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भागलपुर : आदमपुर स्थित बंगीय साहित्य परिषद में रविवार शाम को रवीन्द्र उत्सव सह वार्षिक सांस्कृतिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कोलकाता से रवीन्द्र पुरस्कार प्राप्त लेखक, गायक व कैंसर रोग विशेषज्ञ डाॅ. शंकर कुमार नाथ शामिल हुये. वहीं तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व […]

भागलपुर : आदमपुर स्थित बंगीय साहित्य परिषद में रविवार शाम को रवीन्द्र उत्सव सह वार्षिक सांस्कृतिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कोलकाता से रवीन्द्र पुरस्कार प्राप्त लेखक, गायक व कैंसर रोग विशेषज्ञ डाॅ. शंकर कुमार नाथ शामिल हुये. वहीं तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डाॅ देवब्रत गांगुली विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे.
मुख्य कार्यक्रम का आरंभ दीप-प्रज्ज्वलन के साथ हुआ जिसकी अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष डाॅ. विश्वपति चटर्जी ने की. मुख्य अतिथि ने अपने वक्तव्य में कहा कि बांग्ला साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में बंगीय साहित्य परिषद का एक विशिष्ट स्थान है और यहां उपस्थित होना उनके लिए सौभाग्य की बात है. उन्होंने स्वरचित ललिता ओके आज चोले जेते बौलोना व एई तो सेदिन तुमि आमारे बोझाले आदि गीतों की उत्कृष्ट प्रस्तुति से उपस्थित जनों का मन मोह लिया.
परिषद के सदस्यों ने रवींद्र संगीत पेश किया: सांस्कृतिक कार्यक्रम में काकोली सरकार, पायल घोष, रजत दास, प्रतिमा रायचौधरी, सुजय सर्वाधिकारी ने एकल रवीन्द्र संगीत प्रस्तुत किया. परिषद के समूह-गान मंडली द्वारा रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित प्राण भरके, त्रिशा हरके, मुझे और और और दो प्राण गीत प्रस्तुत किया गया. इसमें प्रभाष नियोगी ने तबला पर संगत किया. इस अवसर पर शम्पा देबनाथ तथा कोलकाता की
कवि कृष्ण पाल ने स्वरचित कविता का पाठ किया.
कैंसर से बचाव व रोकथाम की जानकारी दी :लोगों के आग्रह पर डा‍ॅ. शंकरनाथ ने कैंसर से बचाव व रोकथाम से संबंधित जानकारी दी तथा प्रश्नों के उत्तर भी दिए. डाॅ. देवब्रत गांगुली ने अपने वक्तव्य में भारतीय मानस व आदर्श को रेखांकित करने में रवीन्द्रनाथ के बहुमुखी योगदान को श्रद्धांजलि दी. परिषद की ओर से डाॅ शंकर कुमार नाथ तथा डाॅ देवब्रत गांगुली को साहित्य व संस्कृति में उनके योगदान के लिए मान-पत्र देकर सम्मानित किया गया. अतिथियों का स्वागत करते हुए परिषद के सचिव अंजन भट्टाचार्य ने कहा कि भागलपुर की विशिष्ट साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के संरक्षण- परिवर्धन के लिए बंगीय साहित्य परिषद भागलपुर शाखा सन 1905 से ही प्रमुख योगदान दे रहा है. कार्यक्रम के आयोजन में देवदास आचार्य, प्रभाष चन्द्र घोष, मृत्युंजय चक्रवर्ती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इस अवसर पर प्रतिमा शर्मा, सुजाता शर्मा, जयंत घोष, रतन साहा, शौभिक मुखर्जी, परिमल बनिक, स्नेहेश बागची, डाॅ. अमिता मोईत्रा, चंदन सिन्हा आदि उपस्थित थे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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