झोपड़पट्टी में रहनेवाली भागलपुर की अल्पना को मिला 10वां स्थान

Updated at : 20 Jun 2014 6:46 AM (IST)
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झोपड़पट्टी में रहनेवाली भागलपुर की अल्पना को मिला 10वां स्थान

आइआइटी-जेइइ एडवांस का रिजल्ट घोषित भागलपुर : गुरुवार को जेइइ एडवांस का रिजल्ट प्रकाशित हुआ. इसमें भागलपुर के दो बच्चों ने धमाल मचा दिया. झोपड़पट्टी में पली-बढ़ी नि:शक्त अल्पना भूषण सिंह ने ओबीसी कोटा में देश में 10वां स्थान प्राप्त किया, जबकि बायें पांव से नि:शक्त (पोलियो के कारण) और गांव में पले बढ़े मनीष […]

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आइआइटी-जेइइ एडवांस का रिजल्ट घोषित

भागलपुर : गुरुवार को जेइइ एडवांस का रिजल्ट प्रकाशित हुआ. इसमें भागलपुर के दो बच्चों ने धमाल मचा दिया. झोपड़पट्टी में पली-बढ़ी नि:शक्त अल्पना भूषण सिंह ने ओबीसी कोटा में देश में 10वां स्थान प्राप्त किया, जबकि बायें पांव से नि:शक्त (पोलियो के कारण) और गांव में पले बढ़े मनीष कुमार ने इसी कोटे में 77वां स्थान हासिल किया है. दोनों बच्चे पिछले दो साल से भागलपुर के गुरुकुल शिक्षण संस्थान में इंजीनियरिंग कॉलेजों की प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे.

वहीं डीपीएस, भागलपुर के छात्र नवनीत नितेश ने जेइइ एडवांस के एसटी कोटा में आठवां स्थान प्राप्त किया. नवनीत को मेन कोटा में 3850 रैंक मिला.भागलपुर को गौरवान्वित करने की है तमन्ना : आर्थिक रूप से काफी कमजोर मनीष के परिवार की स्थिति देख गुरुकुल प्रबंधन ने मनीष को न केवल नि:शुल्क कोचिंग दी, बल्कि उन्हें हॉस्टल की सुविधा भी मुफ्त में उपलब्ध करायी. अल्पना के पिता प्रमोद कुमार सिंह व मनीष के पिता उमेश प्रसाद यादव अपने बच्चों की सफलता से गदगद थे. गुरुकुल में दिन भर मिठाइयां बंटी. दोनों ही बच्चों ने बताया कि वे देश की सेवा में खुद को समर्पित करेंगे. अपनी पहचान स्थापित कर भागलपुर को गौरवान्वित करेंगे. अल्पना मूल रूप से मदारगंज के रतनपुर की रहनेवाली है और वर्षो से खंजरपुर के समीप जवाहरलाल चिकित्सा महाविद्यालय की जमीन पर बनी झोपड़पट्टी में रह रही थीं.

फरवरी में न्यायालय के आदेश के बाद झोपड़पट्टी हटा दी गयी थी. फिलहाल वह अपने माता-पिता व भाइयों के साथ किराये के मकान में रह रही हैं. अल्पना के पिता कुरियर का काम करते हैं. मनीष कुमार नाथनगर प्रखंड मुख्यालय से लगभग छह किलोमीटर दूर किशनपुर दिग्घी पोखर गांव के रहनेवाले हैं. उसके पिता गांव में ही छोटे-छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर घर की रोजी-रोटी का इंतजाम करते हैं.

शुरू से प्रतिभाशाली थे दोनों : गुरुकुल के प्रशासनिक निदेशक मनीष कुमार सिंह व एकेडमिक निदेशक राजीव नयन ने बताया कि दोनों ही बच्चे शुरू से प्रतिभाशाली रहे हैं. जब इन बच्चों का नामांकन लिया जा रहा था, उसी समय इनमें कुछ कर गुजर जाने की प्रतिभा झलक रही थी. संस्थान के शिक्षकों ने सभी बच्चों पर खूब मेहनत की. आज इनकी सफलता पर भागलपुर का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है. निदेशक द्वय ने बताया कि इन बच्चों ने जो खुशी दी है, उसे व्यक्त कर पाना मुश्किल है. इसी तरह वर्ष 2012 में एक बढ़ई का पुत्र वरुण कुमार व वर्ष 2013 में आर्थिक रूप से काफी कमजोर अभिनंदन ने जेइइ में सफलता पायी थी. आज वरुण आइएसएम धनबाद और अभिनंदन आइआइटी गुवाहाटी में पढ़ाई कर रहे हैं. इन दोनों बच्चों को भी गुरुकुल ने नि:शुल्क शिक्षा दी थी.

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