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वीटीआर सीमावर्ती क्षेत्रों देखा गया ट्विन स्पॉटेड वुल्फ स्नेक, नहीं होता है जहरीला

Updated at : 12 Apr 2025 4:53 PM (IST)
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वीटीआर सीमावर्ती क्षेत्रों देखा गया ट्विन स्पॉटेड वुल्फ स्नेक, नहीं होता है जहरीला

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अब लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है. वन व वन्यजीवों समेत बाघों के लिए मशहूर है.

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हरनाटांड़. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व अब लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है. वन व वन्यजीवों समेत बाघों के लिए मशहूर है. बल्कि यहां कई प्रकार के विषैले और विषहीन सांप भी जंगलों में पाये जाते है. इन्हीं में से एक है ट्विन स्पॉटेड वुल्फ स्नेक जो दुर्लभता और सुंदरता के कारण लोगों का खास ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है. भले ही इस सांप का नाम “वुल्फ स्नेक ” यानी ””””भेड़िया सांप”””” है. लेकिन यह अपने नाम के विपरीत है. यह न तो डरावना होता है और ना ही जहरीला है.एशिया में पाया जाने वाला है यह दुर्लभ सांप

नेचर एनवायरनमेंट वेलफेयर सोसाइटी प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक ने बताया कि वीटीआर के जंगल में साल 2017 में मैंने पहली बार पाया गया था. यह सांप जहरीला नहीं होता और महज 55 सेंटीमीटर तक लंबा होता है. ट्विन स्पॉटेड वुल्फ स्नेक वास्तव में एक आकर्षक और खूबसूरत सांप होता है. इसकी गिनती गैर विषैले सांपों में होती है. नाम भले ही वुल्फ स्नेक हो लेकिन देखने में काफी खूबसूरत होता है. हाल ही में वाल्मीकिनगर के विजयपुर इलाके में एक घर में फिर से इसकी मौजूदगी दर्ज की गयी. वे बताते हैं कि इसकी पहचान दो खास बिंदुओं (स्पॉट्स) से होती है. जो इसे अन्य वुल्फ स्नेक से अलग बनाते हैं. आम लोगों को शायद ही कभी दिखे. उन्होंने बताया कि भारत में इसकी उपस्थिति बहुत सीमित है. यह सांप केवल एशियाई महाद्वीप में पाया जाता है. अब तक इसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ इलाकों में ही देखा गया है. वीटीआर के जंगल में भी मिला है. इसके अलावा यह म्यांमार, वियतनाम और हिमालय की तराई वाले क्षेत्रों में कभी-कभी दिखाई देता है.

वीटीआर में पाए जाते हैं 45 से अधिक प्रजातियों के सांप

वीटीआर के जंगल में लगभग 45 अलग-अलग प्रजातियों के सांपों की मौजूदगी दर्ज की गयी है. इनमें कुछ विषैले सांप जैसे कोबरा, करैत, रसेल वाइपर, पिट वाइपर, आदि शामिल हैं. वहीं गैर विषैले सांपों में रैट स्नेक, कुकरी स्नेक, मॉक वाइपर, रेड सैंड बोआ और लंबी नाक वाला सांप जैसे प्रजातियां पाई जाती हैं.

पर्यटन को मिल रहा है बढ़ावा

यहां हर दिन सैकड़ों पर्यटक पहुंच रहे हैं. आने वाले कुछ पर्यटक जंगल सफारी का लाभ लेते हैं. कुछ लोग खुद जंगल में घूमते हुए ऐतिहासिक मंदिरों तक पहुंचते हैं और पूजा करते हैं. लोग सदाबहार जंगल, पहाड़ी नदी जल, मिट्टी की पहाड़, विशाल पेड़ के नजारे देख खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं. इस समय वाल्मीकिनगर का मौसम भी अन्य शहरों की तुलना में बेहद सुहावना है. जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को वन्यजीवों के दर्शन हो रहे हैं. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SATISH KUMAR

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SATISH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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