बिना जांचे 20 दिन से शहरवासियों को पानी पिला रहा नगर निगम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :22 Jul 2019 7:07 AM (IST)
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भागलपुर : पैन इंडिया की गड़बड़ियों को ले उससे काम छीनने के 20 दिन बाद भी नगर निगम ने पानी जांचने की व्यवस्था नहीं की है. याद रहे एक जुलाई से पैन इंडिया ने वाटर वर्क्स और अन्य काम छोड़ दिया था. इसके बाद इन कामों की जवाबदेही नगर निगम ने उठायी थी. बुडको के […]
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भागलपुर : पैन इंडिया की गड़बड़ियों को ले उससे काम छीनने के 20 दिन बाद भी नगर निगम ने पानी जांचने की व्यवस्था नहीं की है. याद रहे एक जुलाई से पैन इंडिया ने वाटर वर्क्स और अन्य काम छोड़ दिया था. इसके बाद इन कामों की जवाबदेही नगर निगम ने उठायी थी.
बुडको के अधिकारियों ने कहा था कि नगर निगम पानी की पूरी जवाबदेही लेगा, ताकि पानी की समस्या न हो. पैन इंडिया के अन्य काम के संबंध में कहा गया था कि उसकी व्यवस्था कर ली जायेगी.
इस दौरान यह सवाल भी उठा था कि पैन इंडिया अपने, बुडको और निगम के अधिकारियों की मदद से रोज पानी की जांच करता था, तब लोगों को इसकी सप्लाई की जाती थी, यह प्रक्रिया निगम कैसे पूरी करेगा. हर 15 दिन पर पीएचइडी की मदद से पानी की जांच करायेगा. पर यह दावा भी फेल हो गया. 20 दिन बीत जाने के बाद भी पानी की एकबार भी जांच नहीं हो पायी है. जैसे-तैसे पानी की सप्लाई लोगों को की जा रही है.
जानकारी के अनुसार पानी की गुणवत्ता की जांच बहुत जरूरी है. बाढ़ के दिनों में तो यह और भी जरूरी हो जाता है. पर इसको कराया नहीं जा रहा है. जानकारों के अनुसार पैन इंडिया के समय में भी जब उसके इंजीनियरों की कमी होती थी, तो वह पीएचइडी से पानी की जांच कराता था, पर यह प्रक्रिया भी निगम नहीं कर रहा.
कोई बतानेवाला नहीं कि कब से नियमों का होगा पालन
पहले एजेंसी द्वारा हर दिन पांच बार होती थी पानी की जांच
एजेंसी द्वारा रोजाना ही पांच बार पानी की जांच करायी जाती थी. दो बार बुडको, कंसल्टेंसी और एजेंसी संयुक्त रूप से पानी की जांच एजेंसी के लैब में कराता था.
वहीं तीन बार एजेंसी और कंसल्टेंसी के द्वारा जो पानी इंटक वेल से पोखर में आता था और दूसरा जो पानी ट्रीटमेंट होकर सप्लाइ के लिए जाता था. एजेंसी के बिजनेस हेड ने बताया कि इसके अलावे हर दिन बोरिंग के पानी की भी जांच करायी जाती थी.
जवाब गोलमाेल
निगम के जलकल अधीक्षक हरेराम चौधरी ने कहा कि पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता को पानी की जांच के लिए पत्र भेजा गया है. पानी की जांच हर माह के पहले और तीसरे सप्ताह में करायी जायेगी.
पानी ट्रांसपेरेंट न होना, पानी से गंध आना यह संकेत है कि पेयजल दूषित है. प्रदूषण बोर्ड द्वारा शुद्ध पानी के लिए मानक बनाया गया है. दूसरे राज्यों में प्रतिदिन पानी की जांच की जाती है. कुछ गड़बड़ी मिलने पर इसमें सुधार की जाती है. इस तरह की व्यवस्था नगर निगम को भी करना चाहिए.
डॉ राजीव कुमार सिंह, शिक्षक रसायन विभाग, टीएनबी कॉलेज
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