगा. यह बातें मंगलवार को एक कार्यक्रम में भाग लेने भागलपुर आये जलपुरुष […]
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भागलपुर : सरकारों को सिर्फ योजना बना देने से जल बचाना संभव नहीं हो सकता है. इसके लिए हर मन में एक विचार लाना होगा. जल के बेतरतीब बहाव की पीड़ा मन में उत्पन्न करनी होगी. तभी जल बचेगा और तभी जीवन बचेगा. यह बातें मंगलवार को एक कार्यक्रम में भाग लेने भागलपुर आये जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने प्रभात खबर से कही.
बिहार की मिट्टी में जल पकड़ने की शक्ति : श्री सिंह ने कहा कि बिहार की मिट्टी में जल को पकड़ने की शक्ति है. हम यहां धरती की पेट से पानी निकाल तो रहे हैं, लेकिन उस पेट को भर नहीं रहे हैं. यहां धरती की पेट में पानी भरने का अनुशासन बनाना होगा. इसके साथ-साथ शोषण भी रोकना होगा. लोगों के मन में यह विचार जगाना होगा. लेकिन सरकारें इस मामले में कमजोर हैं.
बाढ़-सुखाड़ से बचना है, तो फ्लो रोकें : राजेंद्र सिंह ने कहा कि बिहार दो आपदाओं से खासा प्रभावित है. पहला बाढ़ और दूसरा सुखाड़. इन दोनों आपदाओं से मुक्ति चाहिए, तो नदी में पानी के फ्लो को कम करना होगा. इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण है हरियाली लाना यानी पौधे लगाना. इससे कटाव रुकेगा और पानी का जमाव बढ़ेगा.
सूखी नदियों को जगाने के लिए करना होगा काम : बिहार में कई नदियां सूख चुकी हैं. कई ऐसी नदियां हैं, जो सिर्फ बारिश के पानी को नदी तक पहुंचाने का काम नाले की तरह कर रही हैं. ऐसी नदियों में सालों भर पानी नहीं टिकता. ऐसी नदियों में फिर से बहाव कैसे हो के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले तो यह जानने की जरूरत है कि ऐसी नदियों में पानी आने का स्रोत क्या था. कहां से पानी निकलता था और बाद में वह नदी के रूप में आ जाता था. उस स्रोत वाली जगह पर धरती की पेट में पानी भराव के साधन जुटाने होंगे.
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