भागलपुर में जमीन दलालों की करतूत, 10 वर्षों में दस गुना बढ़ा दी शहर की जमीन-प्रॉपर्टी की कीमत

Updated at : 04 Dec 2022 4:55 AM (IST)
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भागलपुर में जमीन दलालों की करतूत, 10 वर्षों में दस गुना बढ़ा दी शहर की जमीन-प्रॉपर्टी की कीमत

Bhagalpur news: जमीन के कारोबारी पहले जमीन के मालिक से एग्रीमेंट करा लेते हैं. बड़े कारोबारी इसमें कम से कम तीन और अधिक से अधिक 10 प्रतिशत तक का अपना कमीशन रखते हैं. फिर सौदा तय करते हैं.

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भागलपुर: कोई निवेश नहीं, बस झूठ को सच बोलने की कला और कमाई करोड़ों में. जी हां, बीते एक-डेढ़ दशक के दौरान सिल्क सिटी भागलपुर में एक नया धंधा परवान चढ़ता गया है. धंधा है-जमीन की दलाली का. देखते-देखते दलालों ने जमीन की कीमत इस कदर आसमान चढ़ा दी कि साधारण लोग शहर में जमीन खरीदने का सपना देखना ही छोड़ दिये हैं.

शून्य निवेश से शुरू इस धंधे से होनेवाले मुनाफे का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कल तक जो लोग मोटरसाइकिल में पेट्रोल तक भराने के लिए सौ बार सोचते थे, आज वे लोग फॉर्च्यूनर और सफारी की सवारी करते हैं. राजनीति की दशा-दिशा तय करते हैं. रसूखदार बने हुए हैं. जमीन-प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री के धंधे में कितना पैसा है, इसका अंदाजा रजिस्ट्री ऑफिस से मिले इस आंकड़े से लगाया जा सकता है कि बीते छह वर्षों में भागलपुर जिले में 83,56,96,44,569 (83.56 अरब) रुपये की 80,694 जमीन-प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री हुई है.

इसमें बड़ा हिस्सा भागलपुर शहर व आस-पास के इलाके का है. रजिस्ट्री ऑफिस में दर्ज इस आंकड़े से इतर तस्वीर कुछ और ही है. जिस जमीन की रजिस्ट्री 20,000 रुपये में दिखायी जाती है, असल में उसकी कीमत दोगुनी होती है. रजिस्ट्री में जमीन की लगभग वही कीमत दर्ज होती है, जो सरकार की ओर से निर्धारित है. खरीद-बिक्री में यह कीमत सीधे डबल हो जाती है.

जमीन के धंधे से जुड़ रहे लोग

शुरुआती दौर में जमीन का कारोबार करने वाले लोग अपने प्रतिद्वंद्वी को हड़काने के लिए दबंगों व अपराधियों का सहारा लेते थे. फिर इन दबंगों-अपराधियों को भी जमीन के धंधे का चस्का लग गया. नतीजा कल तक जो लोग छोटे-मोटे अपराध किया करते थे, उनमें कई चेहरे जमीन के धंधे से जुड़ गये हैं.

दलालों के जरिये जमीन का कारोबार

राजनीति के क्षेत्र में भाग्य आजमानेवाले कई लोग भी अब सीधे जमीन के कारोबार में उतर चुके हैं. कई धनकुबेर तो ऐसे हैं, जिनका पर्दे के पीछे से इस साम्राज्य पर सिक्का चलता है. ऐसे लोग सामने से समाज के हितैषी दिखते हैं, मगर इनके काला धन का इन्वेस्टमेंट दलालों के जरिये जमीन के कारोबार में होता है.

यह बता कर बढ़ायी जाती है जमीन की कीमत

जमीन के कारोबारी भले ही जिस कीमत पर जमीन मालिक से एग्रीमेंट करे, लेकिन इसे बेचने के समय खरीदार के सामने ऐसी लुभावनी बातें बताते हैं कि खरीदार को जमीन हर तरह से बेहतर दिखने लगती है. जमीन बेचने के लिए कारोबारी जमीन का लोकेशन, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन से दूरी, जेएलएनएमसीएच से दूरी, जमीन की कॉमर्शियल वैल्यू को आधार बनाते हैं. बाजार में किसी जमीन की कीमत तब अपेक्षाकृत अधिक बढ़ जाती है, जब उस जमीन के आस-पास शहर के किसी प्रसिद्ध डॉक्टर का आवास या क्लिनिक हो.

छह प्रतिशत कमीशन का खेल

जमीन के कारोबारी पहले जमीन के मालिक से एग्रीमेंट करा लेते हैं. बड़े कारोबारी इसमें कम से कम तीन और अधिक से अधिक 10 प्रतिशत तक का अपना कमीशन रखते हैं. फिर सौदा तय करते हैं. औसतन देखा जाये, तो छह प्रतिशत का कमीशन प्रत्येक जमीन पर कारोबारी ले लेते हैं

इन वजहों से बढ़ी जमीन-प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री

वजह – 01 : शहरी कहलाने की चाहत

पिछले दो दशक के दौरान गांव में रहनेवाले लोगों में शहर में बसने की चाहत बढ़ी है. वे किसी भी कीमत पर शहर में कम से कम एक कट्ठा जमीन भी खरीद लेना चाहते हैं. इसे एक तरह से स्टेटस सिंबल के रूप में भी देखा जाने लगा है. गांव में किसी एक के पास शहर में जमीन होने के बाद दूसरे लोग भी एक छोटा-सा टुकड़ा खरीद लेना चाहते हैं. लोगों के अंदर बढ़ी इसी बेचैनी को जमीन के दलालों ने भांप लिया और जमकर इसका फायदा उठाया और उठा रहे हैं. नतीजा जमीन की कीमतें आसमान छूती गयी हैं और जमीन कारोबारियों के पौ-बारह हो रहे हैं.

वजह-02 : विक्रमशिला सेतु व बाइपास निर्माण

गंगा पर कोई पुल नहीं होने के कारण पहले नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र के लोग भागलपुर में बसने के लिए सोचते भी नहीं थे, जबकि लीची, कलाई और केले की खेती व कारोबार होने के कारण लोगों के पास धन की कोई कमी नहीं थी. 23 जुलाई 2001 को गंगा पर विक्रमशिला सेतु के उद्घाटन हो जाने के बाद लोगों का ध्यान भागलपुर में बसने की तरफ आया. इसके बाद 2018 में बाइपास का निर्माण हो गया. बाइपास के दोनों तरफ बड़े पैमाने पर जमीन की प्लॉटिंग और जमीन की खरीद-बिक्री होने लगी.

वजह-03 : रिटायरमेंट के बाद यहीं बसने की चाह

भागलपुर शहर में विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों नौकरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए लोगों की एक बड़ी जमात ने यहीं बसने का फैसला किया. ऐसे लोगों ने रिटायरमेंट के पैसे का निवेश शहरी जमीन खरीदने और उस पर घर बनाने में किया. खासकर सेना से रिटायर हुए कई लोग भागलपुर में आकर बसे और यहीं पर किसी न किसी संस्थान में नौकरी शुरू कर ली. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए यहां बसे. ऐसे में भागलपुर में घर का किराया बिहार के अन्य शहरों की अपेक्षा अधिक है.

दस वर्षों में बढ़ी कीमत : एक नजर में

  • इलाका : 10 वर्ष पुरानी दर : वर्तमान दर

  • आदमपुर : 6-7 लाख : 25-30 लाख

  • तिलकामांझी : 7-8 लाख : 30-40 लाख

  • बरारी : 5-6 लाख : 20-25 लाख

  • ज्योति विहार : 02 लाख : 20 लाख

  • खलीफाबाग : 25 लाख : 1-1.5 करोड़

  • अलीगंज : 02 लाख : 25 लाख

  • सबौर : 1.25 लाख : 10 लाख

  • (नोट : कॉलोनी की यह दर बातचीत पर आधारित है.)

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के आंकड़े

  • वित्तीय वर्ष : कुल प्रॉपर्टी : कुल कीमत

  • 2017-18 : 11986 : 12,27,40,99,768

  • 2018-19 : 14712 : 15,40,11,20,802

  • 2019-20 : 14667 : 14,07,02,48,078

  • 2020-21 : 13089 : 13,81,63,26,198

  • 2021-22 : 16128 : 17,37,58,65,774

  • अप्रैल से 30 सितंबर, 22 : 10112 : 10,63,19,83,949

  • (नोट : कोरोना के कारण वर्ष 2020-21 में जमीन की बिक्री कुछ घटी.)

खून मांगती जमीन

जमीन के धंधे में बेहिसाब कमाई को देखते हुए बाद के वर्षों में कई और लोग इसमें कूद पड़े. इससे प्रतिस्पर्धा-प्रतिद्वंद्विता का दौर शुरू हुआ. फिर टकराव की स्थिति भी पैदा हुई और शुरू हुआ खूनी संघर्ष का दौर. रातों रात लखपति-करोड़पति बन जाने की होड़ में लोग एक-दूजे के खून के प्यासे भी बनने लगे हैं. हर दो-तीन महीने में किसी न किसी प्लॉटर या प्रॉपर्टी डीलर की हत्या या हमला होने की घटना से शहर में दहशत का माहौल बनता रहा है.

नवंबर 2022 : सुलतानगंज में जमीन कारोबारी अमित कुमार झा को खोजने की मांग अब उग्र होने लगी है. वे आज भी लापता हैं. उनकी हत्या हो जाने की बात सामने आयी है, पर बॉडी अभी तक नहीं मिली है. अमित के परिजनों और ग्रामीणों ने विरोध में सड़क जाम किया और पुलिस प्रशासन का विरोध किया.

सितंबर 2022 : बबरगंज थाना क्षेत्र के कुतुबगंज में 19 सितंबर 2022 को प्लॉटर अमरेंद्र सिंह की हत्या कर दी गयी थी. पुलिस ने बताया था कि अमरेंद्र ने बाइपास पर एक जमीन प्लॉटिंग करने के लिए ली थी. इससे दूसरे प्लॉटरों को काफी नुकसान हो रहा था. इस कारण अमरेंद्र को रास्ते से हमेशा के लिए हटा दिया.

फरवरी 2022 : शहर से सटे सबौर थाना क्षेत्र के धनकर रोड पर अपराधियों ने प्रॉपर्टी डीलर मो इनामुल हक (35) की गोलियों से भून कर हत्या कर दी थी. मो इनामुल हक धनकर गांव के ही रहनेवाले थे. वे जीरोमाइल पेट्रोल पंप से घर लौट रहे थे.

अगस्त 2021 : बरारी थाना क्षेत्र स्थित डीआइजी कोठी के बगल में मोती कोचवान गली में शाम को रकाबगंज के मो रिजवान परवेज (40) की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. परिजनों ने पुलिस को बताया था कि रिजवान ने मिरजानहाट में दो कट्ठा जमीन 72 लाख रुपये में बेची थी. इसके बाद उनके मोबाइल पर कॉल आया. कॉल करने वाले ने 20 लाख रुपये रंगदारी मांगी थी.

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