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चंपारण के दियारावासियों को रेल के क्षेत्र में मिलेगी सौगात: सतीश

Updated at : 25 Jul 2024 8:45 PM (IST)
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चंपारण के दियारावासियों को रेल के क्षेत्र में मिलेगी सौगात: सतीश

17 वर्षों बाद चंपारण के दियारावासियों में एक बार फिर रल लाइन निर्माण की आस जग गयी है.

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नरकटियागंज. 17 वर्षों बाद चंपारण के दियारावासियों में एक बार फिर रल लाइन निर्माण की आस जग गयी है. आने वाले दिनों में बहुप्रतीक्षित रेल परियोजनाओ में से एक छितौनी तमकुही रेल परियोजना के पुन: शुरू होने की पहल तेज हो गयी है. इसकी जानकारी केन्द्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चन्द्र दुबे ने दी है.

मंत्री श्री दुबे ने बताया है कि वें छितौनी तमकुही रेल परियोजना को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मिले और रेल परियोजना के संदर्भ में बात की. उन्होंने बताया कि प्रधान मंत्री जी की विशेष कृपा दृष्टि बिहार प्रदेश पर रहती है और इसी कृपा और स्नेह के प्रतिफल के रूप में बजट 2024 में बिहार को विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं. रेल के क्षेत्र में भी बिहार को अग्रणी बनाने के विचार से सरकार पूरे मनोयोग से काम कर रही है. इसी कड़ी में वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री के द्वारा छितौनी तमकुही रेल लाइन का शिलान्यास किया गया था. यह रेल लाइन पनियहवा से छितौनी होते हुए नारायणी नदी के किनारे-किनारे होते हुए मधुबनी, धनहा, खैरा टोला इत्यादि स्थानों से होकर गुजरेगी तथा कुशीनगर के तमकुहीरोड रेलवे स्टेशन पर कप्तानगंज-थावे रेल लाइन में मिल जाएगी. इस परियोजना में 37.7 लाख घन मीटर मिट्टी के कार्य के साथ साथ 10 बड़े पुलों एवं 47 छोटे पुलों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित था. परियोजना में पनियहवा से 3.35 किमी पर छितौनी, 15.5 किमी पर जटहा, 28.7 किमी पर मधुबनी 35 किमी पर धनहा, 38 किमी पर खैरा टोला व 49.7 किमी पर पिपराही स्टेशन व हाल्ट का निर्माण की रूपरेखा बनाने के साथ ही 62.5 किमी पर अंतिम तमकुहीरोड स्टेशन कल्ड को जंक्शन बनाया जाना प्रस्तावित था. इस रेल लाइन के निर्माण से नारायणी नदी के दक्षिण स्थित बिहार के निवासियों के लिए बड़ी राहत होगी. उन्हें एक तरफ जहां आवागमन की अच्छी सुविधा सुलभ हो जाएगी, वहीं दूसरी ओर साल दर साल आने वाली बाढ़ से भी स्थायी तौर पर बचाव हो जाएगा. यह रेल लाइन एक मजबूत बांध के रूप में भी काम करेगी साथ ही साथ यहां पर्यटन, रोजगार और व्यापार की अपार संभावनाएं बढ़ जाएंगी जिससे समस्त जनता को अत्यधिक लाभ होगा तथा आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को और बल मिलेगा.

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