सबौर सड़क ना ले-ले जान
Updated at : 29 Jul 2018 5:56 AM (IST)
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भागलपुर : जीरोमाइल से कहलगांव तक जर्जर हो चुकी एनएच 80 के निर्माण की मांग पर इंजीनियरिंग छात्रों के प्रदर्शन के बीच स्कूल से लौट रहे सैकड़ों बच्चे और उनके अभिभावक दिनभर खूब परेशान हुये. दोपहर एक बजे से स्कूलों में छुट्टी होने लगी, लेकिन बच्चे स्कूल वैन व ऑटो में बैठे जाम में फंसे […]
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भागलपुर : जीरोमाइल से कहलगांव तक जर्जर हो चुकी एनएच 80 के निर्माण की मांग पर इंजीनियरिंग छात्रों के प्रदर्शन के बीच स्कूल से लौट रहे सैकड़ों बच्चे और उनके अभिभावक दिनभर खूब परेशान हुये. दोपहर एक बजे से स्कूलों में छुट्टी होने लगी, लेकिन बच्चे स्कूल वैन व ऑटो में बैठे जाम में फंसे रहे. एक घंटे तक जाम में फंसने के बाद आंदोलन की सूचना पर सैकड़ों अभिभावक अपने बच्चों को लेने बारिश में भीगते हुए प्रदर्शन स्थल के पास जा पहुंचे.
अभिभावकों ने प्रदर्शनकारियों से खूब जिरह की, ताकि स्कूल वैन को आगे बढ़ने दिया जा सके. लेकिन प्रदर्शन कर रहे छात्र टस से मस नहीं हुये. डीएवी के छात्र मनीष की मां सीमा झा ने बताया कि, प्रदर्शन के कारण कीचड़ और जलजमाव में चलकर बच्चों को घर ले जा रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग भी जायज है. मेरा घर सबौर में है. स्कूल आने-जाने के दौरान भय लगा रहता है कि, गड्ढे में स्कूल वैन पलट न जाये. जबतक बच्चा घर पर नहीं पहुंच जाता है, मन में कई तरह की आशंकाए तैरती रहती है.
लैलख स्थित एक निजी स्कूल से पढ़कर ऑटो से वापस लौट रही दूसरी कक्षा के छात्रा भाव्या के पिता समीर चौधरी ने बताया कि, घर वाले कहते हैं कि जबतक सड़क नहीं बन जाती, बच्चे को स्कूल न भेजें. कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
इंजीनियरिंग के छात्रों ने कहा एडमिशन करा फंस गये
सड़क पर आंदोलन कर रहे मुजफ्फरपुर निवासी व इंजीनियरिंग छात्र अभिषेक व नालंदा निवासी अमित ने बताया कि अगर फीस कम नहीं रहता तो यहां एडमिशन बिल्कुल नहीं कराते. यहां आने के बाद कॉलेज तक की सड़क और हर साल बारिश में आने वाली बाढ़ का प्रकोप सभी छात्रों को झेलना पड़ता है. दो महीने तक क्लास सस्पेंड रहता है. बातचीत में अधिकांश छात्रों ने बताया कि यहां एडमिशन लेकर हम फंस गये हैं.
42 हजार गाड़ियां रोज चलती हैं सिक्स लेन जरूरी
छात्रों से वार्ता के लिये पहुंचे एनएच के कार्यपालक अभियंता राजकुमार ने बताया कि नियमानुसार अगर किसी सड़क होकर 5 हजार वाहनें रोजाना गुजरती है, तो उसे फोर लेन में तब्दील करना हाेता है. यहां से रोजाना 42 हजार वाहनें चलती हैं. जबकि सड़क महज 5 मीटर चौड़ी है. इस समय सात मीटर चौड़ी सड़क बनायी जा रही है. वाहनों के दबाव को देखते हुए इसे हर हाल में फोर या सिक्स लेन में तब्दील करना जरूरी हो गया है.
इंजीनियरिंग कॉलेज के पास एनएच- 80 का हाल
10.59 करोड़ से बनी है यह सड़क
साल 2014 : लोहिया पुल से इंजीनियरिंग कॉलेज तक सात किमी में सड़क बनी.
साल 2014-2017 : मेंटेनेंस नहीं हुआ. जबकि ठेकेदार को ही इस सड़क का मेंटनेंस करवाना होता है.
साल 2017 : वीआइपी के आने पर मिट्टी डालकर चलने लायक सड़क बनाने की होती रही कोशिश
साल 2018 : बिना टेंडर फाइनल हुए बड़हिया के ठेकेदार से शुरू कराया काम, सात दिन में छीन लिया वर्क. छठी बार के टेंडर में मुंगेर के ठेकेदार को 22 जून से सड़क बनाने की मिली जिम्मेदारी
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