अमृतसर हादसा : बीच भाषण फटने लगा रावण, जब तक हम समझ पाते उजड़ चुका था आशियाना

Updated at : 22 Oct 2018 8:58 AM (IST)
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अमृतसर हादसा : बीच भाषण फटने लगा रावण, जब तक हम समझ पाते उजड़ चुका था आशियाना

सबौर निवासी राकेश कुमार की जुबानी, हादसे की आंखों देखी भागलपुर : मंच पर कांग्रेस नेत्री नवजोत कौर सिद्धू, प्रधान समेत दर्जनों लोग बैठे थे. माइक पर नेता भाषण दे रहे थे. अचानक अस्सी फुट लंबा रावण पटाखे के साथ जलने लगा. हमलोग मंच के पास खड़े थे. पटाखे और रावण की आग से बचने […]

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सबौर निवासी राकेश कुमार की जुबानी, हादसे की आंखों देखी
भागलपुर : मंच पर कांग्रेस नेत्री नवजोत कौर सिद्धू, प्रधान समेत दर्जनों लोग बैठे थे. माइक पर नेता भाषण दे रहे थे. अचानक अस्सी फुट लंबा रावण पटाखे के साथ जलने लगा. हमलोग मंच के पास खड़े थे. पटाखे और रावण की आग से बचने के लिए भागने लगे, तभी तेज आवाज के साथ कुछ पल में पटरी से दो ट्रेनें गुजर गयीं. भगदड़ के बाद अपने परिवार के भाई, भतीजे और भाभी की तलाश में हम जोड़ा फाटक के समीप किराये के कमरे तक गये.
वहां हमें कोई नहीं मिला. पटरी पर बिखरी लाश के बीच हम अपने परिवार को खोजने लगे. यह कहना था अमृतसर हादसे में बाल-बाल बचे सबौर निवासी राकेश कुमार का. आगे ये कहते हैं नवजोत कौर छह बजे आयी थीं, सात बजे तक भाषण जारी था. भाषण के बीच अचानक किसी ने रावण में आग लगा दी. तेज आवाज गूंज रहा था. आवाज थमते ही हमारा सब कुछ तबाह हो चुका था. सरकारी अस्पताल में भाभी आरती देवी को ले जाया गया, जहां उनका इलाज हो रहा है. चिकित्सक लगातार आ रहे हैं दवा, जांच मुफ्त हो रही है. हादसे मेंं मृत जितेंद्र दास और एक साल के इनके पुत्र शिवम का पोस्टमार्टम हो चुका है. शव को सुरक्षित अस्पताल में ही रखा गया है. जितेंद्र के परिवार वाले छह बजे तक जोड़ा फाटक आ चुके हैं. मिल-जुल कर लाश का अंतिम संस्कार यहीं करना है या भागलपुर लेकर जाना है इसका निर्णय लेंगे.
आखिर की भूल होलय दुर्गा मैया
सबौर प्रखंड के ममलखा चायचक में शुक्रवार की देर शाम रावण का पुतला दहन हो रहा था, वहीं महादलित टोले में दिल दहलाने वाली घटना की सूचना मिलते ही कोहराम मच गया. पिता-पुत्र के एक साथ हादसे में हुई मौत से मृतक के माता-पिता और बहन दहाड़ें मारकर रो रहे थे. परिजनों का कहना है कि पांच माह पूर्व परिवार के साथ दिवाली में आने को कह गया था, लेकिन भगवान को यह मंजूर नहीं था. आखिर की भूल होलय दुर्गा मैया. उक्त बातें कह मां विलाप कर रही थी. शालीग्राम यादव के दो पुत्रों में वह छोटा है. परिवार में दोनों भाई मजदूरी करते थे.
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