चंपारण के भूले-बिसरे क्रांतिकारियों की कहानी होगी मंच पर जीवंत, बेतिया में होगा 'फनिया वध' का मंचन

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पेज4 :ऑडिटोरियम में सजीव होगी क्रांतिकारियों की गाथा, क्रांतिकारी नाटक  "फनिया वध " का कल होगा रोमांचक मंचन

नाटक मंचन का एक दृश्य

चंपारण के स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारी इतिहास पर आधारित चर्चित नाटक 'फनिया वध' का मंचन 15 जुलाई को बेतिया के स्थानीय ऑडिटोरियम में किया जाएगा. यह नाटक नई पीढ़ी को आजादी की लड़ाई में चंपारण के योगदान और गुमनाम क्रांतिकारियों की वीर गाथा से परिचित कराएगा. कार्यक्रम में प्रवेश नि:शुल्क है.

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Bettiah Faniya Vadh Drama: चंपारण के स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारी इतिहास पर आधारित चर्चित नाटक 'फनिया वध' का मंचन 15 जुलाई को स्थानीय ऑडिटोरियम में किया जाएगा. नाटक के माध्यम से आजादी की लड़ाई में चंपारण के योगदान और गुमनाम क्रांतिकारियों की गाथा दर्शकों के सामने प्रस्तुत की जाएगी.

क्रांतिकारियों के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल

नाटक के मंचन को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में जिला कला एवं सांस्कृतिक पदाधिकारी राकेश कुमार ने कहा कि चंपारण की धरती क्रांतिकारियों की भूमि रही है. यहां के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और कई लोगों ने काला पानी जैसी कठोर सजा भी भुगती.

उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी को परिचित कराना जरूरी है, ताकि हमारे वास्तविक नायकों का योगदान इतिहास के पन्नों में दबकर न रह जाए.

चंपारण के कलाकार करेंगे प्रस्तुति

प्रसिद्ध नाटककार डॉ. दिवाकर राय द्वारा लिखित इस नाटक का निर्देशन हरिशंकर रवि कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि संगीत नाटक अकादमी और बिहार कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में यह प्रस्तुति आयोजित की जा रही है.

उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम्' की सार्द्धशती के अवसर पर देशभर में करीब 150 स्थानों पर ऐसे नाटकों का मंचन किया जा रहा है. बेतिया में होने वाली प्रस्तुति में चंपारण के स्थानीय कलाकार हिस्सा ले रहे हैं.

शाम 6 बजे से होगा मंचन, प्रवेश नि:शुल्क

सह-निर्देशक कालिका और संगीत निर्देशक मोहम्मद आसिफ ने बताया कि नाटक का मंचन शाम 6 बजे से स्थानीय ऑडिटोरियम में होगा.

उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में शामिल होकर चंपारण के गौरवशाली इतिहास पर आधारित इस नाट्य प्रस्तुति का आनंद लेने की अपील की. कार्यक्रम में प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा.


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रवि 'रंक'

लेखक के बारे में

By रवि 'रंक'

90 के दशक में विद्यार्थी जीवन से ही रवि 'रंक' के आलेख, निबंध, संस्मरण और कविताएं क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे हैं. हिंदी विषय में स्नातकोत्तर योग्यताधारी रवि 'रंक' ने दैनिक हिंदुस्तान के पटना से प्रकाशित उत्तर बिहार संस्करण के साथ जनवरी 2001 से अपनी पत्रकारिता शुरु की. फरवरी 2020 में हिंदुस्तान से अलग होकर प्रभात खबर के पश्चिम चंपारण संस्करण में बतौर जिला मुख्यालय संवाददाता के रूप में पदस्थापित हैं.

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