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पश्चिम चंपारण जिले ने बनाई अपनी अलग पहचान, जनसेवा ही मेरा सर्वोच्च धर्म: डीएम

Updated at : 10 Apr 2025 9:43 PM (IST)
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पश्चिम चंपारण जिले ने बनाई अपनी अलग पहचान, जनसेवा ही मेरा सर्वोच्च धर्म: डीएम

जिलाधिकारी दिनेश कुमार राय की पश्चिम चंपारण जिले में दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है और वह तीसरे वर्ष में आज शुक्रवार को प्रवेश कर रहे हैं.

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बेतिया. जिलाधिकारी दिनेश कुमार राय की पश्चिम चंपारण जिले में दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण हो चुका है और वह तीसरे वर्ष में आज शुक्रवार को प्रवेश कर रहे हैं. ऐसे में डीएम ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां साझा की हैं. कहा है कि दो वर्षो के कार्यकाल के दौरान उनका करीब छह माह का समय लोकसभा चुनाव की तैयारी एवं चुनाव पूर्ण कराने में बीत गया, लेकिन शेष करीब डेढ़ वर्षों के दौरान जिले में अपनी एक अलग पहचान बना ली है.

जिला सूचना कार्यालय से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, 11 अप्रैल 2023 को जिलाधिकारी का कार्यभार ग्रहण करने वाले दिनेश कुमार राय ने जन सेवा को सर्वोच्च धर्म मानकर काम किया. आज दो साल बाद, उनका कार्यालय आम नागरिकों की आशा का केंद्र बन चुका है. चाहे वह जनता दरबार हो या फील्ड विज़िट, हर पहल ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम की. हर शुक्रवार को आयोजित होने वाला जनता दरबार अब केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जन-संवाद और त्वरित समाधान का प्रतीक बन चुका है. सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं, और उन्हें वहीं जवाब तथा कार्रवाई मिलती है. मधुबनी, पिपरासी, भीतहां और ठकरहा जैसे गंडक पार के सुदूर प्रखंडों में पहुंचकर जिलाधिकारी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार की सुविधाएं सुनिश्चित कीं. सबसे अहम प्रखंड में महाविद्यालय की स्थापना की दिशा में पहल की गई, जिससे इन पिछड़े क्षेत्रों को नई पहचान मिली. बेतिया के प्रशासनिक इतिहास में पहली बार भारत-नेपाल सीमा समन्वय समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई, जो न केवल सीमाई अपराधों की रोकथाम की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई, बल्कि दोनों देशों के बीच संवाद और सौहार्द को भी मज़बूत किया. भूमि विवादों के समाधान में त्वरित कार्रवाई, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कदमों ने बेतिया में सुशासन की नई मिसाल पेश की. प्रॉपर्टी बायर-सैलर सुविधा से आम लोगों को बड़ी राहत मिली. भीतहा के विभव राय की दुखद मृत्यु पर डीएम ने न केवल तत्परता से न्याय सुनिश्चित किया, बल्कि संवेदनशीलता की मिसाल पेश की. उनके प्रयासों से परिजनों को सम्मानजनक मुआवजा और उच्च स्तरीय जांच दिलाई गई. डीएम ने ज़िले में पदस्थ सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को समर्पण और अनुशासन का पाठ पढ़ाया. रोजगार मेला, कौशल विकास प्रशिक्षण, दिव्यांग पहचान अभियान और किसानों के लिए कृषि सहायता जैसे कदमों ने डीएम के समावेशी दृष्टिकोण को उजागर किया. आज जिले के नागरिक कहते हैं “हमें ऐसा डीएम मिला, जो हमारे दुख-सुख में बराबर का भागीदार है”

पौधरोपण पर है जोर

डीएम कार्यालय परिसर, जिला स्कूलों, सामुदायिक भवनों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक हज़ारों पौधों का रोपण कराया गया. यह केवल हरियाली नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए एक पर्यावरणीय विरासत है. जिलाधिकारी के आदेश से महिला समूहों को भूमि आवंटित कर सामूहिक शौचालय और आय आधारित कार्यों की शुरुआत कराई गई. इससे ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छता, सम्मान और आत्मनिर्भरता की राह मिली.

वाल्मीकिनगर को मिली पहचान

एक समय में उग्रवाद और अपराध के लिए कुख्यात वाल्मीकिनगर को डीएम राय ने पर्यावरणीय, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बना दिया. वाल्मीकिनगर महोत्सव, जिसमें मुख्यमंत्री ने भाग लिया, जिले को अंतरराष्ट्रीय पटल पर ले गया. ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देकर प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया गया. शिकायत निवारण प्रणाली में पारदर्शी ट्रैकिंग से आम लोगों को भरोसा और सहूलियत मिली. मैंने बस प्रयास किया है कि पश्चिम चम्पारण जिला उस मुकाम तक पहुँचे जहाँ इसे पहुंचना चाहिए और इसके लिए जो भी संभव होगा करूंगा और आगे भी कृतसंकल्पित रहूंगा.

दिनेश कुमार राय, जिलाधिकारी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By SATISH KUMAR

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