अंकेक्षण पर भी उठने लगे सवाल, कई निशाने पर

Updated at : 30 Jul 2018 6:35 AM (IST)
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अंकेक्षण पर भी उठने लगे सवाल, कई निशाने पर

भागलपुर : राज्य के बहुचर्चित सृजन घोटाला मामले में विभिन्न सरकारी विभाग की राशि का घोटाला होने के बाद अंकेक्षण हुआ था. लेकिन इस मामले में किसी अंकेक्षक ने प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की. लिहाजा अब अंकेक्षकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकनी शुरू हो गई है. अभी तक दो अंकेक्षक निलंबित किये जा चुके हैं, […]

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भागलपुर : राज्य के बहुचर्चित सृजन घोटाला मामले में विभिन्न सरकारी विभाग की राशि का घोटाला होने के बाद अंकेक्षण हुआ था. लेकिन इस मामले में किसी अंकेक्षक ने प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की. लिहाजा अब अंकेक्षकों पर भी कार्रवाई की तलवार लटकनी शुरू हो गई है. अभी तक दो अंकेक्षक निलंबित किये जा चुके हैं, जबकि इनमें एक अंकेक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है.
सूत्रों के अनुसार इस मामले में कई और अंकेक्षक भी सरकार के निशाने पर हैं. जिला प्रशासन द्वारा करायी गयी प्राथमिकी में भी इस बात का जिक्र है कि, संबंधित विभाग या शाखा के अंकेक्षण के दौरान अंकेक्षक ने कभी कोई आपत्ति नहीं जतायी. जिला नजारत का अंकेक्षण कार्य मार्च 2015 तक महालेखाकार, बिहार की टीम द्वारा किया गया. भू-अर्जन शाखा का अंकेक्षण कार्य मार्च 2017 तक महालेखाकार की टीम द्वारा किया गया.
इससे पहले भू-अर्जन शाखा का दिसंबर 2015 में अंकेक्षण महालेखाकार की टीम ने किया था. जिला शहरी विकास अभिकरण कार्यालय का अंकेक्षण सितंबर 2016 में महालेखाकार, बिहार द्वारा किया गया. लेकिन इसपर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गयी थी.
दूसरी ओर घटनाक्रम पर नजर डालें, तो 16 दिसंबर 2003 से लेकर 31 जुलाई 2017 तक घोटालेबाज नजारत के खजाने को लूटते रहे. चार साल बाद वर्ष 2007 में इसी शाखा में सृजन की नजर दूसरी योजनाओं पर पड़ गयी.
दंगा पीड़ितों को मिलनेवाली पेंशन और उर्दू भाषी विद्यार्थियों को राज्य सरकार की ओर से दी जानेवाली प्रोत्साहन राशि का घोटाला कर लिया. साल 2013 में ही सृजन ने दूसरे जिले की ओर रूख किया. पहले सहरसा भू-अर्जन कार्यालय को अपने को टारगेट में लिया और 2017 तक लक्ष्य साधने में संस्था लगी रही. सहरसा के बाद भागलपुर में भू-अर्जन कार्यालय, फिर नगर विकास योजना, इसके बाद जिला ग्रामीण विकास योजना, फिर बच्चों की छात्रवृत्ति और आखिर में स्वास्थ्य विभाग को भी नहीं छोड़ा.
अभी तक की कार्रवाई
सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर का अंकेक्षण करनेवाले तत्कालीन अंकेक्षण पदाधिकारी अरविंद कुमार अजय को निलंबित कर दिया है. वर्तमान में अरविंद कुमार अजय पूर्णिया की सहयोग समितियां के अंकेक्षण पदाधिकारी हैं. उनपर आरोप है कि, अंकेक्षण कार्य में अजय ने घोर लापरवाही बरती थी. आदेश का उल्लंघन किया था. उनपर कर्तव्यहीनता, अनुशासनहीनता और वित्तीय अनियमितता में संलिप्तता का भी आरोप लगा है.
इस कारण बिहार सरकार के सहकारिता विभाग के उपसचिव, निगरानी राजेंद्र राम ने उन्हें निलंबित कर दिया है. भागलपुर की सहयोग समितियां के तत्कालीन अंकेक्षण पदाधिकारी कृष्णकांत वर्मा को निलंबित करने के बाद, उनके खिलाफ आरोप-पत्र गठित कर विभागीय कार्यवाही शुरू करने का निर्देश सहकारिता विभाग ने गत 13 जुलाई को दिया था.
25 एमएम हुई बारिश, शहर हुआ सराबोर
भागलपुर. भागलपुर में 24 घंटे के अंदर 25 एमएम बारिश हुई. एक ओर जहां किसानों के चेहरे खिल गये हैं तो दूसरी ओर पूरा शहर पानी-पानी हो गया है. रविवार को शहर के ब्लैक स्पॉट लोहिया पुल, शीतला स्थान चौक, लोहापट्टी के अलावा आदमपुर चौक समीप सीएमएस स्कूल के सामने एवं आकाशवाणी चौक पर समेत शहर के विभिन्न गली-मोहल्ले में जलजमाव की समस्या बढ़ गयी. मौसम विभाग की मानें तो चार अगस्त तक लगातार बारिश की संभावना है.
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