किडनी के मरीज की जगह टीबी मरीज का कर दिया डायलिसिस
Author Prabhat khabar digital desk
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भागलपुर : जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, भागलपुर (मायागंज अस्पताल) में किडनी के मरीज की जगह टीबी के मरीज की डायलिसिस कर दी गयी है. इतना ही नहीं प्रबंधन द्वारा मामले को दबाने की भी पूरी कोशिश की गयी, पर परिजनों के हंगामा के बाद 24 घंटे बाद मामला प्रकाश में आया, तो अधीक्षक ने […]
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भागलपुर : जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, भागलपुर (मायागंज अस्पताल) में किडनी के मरीज की जगह टीबी के मरीज की डायलिसिस कर दी गयी है. इतना ही नहीं प्रबंधन द्वारा मामले को दबाने की भी पूरी कोशिश की गयी, पर परिजनों के हंगामा के बाद 24 घंटे बाद मामला प्रकाश में आया, तो अधीक्षक ने कार्रवाई की बात कही. जानकारी के अनुसार मेडिसिन विभाग में भरती किडनी के मरीज उमेश यादव को डायलिसिस करने की सलाह चिकित्सकों ने दी थी.
इसकी तैयारी की जा रही थी, पर लापरवाही में जगदीशपुर निवासी उमेश के बगल के बेड पर लेटे टीबी का इलाज करा रहे सबौर निवासी दिनेश तांती को मंगलवार को डायलिसिस टेबल पर ले जाकर लिटा दिया गया. जानकारों के अनुसार इस दौरान दिनेश कहता रह गया कि उसे टीबी है, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया. डायलिसिस के बाद जब उसकी हालत खराब हो गयी तो परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया. इस पर सबने मामले को दबाने की कोशिश की, पर परिजन चुप नहीं हुए.
मामला प्रकाश में आने पर अस्पताल अधीक्षक डॉ आरसी मंडल ने इसकी जांच की और मामले को सही पाया. उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषियों पर कार्रवाई की जायेगी. दूसरी ओर मामले के सामने आने पर संबंधित सभी लोगों ने चुप्पी साध ली है. कोई भी जवाबदेही लेने को तैयार नहीं. इधर, डायलिसिस नहीं होने से उमेश की हालत खराब होती जा रही है. उसके परिजन बार-बार डायलिसिस कराने को कह रहे थे, पर बुधवार को भी उसका डायलिसिस नहीं हो पाया. इस कारण उसके परिजन परेशान हैं.
चिल्लाता रहा टीबी मरीज : हमै नाय छिओ, हमरा टीबी छय, पर नहीं सुना किसी ने
हाल मायागंज अस्पताल का
परेशान है मरीज व परिजन हो सकता है साइड इफेक्ट
बोले अधीक्षक : दोषियों को नहीं छोड़ेंगे, कार्रवाई तय
बोले चिकित्सक : साइड इफेक्ट की है आशंका
24 घंटे मामले को छुपाये रखा प्रबंधन ने, नहीं माने परिजन तो हुआ खुलासा
आसपास में था किडनी पीड़ित उमेश व टीबी मरीज दिनेश का बेड
क्या है मामला : मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग में 34 नंबर बेड पर भर्ती उमेश यादव जगदीशपुर कोला-नारायणपुर के रहनेवाले हैं. उनका डायलिसिस कराना है. उनकी जगह सबौर घोषपुर निवासी टीबी मरीज दिनेश तांती (70) को लाकर सुला दिया गया. दरअसल उमेश यादव के बगल में ही दिनेश तांती का बेड था. उमेश यादव की किडनी खराब हो गयी थी. उमेश के छोटे-छोटे बच्चे हैं. पत्नी किरण देवी ने बताया कि मंगलवार को ही डायलिसिस होना था, लेकिन बुधवार को भी नहीं कराया गया.
तो फिर क्या काम बीएचटी का : जब कभी कोई मरीज मेडिकल अस्पताल में भर्ती होता है, तो उसका बीएचटी बनता है. इसमें मरीज से संबंधित पूरी जानकारी, रोग की जानकारी और इलाज की प्रगति व दवा का नाम होता है. उसी के आधार पर इलाज होता है, पर मेडिकल अस्पताल में इस नियम का पालन ठीक से नहीं होता. इस घटना से इस बात का खुलासा होता है. अगर बीएचटी देख कर इलाज किया जाता तो उक्त मरीज के साथ ऐसा नहीं होता.
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