बीएयू सहित कृषि विभाग के खाली पदों पर बहाली जल्द
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Aug 2018 7:09 AM (IST)
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भागलपुर : बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के आठवें स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन सोमवार को बिहार के कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने किया. बतौर मुख्य अतिथि कृषि मंत्री ने किसान विज्ञान कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि जल्द ही बीएयू समेत कृषि विभाग के खाली पदों के […]
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भागलपुर : बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के आठवें स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित राष्ट्रीय किसान विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन सोमवार को बिहार के कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने किया. बतौर मुख्य अतिथि कृषि मंत्री ने किसान विज्ञान कांग्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि जल्द ही बीएयू समेत कृषि विभाग के खाली पदों के लिए बहाली की जायेगी. वह बिहार के सभी कृषि विश्वविद्यालय, कृषि कॉलेज, कृषि विज्ञान केंद्र व कृषि विभाग की बहाली के लिये कैबिनेट से स्वीकृति लेंगे.
उन्होंने कहा कि कृषि कार्य में लगे किसानों के लिए मौसम परिवर्तन सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है. सुखाड़, बाढ़, पाला, ओलावृष्टि व बेतहाशा तापमान वृद्धि में कैसे अनाज, सब्जी व फल का उत्पादन हो. इस कार्य में कृषि वैज्ञानिकों को आशातीत सफलता मिल रही है. उन्होंने कहा कि बिहार की 89 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है. वहीं 76 प्रतिशत आबादी कृषि कार्य पर आश्रित है. बिहार सरकार द्वारा कृषि रोड मैप लागू करने के बाद 2013 में गेहूं, 2014 में चावल व 2016 में मक्का के बंपर पैदावार के बाद केंद्र सरकार से पुरस्कार मिला. उन्होंने बिहार कृषि विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि दूसरी हरित क्रांति लाने में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
कुलपति डॉ अजय कुमार सिंह के प्रयास से कतरनी धान, जर्दालु आम व मगही पान को भौगोलिक सूचकांक का दर्जा मिला. जल्द ही शाही लीची व मखाना को भी जेई टैग मिलेगा. फिलहाल देश के 80 कृषि विश्वविद्यालयों में बीएयू की रैंकिग 21वीं है. अगले कुछ सालों में यहां के वैज्ञानिक और किसान मिलकर इसे 10वीं रैंकिंग दिलायेंगे.
भागलपुर सहित 17 जिलों में जल संरक्षण के लिए तालाब व चेक डैम बनेंगे : कृषि मंत्री ने कहा कि भागलपुर व बांका समेत दक्षिण बिहार के 17 जिलों में जल संरक्षण के लिए नये तालाब, चेक डैम बनाये जायेंगे. पुराने कुएं व बांध की मरम्मत कर बारिश के पानी को जमा किया जायेगा. इस पहल के लिये नाबार्ड से सहयोग मिल रहा है. बिहार सरकार को आर्थिक मदद देने के लिए नाबार्ड तैयार है. इस पहल से दक्षिणी बिहार में सूखे की समस्या से हद तक निजात मिलेगी. इजराइल जैसा ड्रिप सिंचाई योजना भी बिहार में लागू होगा.
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