बिना तैयारी के जीएसटी कर दिया लागू, जनता व व्यापारी दोनों परेशान
Updated at : 01 Jul 2018 5:40 AM (IST)
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भागलपुर : पिछले साल एक जुलाई को देश में जीएसटी लागू हुआ था. इसे लागू हुए एक साल पूरा हो चुका है. इस बीच जीएसटी के लागू होने पर बहुत सारी अच्छाइयां व बहुत सारी बुराइयां सामने आयी. बिना तैयारी के जीएसटी को लागू करने से व्यापारी से लेकर आम लोग तक परेशान दिखे. रेस्टोरेंट […]
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भागलपुर : पिछले साल एक जुलाई को देश में जीएसटी लागू हुआ था. इसे लागू हुए एक साल पूरा हो चुका है. इस बीच जीएसटी के लागू होने पर बहुत सारी अच्छाइयां व बहुत सारी बुराइयां सामने आयी. बिना तैयारी के जीएसटी को लागू करने से व्यापारी से लेकर आम लोग तक परेशान दिखे.
रेस्टोरेंट में खाना, बाइक-कार व इलेक्ट्रॉनिक आइटम के दाम में कमी आयी, तो बैंकिंग सेवा, भवन निर्माण, कोरियर सर्विस, बीमा सेवा आदि महंगे हुए. उक्त बातें विभिन्न सेक्टर के व्यवसायी, उद्यमी व व्यवसायी प्रतिनिधियों ने शनिवार को कचहरी चौक के समीप इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन कार्यालय में कही.
मौका था प्रभात खबर की ओर से देश में जीएसटी लागू करने के एक वर्ष पूरा होने पर परिचर्चा की.देश की अर्थव्यवस्था को देखकर नहीं किया लागू: परिचर्चा में इस्टर्न बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप झुनझुनवाला ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि सरकार की जो मनसा थी एक देश, एक कर प्रणाली के मद्देनजर जीएसटी लागू किया. इसके पहले एक ही वस्तु पर कई तरह के कर लगाये जाते थे, इससे उस वस्तु की कीमत बढ़ जाती थी.
जीएसटी की रूपरेखा 2003 में ही तैयार हाे गयी थी, लेकिन भारत जैसे देश की अर्थव्यवस्था को देखकर लागू नहीं किया गया. भारत अभी इस कर प्रणाली को सफलतापूर्वक निभा पाने में परिपक्व नहीं है. फिर भी किसी तरह जुलाई 2017 को हड़बड़ी में बिना ठोस वजह के लागू कर दिया गया.
पुरानी शराब को नयी बोतल में रखने जैसा हो गया जीएसटी: महासचिव आलोक अग्रवाल ने कहा कि यदि कोई व्यापारी कई प्रांतों में व्यापार करना चाहता है, तो प्रत्येक प्रांत का जीएसटी नंबर लेना पड़ेगा. जैसे कोई रियल इस्टेट कंपनी है, उन्हें कई प्रांतों का जीएसटी नंबर लेना पड़ रहा है. यह हास्यास्पद लग रहा है. छोटे-मंझोले व्यापारियों पर भी जीएसटी के रिटर्न भरने की खानापूर्ति का अतिरिक्त बोझ पड़ गया. जीएसटी पुरानी शराब को नयी बोतल में रखने जैसा हो गया है.
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